ईरान ने मिनाब में एक स्कूल पर हुए घातक मिसाइल हमले को लेकर बड़ा खुलासा करते हुए दो अमेरिकी नौसेना अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है. इस हमले में करीब 175 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल थे. भारत, दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया में स्थित ईरानी दूतावासों ने रविवार को इन अधिकारियों की तस्वीरें जारी कर उनके नाम बताए. ईरान के मुताबिक, ये दोनों अधिकारी अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस स्प्रुएन्स (USS Spruance) से जुड़े हैं.
ईरान ने जिन अधिकारियों पर आरोप लगाया है, उनमें Leigh R. Tate (कमांडिंग अधिकारी) और Jeffrey E. York (कार्यकारी अधिकारी) शामिल हैं. आरोप है कि इन दोनों ने तीन बार टॉमहॉक मिसाइल दागने का आदेश दिया, जिससे मिनाब के एक स्कूल पर हमला हुआ और बड़ी संख्या में मासूम बच्चों की जान चली गई.
भारत में ईरानी दूतावास ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'इन दो दरिंदो को याद रखिए, जिन्होंने तीन बार मिसाइल दागकर 168 मासूम बच्चों की हत्या कर दी.' दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया स्थित दूतावासों ने भी इसी तरह के तीखे बयान जारी करते हुए सवाल उठाया कि क्या इन अधिकारियों के अपने बच्चे नहीं हैं.
ईरान ने जान बूझकर की गई कार्रवाई बताया
इस मुद्दे पर जिनेवा में हुई आपात बहस के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने इस हमले को 'सोची-समझी और जान बूझकर की गई कार्रवाई' बताया. उनका दावा है कि संघर्ष के पहले ही दिन यह हमला किया गया, जिसमें 175 से अधिक छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की जान गई.
अमेरिका ने कहा, गलती से गिर गई मिसाइल
हालांकि, अमेरिकी पक्ष ने इस हमले को लेकर अलग रुख अपनाया है. दि न्यू यॉर्क टाइम्स (The New York Times) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य जांच में शुरुआती तौर पर इसे खुफिया जानकारी की गलती बताया गया है. कहा गया है कि जिस टारगेट पर हमला करना था, उसके लिए पुराने नक्शों और डेटा का इस्तेमाल किया गया, जिससे पास के स्कूल पर मिसाइल गिर गई.
रिपोर्ट के अनुसार, मिसाइल का असली निशाना एक ईरानी सैन्य ठिकाना था, जो पहले उसी परिसर का हिस्सा था जहां यह प्राथमिक विद्यालय स्थित है. गलत या पुरानी लोकेशन जानकारी के कारण यह त्रासदी हुई.
क्या बोला अमेरिका?
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह आम नागरिक ढांचे को निशाना नहीं बनाता और इस पूरे मामले की समीक्षा की जा रही है. वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस हमले के पीछे ईरान की भी भूमिका हो सकती है और उसकी हथियार प्रणाली अक्सर सटीक नहीं होती. इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने हमले का वीडियो शेयर करते हुए अमेरिका पर जंग का आरोप लगाया है.
28 फरवरी को ऐसे समय में हमला हुआ जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले किए जा रहे थे. इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और खाड़ी देशों में कई ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है.
कब और कहां हुआ था हमला?
गौरतलब है कि ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले के पहले दिन इजरायल और अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के एक गर्ल्स स्कूल पर अटैक किया था, जिसमें कई छात्राओं की मौत हो गई थी. कुछ दिनों बाद मरने वालों का आंकड़ा 175 हो गया था. इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान में होर्मोजगान के एक स्कूल को निशाना बनाया था. इसमें कई छात्राओं ने अपनी जान गंवा दी, वहीं दर्जनों लड़कियां गंभीर रूप से घायल हई थीं.
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