टूटे पुल, बर्बाद घर और हाथ में बच्चों के कपड़े... ईरानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर दुनिया को दिखा रहे असली तस्वीर

ईरान में युद्ध और इंटरनेट शटडाउन के बीच सोशल मीडिया पर राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक पहचान और एकजुटता का उभार दिख रहा है, जहां लोग डिजिटल माध्यम से अपनी ताकत और अस्तित्व का संदेश दिया.

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जंग के बीच सोशल मीडिया पर उभरा ईरान का जज्बा (Photo: AI Generated) जंग के बीच सोशल मीडिया पर उभरा ईरान का जज्बा (Photo: AI Generated)

आकाश शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 17 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:13 PM IST

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच ईरान में इंटरनेट लगभग बंद है. 49 दिनों से वहां इंटरनेट की स्पीड सामान्य से सिर्फ 2 प्रतिशत रह गई है. लेकिन इसके बावजूद वहां से सोशल मीडिया पर एक खास तरह का कंटेंट आ रहा है. ईरानी महिलाएं, टीचर, ब्लॉगर और इन्फ्लुएंसर रात के अंधेरे में तेहरान की सड़कों पर झंडे लहराते हुए वीडियो बना रहे हैं. 

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टूटे हुए पुल और बर्बाद इमारतों के सामने खड़े होकर बोल रहे हैं. और यह सब वो अंग्रेजी में कर रहे हैं ताकि पूरी दुनिया देखे. India Today की OSINT टीम ने इस पूरे मामले को खंगाला. आइए समझते हैं यह क्या है और इसका मतलब क्या है.

India Today की टीम ने क्या खोजा?

India Today की OSINT टीम यानी ओपन सोर्स इंटेलिजेंस टीम ने युद्ध के दौरान ईरान के इंस्टाग्राम अकाउंट्स को ट्रैक किया. उन्होंने कम से कम 15 इन्फ्लुएंसर के अकाउंट देखे. इनमें ज्यादातर महिलाएं थीं जो स्टूडेंट, टीचर और ब्लॉगर हैं और जिनके हजारों-लाखों फॉलोअर हैं.

इंटरनेट मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म Netblocks के मुताबिक ईरान में इंटरनेट बंद हुए 49 दिन हो चुके हैं. सामान्य इंटरनेट का सिर्फ 2 प्रतिशत ही काम कर रहा है. कुछ लोगों को थोड़ी बहुत एक्सेस मिल रही है. इसके बावजूद कुछ इन्फ्लुएंसर रील्स पोस्ट कर रहे हैं जबकि बाकी बिल्कुल गायब हैं. यह सवाल उठाता है कि जब देश में अंधेरा है तो कौन दिख पा रहा है और क्यों?

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कैसा कंटेंट आ रहा है?

इन वीडियो की शुरुआत अक्सर ऐसे होती है कि एक महिला कैमरे की तरफ देखती है, ईरानी झंडा उठाती है और कहती है 'हाबीबी, तेहरान आओ.' आजादी टावर के पास बाइक गुजरती है. रात में गाड़ियों का काफिला चलता है. खिड़कियों से महिलाएं झंडे लहराती हैं.


लेकिन अगले ही फ्रेम में दृश्य बदल जाता है. टूटा हुआ पुल. बर्बाद इमारत. मलबे के सामने मोमबत्तियां. मारे गए नेताओं की तस्वीरें. यह कंटेंट एक साथ दो बातें कहता है कि हम तकलीफ में हैं और हम टूटे नहीं हैं.

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कौन-कौन से अकाउंट मिले?

पहला अकाउंट है 'zoha_handmade' नाम की जाही का जिनके करीब 1 लाख 14 हजार फॉलोअर हैं. पहले वो हस्तशिल्प यानी हाथ से बनी चीजों के लिए जानी जाती थीं. लेकिन अब वो सड़क पर निकलती हैं, महिलाओं को इकट्ठा करती हैं, नारे लगाती हैं और मारे गए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के पोस्टर उठाती हैं. उन्होंने अंग्रेजी में लिखा कि ईरान के लोगों को कम मत समझो, तुम उन लोगों की बाढ़ में डूब जाओगे जो जायोनिज्म से नफरत करते हैं.

दूसरा अकाउंट है 'mrs.hoseininejad' का जिनके करीब 38 हजार फॉलोअर हैं. उन्होंने 2 अप्रैल को एक हमले में तबाह हुई रिहायशी जगह पर जाकर वीडियो बनाया. मलबे के सामने खड़े होकर उन्होंने हाथ में बच्चों के कपड़े उठाए. एक सादा लेकिन बेहद असरदार तस्वीर पेश की.

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तीसरा अकाउंट है 'ali.yzf' का जो B1 ब्रिज पर गए जो करज शहर में था और जिसे अप्रैल की शुरुआत में हमले में तबाह किया गया था. बाहरी रिपोर्टों के मुताबिक यह एक नागरिक पुल था और इस हमले में नागरिकों की मौत हुई थी. उनकी इस रील को 7 लाख 36 हजार से ज्यादा बार देखा गया जो उनके किसी भी वीडियो से ज्यादा है.

चौथा और सबसे दिलचस्प अकाउंट है 'Fateme Khezri' का जो खुद को टीचर और पत्रकार बताती हैं. वो युद्ध शुरू होने के बाद ही सक्रिय हुई हैं. वो बम से तबाह हुई जगहों पर जाती हैं और साथ ही तेहरान के कैफे, म्यूजियम और आर्ट स्पेस भी दिखाती हैं. उन्होंने शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी पर हुए हमले को दिखाया जिसकी बाहरी रिपोर्टों ने भी पुष्टि की है कि वहां की रिसर्च सुविधाएं नुकसान में आई थीं. उन्होंने इसे अमेरिका और इजराइल का 'वॉर क्राइम' यानी युद्ध अपराध बताया.

अंग्रेजी में क्यों बोल रहे हैं?

यह सबसे खास बात है. India Today ने तीन महिला क्रिएटर्स 'fatmkhezri.official', 'etemady.mahdieh' और 'ksr.derakhshani' को पहचाना जो पश्चिमी लहजे में अंग्रेजी में बोलती हैं. वो पूछती हैं कि इस युद्ध का पैसा कौन दे रहा है? वो कहती हैं कि ईरानी कभी हार नहीं मानते. यह कंटेंट साफ तौर पर दुनिया के दर्शकों के लिए बनाया गया.

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इसका मतलब क्या है?

यह पूरी बात कई सवाल खड़े करती है. जब देश में इंटरनेट लगभग बंद है तो ये कुछ अकाउंट कैसे पोस्ट कर पा रहे हैं? क्या यह सरकार की तरफ से एक सोची-समझी रणनीति है? या यह सच में आम लोगों का गुस्सा और देशभक्ति है? India Today ने कहा कि यह जरूरी नहीं कि सब कुछ तय किया हुआ हो, लेकिन यह सवाल जरूर उठता है कि जब देश अंधेरे में हो तो कौन सी आवाज बाहर पहुंच पा रही है.

एक बात साफ है कि यह कंटेंट सिर्फ युद्ध की तस्वीर नहीं दिखाता. यह बताता है कि हम जिंदा हैं, हम टूटे नहीं हैं, और हमारी सभ्यता खत्म नहीं हुई.

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