सिर्फ बमबारी नहीं, खामेनेई का तख्तापलट असली टारगेट... ईरान से जंग के लिए US-इजरायल ने कसी कमर

ईरान पर संभावित हमले को लेकर बड़े संकेत सामने आए हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और इजरायल का मकसद सिर्फ ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि इस्लामिक रिपब्लिक की राजनीतिक नेतृत्व व्यवस्था को हिलाना और खामेनेई को सत्ता से बेदखल करना है.

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ईरान के खिलाफ अमेरिका सिर्फ हमला नहीं, बल्कि खामेनेई को हटाना चाहता है. (Photo- ITG) ईरान के खिलाफ अमेरिका सिर्फ हमला नहीं, बल्कि खामेनेई को हटाना चाहता है. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:52 AM IST

ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक अगर अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो उसका मुख्य लक्ष्य देश के पहले से कमजोर न्यूक्लियर प्रोग्राम को तबाह करना नहीं होगा, बल्कि इस्लामिक रिपब्लिक के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व को निशाना बनाना होगा.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और इजरायल की रणनीति ईरान में गुस्से से भरे प्रदर्शनकारियों को दोबारा सड़कों पर उतारने और आयतुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सत्ता संरचना को अस्थिर करने की हो सकती है. गार्जियन के मुताबिक USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की क्षेत्र में तैनाती की घोषणा के बाद ईरान एक नए अमेरिकी-इजरायली हमले की आशंका में हाई अलर्ट पर है.

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एक्सपर्ट्स का मानना है कि वॉशिंगटन के पास इजरायली फाइटर जेट्स के साथ मिलकर इतनी सैन्य ताकत मौजूद है कि वह ईरान की सरकार को गिराने की दिशा में हमला कर सके. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस्लामिक रिपब्लिक पर पहले ही बड़े प्रदर्शनों के दौरान हजारों नागरिकों की हत्या के आरोप लग चुके हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है.

कई विध्वंसक पोत अब भी मिडिल ईस्ट के रास्ते में

गार्जियन के अनुसार, अमेरिकी नौसेना का बेड़ा, जिसमें गाइडेड मिसाइलों से लैस कई विध्वंसक पोत शामिल हैं, अभी अपनी अंतिम तैनाती स्थिति में नहीं पहुंचा है, लेकिन वह ईरान पर हमले की मारक दूरी के भीतर जरूर मौजूद है. इससे तेहरान में आशंकाएं और गहरी हो गई हैं.

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कूटनीतिक समाधान के आसार नहीं!

इस बीच किसी भी कूटनीतिक समाधान के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी अनिश्चितता के बीच सोमवार को ईरान का शेयर बाजार रिकॉर्ड गिरावट के साथ धड़ाम हो गया. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने देश में महंगाई दर 60 फीसदी तक पहुंच गई थी, जिसने आम लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है.

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मसलन, ईरान की करेंसी पूरी तरह धाराशायी हो चुकी है और लोगों की जीना मुहाल है. बढ़ते सैन्य दबाव, आर्थिक संकट और आंतरिक असंतोष के बीच ईरान के लिए आने वाले दिन बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं.

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