पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच एक अहम खुलासा हुआ है कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने 2024 में इजरायल के हमलों से कमजोर हुए हिज्बुल्लाह के सैन्य ढांचे को फिर से खड़ा किया था. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, आईआरजीसी ने न केवल हिज्बुल्लाह के कमांड स्ट्रक्चर को पुनर्गठित किया, बल्कि अपने अधिकारियों को भेजकर उसकी सैन्य क्षमताओं को भी मजबूत किया.
हिज्बुल्लाह, जिसकी स्थापना 1982 में आईआरजीसी ने की थी, 2024 के युद्ध में भारी नुकसान झेल चुका था. इसमें उसके प्रमुख नेता हसन नसरल्लाह और कई शीर्ष कमांडरों की मौत हो गई थी. इसके बाद ईरान ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए संगठन को दोबारा खड़ा करने का काम शुरू किया. रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया कि करीब 100 आईआरजीसी अधिकारियों को लेबनान भेजा गया, जिन्होंने लड़ाकों को दोबारा प्रशिक्षित किया और हथियारों की आपूर्ति की निगरानी की.
साथ ही, उन्होंने हिज्बुल्लाह के कमांड स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव किया. पुरान ढांचे को खत्म कर छोटे-छोटे स्वतंत्र यूनिट्स बनाए गए, जिससे ऑपरेशन की गोपनीयता बनी रहे और इजरायली खुफिया एजेंसियों के लिए उन्हें निशाना बनाना मुश्किल हो. इन अधिकारियों ने ईरान और लेबनान से एक साथ मिसाइल हमले करने की योजना भी बनाई, जिसे 11 मार्च को पहली बार अंजाम दिया गया.
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एक सीनियर लेबनानी सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि ईरानी कमांडरों ने हिज्बुल्लाह को फिर से संगठित करने में अहम भूमिका निभाई है. हालांकि, वे सीधे तौर पर हमलों के लक्ष्य तय करने में शामिल नहीं हैं, बल्कि संघर्ष की गति को नियंत्रित करने में मदद कर रहे हैं. आईआरजीसी ने हिज्बुल्लाह को एक डिसेंट्रलाइज्ड मॉडल में बदल दिया है, जो 1980 के दशक की तरह छोटे-छोटे सेल्स पर आधारित है. इसे 'मोजेक डिफेंस' कहा जा रहा है, जिससे संगठन अधिक लचीला और टिकाऊ बनता है.
हालांकि, यह प्रक्रिया उस समय चल रही थी जब लेबनान सरकार और उसकी सेना हिज्बुल्लाह को निरस्त्र करने की कोशिश कर रही थी. रिपोर्ट के मुताबिक, लेबनान ने मार्च की शुरुआत में लगभग 100-150 ईरानी नागरिकों को देश छोड़ने के लिए कहा, जिनके आईआरजीसी से संबंध बताए गए. 7 मार्च को करीब 150 ईरानी नागरिकों ने बेरूत से रूस के लिए उड़ान भरी, जिनमें आईआरजीसी के अधिकारी भी शामिल थे. इसके बावजूद, लेबनान पर इजरायली हमलों में कई आईआरजीसी सदस्य मारे गए हैं.
आईआरजीसी और हिज्बुल्लाह का संबंध 1980 के दशक से गहरा रहा है. 2006 के युद्ध में भी ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी ने हिज्बुल्लाह के साथ मिलकर काम किया था. वहीं, हाल के इजरायली हमलों में जब हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह की मौत हुई, तब एक ईरानी जनरल भी उनके साथ मारा गया. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने हिज्बुल्लाह को फिर से खड़ा कर उसे मौजूदा संघर्ष में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार किया है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है.
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