ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अब उनकी जगह कौन लेगा, इसे लेकर पूरी दुनिया में चर्चा तेज है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि उनके बेटे को नया सुप्रीम लीडर चुन लिया गया है, लेकिन भारत में मौजूद ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि नए नेता को चुनने की प्रक्रिया अभी चल रही है और फिलहाल किसी के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है.
अभी नहीं चुना गया नया सर्वोच्च नेता
भारत में ईरान के प्रतिनिधि अयातुल्ला डॉ. अब्दुल मजीद हकीमेलाही ने गुरुवार को साफ किया कि ईरान ने अभी तक अपने नए सर्वोच्च नेता का चुनाव नहीं किया है. उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले में मारे गए खामेनेई के वारिस को चुनने का काम जारी है. उनके मुताबिक, अभी तक किसी भी व्यक्ति को इस पद के लिए न तो चुना गया है और न ही आधिकारिक तौर पर नामांकित किया गया है.
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बेटे मोजतबा के नाम पर क्या है सच्चाई?
हाल ही में खबरें आई थीं कि खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया उत्तराधिकारी बना दिया गया है. इस पर हकीमेलाही ने कहा कि ये खबरें गलत हैं. उन्होंने बताया कि मोजतबा रेस में जरूर शामिल हैं, लेकिन सिर्फ इसलिए नहीं कि वह खामेनेई के बेटे हैं. उनकी अपनी योग्यता भी देखी जा रही है. उनके अलावा और भी कई उम्मीदवार हैं और अभी सही व्यक्ति की तलाश जारी है.
हकीमेलाही ने बताया कि ईरान में सर्वोच्च नेता का चुनाव 88 सदस्यों की एक खास टीम करती है, जिसे 'असेम्बली ऑफ एक्सपर्ट्स' कहा जाता है. उन्होंने माना कि चुनाव में देरी की वजह मौजूदा युद्ध जैसे हालात हैं. ईरान इस समय अमेरिका और इजरायल के हमलों का सामना कर रहा है, इसलिए टीम के सदस्यों के लिए एक साथ बैठकर फैसला करना मुश्किल हो रहा है. जैसे ही हालात थोड़े सुधरेंगे, नए नेता के नाम का ऐलान कर दिया जाएगा.
खामेनेई और भारत का वो खास रिश्ता
इस दौरान अधिकारी ने खामेनेई को याद करते हुए एक दिलचस्प बात बताई. उन्होंने कहा कि खामेनेई भारत के इतिहास को बहुत पसंद करते थे. वे अक्सर लोगों से कहते थे कि अगर किसी को ईरान के इतिहास को गहराई से समझना है, तो उसे भारत का इतिहास जरूर पढ़ना चाहिए.
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क्या है पूरा मामला?
बता दें कि 86 साल के अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के एक बड़े हवाई हमले में उनकी मौत हो गई थी. इस हमले में उनके परिवार के कई और सदस्यों की भी जान चली गई थी. ईरान में यह पद सबसे बड़ा होता है क्योंकि देश के तमाम बड़े फैसले और सेना की कमान इसी नेता के हाथ में होती है.
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