पश्चिम एशिया में जब ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध छिड़ा तो एक बहुत बड़ी और चुपचाप हुई घटना सामने आई है. इजरायल ने अपनी सबसे आधुनिक लेजर हथियार प्रणाली 'आयरन बीम' को चुपके से UAE यानी संयुक्त अरब अमीरात में तैनात कर दिया.
साथ में इजरायली सैनिक भी भेजे. यह सब इसलिए किया गया ताकि UAE को ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाया जा सके. ये फाइनेंशियल टाइम्स अखबार ने यह बड़ा खुलासा किया है.
इजराइल ने सिर्फ आयरन बीम नहीं भेजा. उसने कई चीजें UAE को दीं. पहली चीज थी आयरन बीम लेजर सिस्टम. दूसरी चीज थी आयरन डोम जो मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने वाला मशीन है और इजरायल का सबसे जाना-पहचाना रक्षा हथियार है. तीसरी चीज थी स्पेक्ट्रो नाम का एक निगरानी यंत्र जो 20 किलोमीटर दूर से ईरानी ड्रोन को पहचान सकता है. इसके अलावा इजरायल ने UAE के साथ खुफिया जानकारी भी साझा की जिसमें यह भी बताया कि ईरान के अंदर से छोटी दूरी की मिसाइलें कब दागी जाने वाली हैं.
इजरायली सैनिक भी गए UAE?
यह सबसे चौंकाने वाली बात है. इजरायल ने सिर्फ हथियार नहीं भेजे बल्कि उन्हें चलाने के लिए अपने सैनिक भी भेजे. रिपोर्ट में कहा गया है कि दर्जनों इजराइली सैनिक UAE में तैनात थे. एक सूत्र ने कहा कि 'यह थोड़े सैनिक नहीं थे.' यह दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का अब तक का सबसे बड़ा कदम है.
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एक खास बात और
जो हथियार UAE को दिए गए उनमें से कई अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं थे. कुछ अभी प्रोटोटाइप यानी परीक्षण के दौर में थे और इजरायल की अपनी सेना के रडार सिस्टम से पूरी तरह जुड़े भी नहीं थे. लेकिन युद्ध की तेज रफ्तार को देखते हुए इजरायल ने इन्हें UAE को दे दिया. यानी जरूरत इतनी ज्यादा थी कि पूरी तैयारी का इंतजार नहीं किया जा सका. इसके बावजूद UAE ने इन सभी प्रणालियों का इस्तेमाल करके ईरान के ज्यादातर हमलों को नाकाम कर दिया.
यह सब क्यों जरूरी हो गया?
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए. ईरान ने जवाब में सिर्फ इजरायल या अमेरिका को नहीं बल्कि UAE को भी नुकसान पहुंचाया. रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने UAE पर 500 से ज्यादा बैलेस्टिक मिसाइलें और करीब 2000 ड्रोन दागे. UAE इसलिए निशाने पर था क्योंकि उसने 2020 में इजरायल के साथ दोस्ती का समझौता किया था.
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