ईरान की अयातुल्ला अली खामेनेई सरकार के विरोध में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों को दो हफ्ते हो चले हैं. विरोध प्रदर्शन बदस्तूर जारी है. लगातार उग्र होते इन प्रोटेस्ट को मद्देनजर रखते हुए प्रशासन ने इंटरनेट सेवा रोक दी. साथ ही कई जगह टेलीफोन लाइनें भी काट दी गईं. ऐसे में इस मुल्क में क्या हो रहा है, इस बारे में बहुत ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं हो पा रही है.
मगर इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई लगातार एक्टिव हैं और X पर पोस्ट कर रहे हैं. शुक्रवार को ही खामेनेई ने अपने X हैंडल पर 12 पोस्ट की थीं. इनमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी के साथ सलाह भी दी थी कि उन्हें अपने ईरान पर नहीं बल्कि अपने मुल्क पर ध्यान देना चाहिए.
लेकिन अहम सवाल है कि इंटरनेट शटडाउन के बावजूद खामेनेई एक्स पर एक्टिव कैसे हैं? इस बारे में नेटवर्क इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म केंटिक में इंटरनेट एनालिसिस के डायरेक्टर डग मैडोरी ने बताया ने सीएनएन को बताया कि ईरान तकनीकी रूप से अब भी इंटरनेट से जुड़ा हुआ है, भले ही वहां आम लोग इसका इस्तेमाल न कर पा रहे हैं.
उन्होंने कहा, 'ईरानी सरकार अगर इंटरनेट वापस चालू करना चाहती है तो वो किसी भी व्यक्ति या किसी खास इंटरनेट कनेक्शन के लिए ऐसा कर सकते हैं. शायद उनके पास कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन्हें उन्होंने पहले से ही कनेक्टेड रखने के लिए पहचान लिया है.'
उन्होंने कहा, 'हम देख सकते हैं कि थोड़ा बहुत ट्रैफिक आ रहा है. तो कुछ तो है. ये बहुत कम है लेकिन जीरो नहीं है. शायद कुछ खास लोग हैं जिनकी कनेक्टिविटी अब भी बनी हुई है.'
इसका मतलब हुआ कि ईरानी सरकार के पास ऐसी तकनीक है जिससे वो किसी के लिए भी इंटरनेट को बंद या चालू कर सकती है. बता दें कि ईरान में कई बार बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होते रहे हैं. आखिरी बार 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद इतने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे. मौजूदा प्रदर्शन आर्थिक संकट को लेकर हो रहे हैं. 28 दिसंबर को तेहरान में प्रदर्शन शुरू हुए थे.
प्रदर्शनकारियों ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ भी नारेबाजी कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस्लामिक रिपब्लिक के कारण आर्थिक संकट खड़ा हुआ है. मौजूदा प्रदर्शन की एक बड़ी वजह गिरती करंसी है. दुकानदारों का कहना है कि करंसी इतनी गिर गई है कि एक डॉलर की कीमत 14 लाख ईरानी रियाल हो गई है.
हाल के वर्षों में ईरान की करंसी बहुत कमजोर हुई है. साल 1979 में जब इस्लामिक क्रांति हुई थी तो एक डॉलर की कीमत 70 रियाल थी. 2015 के परमाणु समझौते के समय एक डॉलर 32 हजार रियाल के बराबर था.
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