'तेल का एक भी कुआं नहीं फटा', 120 डॉलर हुआ क्रूड तो ईरान ने उड़ाया ट्रंप का मजाक!

ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की होर्मुज स्ट्रेट में लागू नाकेबंदी और तेल निर्यात पर प्रतिबंधों को पूरी तरह विफल बताया है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगर गालिबाफ ने ट्रंप की धमकियों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि तेल उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ, बल्कि तेल की कीमतें बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं.

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अमेरिकी नाकेबंदी से ईरान को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है (Photo: AFP) अमेरिकी नाकेबंदी से ईरान को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है (Photo: AFP)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:57 PM IST

ईरान ने अपने तेल निर्यात को निशाना बनाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों का मजाक उड़ाया है. उसने होर्मुज स्ट्रेट में लागू अमेरिकी नाकेबंदी पर तंज करते हुए इसे पूरी तरह विफल बताया है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगर गालिबाफ ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा है कि अमेरिकी प्रतिबंधों से ईरान का तेल उत्पादन प्रभावित तो नहीं हुआ, उलटे तेल की कीमतें बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल हो गईं.

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दरअसल, ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के बीच 26 अप्रैल को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा था कि 'तीन दिनों के भीतर 'बहुत शक्तिशाली' विस्फोट होगा और ईरान के तेल के कुएं फट जाएंगे.'

ट्रंप की तय समयसीमा गुजरने के बाद गालीबाफ ने उनकी इस धमकी का मजाक उड़ाया है. उन्होंने कहा, 'तीन दिन हो गए, कोई कुआं नहीं फटा. हम इसे 30 दिन तक भी बढ़ा सकते हैं और यहां से कुओं का लाइव प्रसारण भी कर सकते हैं.'

उन्होंने आगे लिखा, 'अमेरिकी प्रशासन को बेसेंट जैसे लोगों से इसी तरह की घटिया सलाह मिलती है, जो नाकेबंदी के सिद्धांत को आगे बढ़ाते हैं और तेल की कीमत को 120 डॉलर से ऊपर पहुंचा देते हैं. तेल की कीमतें अब 140 डॉलर तक जाएंगी. समस्या सिद्धांत नहीं, बल्कि सोच है.'

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अमेरिकी का नाकेबंदी से ईरान के तेल निर्यात पर पड़ा है असर

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर के बावजूद, उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रखी है जिससे कोई भी कमर्शियल जहाज होर्मुज के जरिए न तो ईरान जा पा रहा है और न ही वहां से आ पा रहा है. इस नाकाबंदी ने ईरान के तेल निर्यात को भारी नुकसान पहुंचाया है.

अमेरिका को उम्मीद है कि ईरान तेल न बेच पाने के कारण अपना उत्पादन घटा देगा. इससे उसका राजस्व भी गिर जाएगा या पाइपलाइनों और भंडारण में दबाव बढ़ने से बुनियादी ढांचे को नुकसान उठाने जैसे विकल्पों में से चुनना पड़ेगा.

ईरान के बहुत से तेल कुओं में पानी इंजेक्शन तकनीक का इस्तेमाल होता है और इन कुओं का संचालन लगातार जरूरी होता है. अगर उनसे तेल निकालना बंद कर दिया जाए तो उन्हें स्थायी नुकसान हो सकता है या उत्पादन में लंबे समय की गिरावट आ सकती है.

निर्यात बंद होने से ईरान की तेल भंडारण क्षमता तेजी से खत्म हो रही है. इस बीच उसने 30 साल से खाली और निष्क्रिय पड़े फ्लोटिंग टैंकर 'नाशा' को फिर से सक्रिय किया है. यह स्टोरेज समुद्र में है और अब ईरान अपना तेल वहां स्टोर करने जा रहा है.

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ट्रंप इस नाकेबंदी को तब तक जारी रखने के पक्ष में दिख रहे हैं जब तक ईरान के साथ स्थायी शांति समझौता नहीं हो जाता, ताकि बातचीत में चल रहे गतिरोध को खत्म किया जा सके. इस नाकाबंदी से ईरानी सरकार की आय और विदेशी मुद्रा का एक अहम स्रोत प्रभावित हुआ है, क्योंकि तेल शिपमेंट रोके या जब्त किए जा रहे हैं.

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