अमेरिका और इजरायल का मिलकर ईरान पर हमला करना पूरे मिडिल ईस्ट के लिए मुसीबत बन गया है. जिनेवा में बातचीत को अधर में लटकाकर ट्रंप ने ईरान पर हमले का ऐलान यह कहकर किया कि ईरान एक बहुत बड़ा खतरा है. लेकिन पेंटगन की सीक्रेट मीटिंग से ट्रंप की पोल खोल दी है!
इस मामले से वाकिफ दो अधिकारियों ने जानकारी दी कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के अधिकारियों की रविवार को हुई सीक्रेट मीटिंग के दौरान ट्रंप के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि ऐसी कोई खुफिया जानकारी नहीं थी जिससे यह संकेत मिलता हो कि ईरान पहले अमेरिकी बलों पर हमला करने की योजना बना रहा था.
अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका और इजराइल ने शनिवार को ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया. इस ऑपरेशन में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए. ईरानी युद्धपोतों को डुबो दिया गया और अब तक 1,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है.
लेकिन रविवार को पेंटागन की इस मीटिंग में दिए गए बयान से ट्रंप का वो पुराना दावा खारिज हो जाता है. दरअसल ट्रंप सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमला करने का फैसला आंशिक रूप से इसलिए लिया क्योंकि संकेत मिल रहे थे कि ईरान मध्यपूर्व में तैनात अमेरिकी बलों पर संभावित रूप से हमला कर सकता है.
अमेरिकी सरकार के इस अधिकारी ने बताया था कि ट्रंप मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैनिकों को चुपचाप हमले झेलने देने की अनुमति नहीं देने वाले थे.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता डायलन जॉनसन ने बताया कि पेंटागन के अधिकारियों ने रविवार को सीनेट और प्रतिनिधि सभा की कई राष्ट्रीय सुरक्षा समितियों को ईरान पर चल रहे अमेरिकी हमले को लेकर 90 मिनट से अधिक समय तक ब्रीफिंग दी थी.
बंद कमरे में हुई इस ब्रीफिंग में अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें और क्षेत्र में सक्रिय उसके प्रॉक्सी बल अमेरिकी हितों के लिए खतरा थे. हालांकि, तेहरान द्वारा पहले अमेरिकी बलों पर हमला करने की कोई खुफिया जानकारी मौजूद नहीं थी.
ट्रंप ने कहा कि यह हमला इस उद्देश्य से किया गया कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके. उसके मिसाइल कार्यक्रम को नियंत्रित किया जाए और अमेरिका एवं उसके सहयोगियों के खिलाफ खतरों को खत्म किया जाए. उन्होंने ईरान की जनता से सरकार के खिलाफ उठ खड़े होने और शासन को उखाड़ फेंकने की भी अपील की.
हालांकि, डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रंप पर चुनाव की जंग छेड़ने का आरोप लगाया है. उन्होंने उस फैसले की भी आलोचना की है जिसके तहत ट्रंप ने शांति वार्ता को छोड़ दिया, जबकि ओमान का कहना था कि बातचीत में अब भी संभावना बाकी थी.
ट्रंप ने बिना कोई सबूत पेश किए दावा किया कि ईरान जल्द ही ऐसी क्षमता हासिल करने वाला था जिससे वह बैलिस्टिक मिसाइल के जरिए अमेरिका पर हमला कर सके. युद्ध के औचित्य को लेकर उठते सवालों के बीच अमेरिकी सेना ने रविवार को इस संघर्ष में पहले अमेरिकी हताहतों की जानकारी दी.
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