ईरान में अमेरिका-इजरायल की जंग और सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत को एक सप्ताह हो चुका है. लेकिन ईरान में अब तक नया नेता नहीं चुना गया है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के अगले नेता को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं. उन्होंने पहले ही खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश के अगले नेता के रूप में खारिज कर दिया है. अब उनका कहना है कि जरूरी नहीं कि ईरान का अगला नेता लोकतांत्रिक ही हो, अगर किसी धार्मिक नेता के हाथ में भी सत्ता रहती है तो उन्हें इससे कोई समस्या नहीं है.
सीएनएन के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उनके लिए यह ज्यादा अहम है कि ईरान में ऐसा नेता हो जो निष्पक्ष और न्यायपूर्ण तरीके से काम करे. उन्होंने कहा, "यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह व्यक्ति कौन है. मुझे धार्मिक नेताओं से कोई दिक्कत नहीं है. मैं कई धार्मिक नेताओं के साथ काम करता हूं और वे शानदार होते हैं."
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ट्रंप ने यह भी साफ किया कि ईरान में लोकतांत्रिक नेता होना जरूरी नहीं है. उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कह रहा कि वहां लोकतंत्र ही होना चाहिए. वहां ऐसा नेता होना चाहिए जो निष्पक्ष हो, अच्छा काम करे और अमेरिका-इजराइल के साथ अच्छा व्यवहार करे."
'जो नेता मध्य-पूर्व के दूसरे देशों के साथ भी अच्छा व्यवहार करे'
राष्ट्रपति ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान का नेता क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भी बेहतर संबंध रखे. उन्होंने कहा, "उसे मध्य-पूर्व के दूसरे देशों के साथ भी अच्छा व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि वे सभी हमारे साझेदार हैं." ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर ईरान से "बिना शर्त आत्मसमर्पण" की मांग की. अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर कई हवाई हमले किए हैं. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत की खबर भी सामने आई थी.
हालांकि ट्रंप ने पहले ईरान की जनता से अपने शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरने की अपील भी की थी, लेकिन अभी तक इस तरह का कोई बड़ा जन आंदोलन सामने नहीं आया है. जबकि खामेनेई की मौत पर देश के कई हिस्से में विरोध-प्रदर्शन देखा गया है, जो लगातार अपने नेता की मौत का बदला लेने की मांग कर रहे हैं. वहीं अपने एक अन्य बयान में ट्रंप कह चुके हैं कि वह नहीं चाहते की ईरान का अगला नेता अली खामेनेई का मोजतबा खामेनेई बने.
US बेस कोलगातार निशाना बना रहा ईान
दूसरी तरफ ईरान भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है. हाल के दिनों में ईरान ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल कम किया है, लेकिन उसने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी देशों पर कम दूरी की मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए हैं.
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इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी एक इंटरव्यू में बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ईरान पर जमीनी हमला करता है तो ईरान इसके लिए तैयार है और उसे विश्वास है कि वह इस युद्ध में जीत हासिल कर सकता है. उन्होंने कहा कि वे अमेरिकी ग्राउंड फोर्स का इंतजार कर रहे हैं.
ट्रंप ने बिना शर्त सरेंडर की अपील की
ट्रंप के "बिना शर्त आत्मसमर्पण" वाले बयान को लेकर भी काफी चर्चा हुई. बाद में व्हाइट हाउस ने इस बयान को थोड़ा नरम करते हुए कहा कि यह तय करना राष्ट्रपति का अधिकार है कि ईरान ने उनकी शर्तें पूरी की हैं या नहीं.
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव केरोलिन लेवित ने कहा, "जब राष्ट्रपति, जो सेना के सर्वोच्च कमांडर हैं, यह तय करेंगे कि ईरान अब अमेरिका के लिए खतरा नहीं रहा और ऑपरेशन के लक्ष्य पूरे हो चुके हैं, तब इसे बिना शर्त आत्मसमर्पण की स्थिति माना जाएगा."
ट्रंप प्रशासन पहले भी ईरान की सरकार की आलोचना करता रहा है. इस साल ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. इन प्रदर्शनों के दौरान सरकार पर आम नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आरोप लगे थे.
हालांकि ट्रंप के हालिया बयान से यह संकेत मिलता है कि अगर ईरान में धार्मिक व्यवस्था बनी रहती है तो भी अमेरिका को उससे आपत्ति नहीं होगी, बशर्ते वहां का नेतृत्व अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ बेहतर संबंध बनाए रखे.
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