ईरान ने रखीं युद्ध खत्म करने की 3 शर्तें, राष्ट्रपति पेजेशकियन बोले- तभी रुकेगी US-इजरायल से जंग

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी युद्ध को खत्म करने के लिए तीन बड़ी शर्तें रखी हैं. उन्होंने कहा कि ईरान के अधिकारों की मान्यता, युद्ध के लिए मुआवजा और भविष्य में हमलों के खिलाफ ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी मिलने पर ही संघर्ष समाप्त हो सकता है.

Advertisement
ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान. (File Photo) ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:10 AM IST

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है. तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और वैश्विक बाजारों में महंगाई की आशंका गहरा गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव और पाबंदियों की वजह से तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है. इसी बीच ईरान ने पहली बार खुलकर बताया है कि वह किन शर्तों पर अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध समाप्त करने को तैयार है.

Advertisement

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि युद्ध खत्म करने का एकमात्र रास्ता यह है कि ईरान के "वैध अधिकारों" को स्वीकार किया जाए, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई की जाए और भविष्य में किसी भी हमले के खिलाफ ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए. उनका कहना है कि अगर इन तीनों शर्तों को मान लिया जाता है तो तेहरान जंग समाप्त करने के लिए तैयार है.

यह भी पढ़ें: ईरान के पास परमाणु है...! हमले से इजरायल ही नहीं कई खाड़ी मुल्क भी हो सकते हैं तबाह

पेजेशकियन ने यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दिया. उन्होंने लिखा, "रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बात करते हुए, मैंने इस इलाके में शांति के लिए ईरान के वादे को फिर से पक्का किया. जायोनी शासन और US की वजह से शुरू हुई इस लड़ाई को खत्म करने का एकमात्र तरीका ईरान के कानूनी अधिकारों को पहचानने, हर्जाना देने और भविष्य में हमले के खिलाफ पक्की अंतरराष्ट्रीय गारंटी देने पर टिका है."

Advertisement

ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत "जायनिस्ट शासन और अमेरिका" की कार्रवाई से हुई. उनका कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस समझौता नहीं होता, तब तक युद्ध खत्म करना संभव नहीं होगा. ईरान इन देशों सहित अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में है और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है.

ईरान की यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में सामने आई है जब युद्ध दूसरे हफ्ते में पहुंच चुका है और फिलहाल तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे. तेहरान का कहना है कि वह क्षेत्र में शांति चाहता है, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार देशों को जवाबदेह ठहराया जाना जरूरी है.

यह भी पढ़ें: अमेरिका ने बड़ा ऐलान करके लिया यू-टर्न! ईरान की धमकी के बीच होर्मुज स्ट्रेट के पास भी नहीं फटक रहे तेल टैंकर?

यह संघर्ष 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त रूप से एहतियाती हमला किया. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए. इसके अलावा जॉर्डन, इराक और खाड़ी के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है. इन घटनाओं के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ा है और हालात और ज्यादा गंभीर होते जा रहे हैं.

Advertisement

विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री माइनिंग और बढ़ते सैन्य तनाव के कारण तेल और गैस के टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है और आने वाले समय में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement