अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से युद्ध की धमकियां झेल रहे ईरान को संयुक्त राष्ट्र में अहम जिम्मेदारी मिली है. ईरान को यूनाइटेड नेशंस स्पेशल कमिटी ऑन द चार्टर का वाइस-चेयर चुना गया है. यह बॉडी UN के बुनियादी सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं. अब इस कमेटी में ईरान उपाध्यक्ष देश के तौर पर काम करेगा.
18 फरवरी 2026 को न्यूयॉर्क में UN हेडक्वार्टर में हुई मीटिंग में लिए गए फैसले के मुताबिक ईरान स्पेशल कमिटी ऑन द चार्टर के वाइस-चेयर के तौर पर काम करेगा, साथ ही कमिटी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स का मेंबर भी होगा.
1974 में यूनाइटेड नेशंस के फ्रेमवर्क के अंदर बनी यह कमिटी, UN चार्टर को तय करने के संबंध में सीधी और अहम भूमिका निभाती है.
कमेटी की खास जिम्मेदारियों में इंटरनेशनल शांति और सुरक्षा बनाए रखने से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना, झगड़ों को शांति से सुलझाने को बढ़ावा देना, और इंटरनेशनल कानून के नियमों को मजबूत करना और उन्हें लागू करना शामिल है.
इसके मिशन में इंटरनेशनल कानूनी सिस्टम की विश्वसनीयता बनाए रखना, साथ ही UN के चार्टर के दायरे में उसकी कुशलता और असर को बेहतर बनाने के प्रस्तावों की जांच करना भी शामिल है.
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी ने कहा है कि मौजूदा हालात में स्पेशल कमेटी की भूमिका और भी जरूरी हो गई है, जब इंटरनेशनल सिस्टम अपने कुछ सदस्यों द्वारा एकतरफ़ा नज़रिए से UN के सिद्धांतों के उल्लंघन के कारण गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है.
इजरायल ने किया विरोध
इजरायल और अमेरिका ने UN में हुई इस नियुक्ति का विरोध किया है.
यूनाइटेड नेशंस में इजरायल के एम्बेसडर, डैनी डैनन ने बुधवार को यूनाइटेड नेशंस के चार्टर पर UN स्पेशल कमिटी के वाइस-चेयर के तौर पर ईरान के अपॉइंटमेंट की आलोचना की और इसे “नैतिक रूप से बेतुका” बताया.
उन्होंने कहा, “जो सरकार UN के बेसिक प्रिंसिपल्स को तोड़ती है,वह उन्हें मजबूत करने वाली लीडरशिप पोजीशन पर नहीं बैठ सकती.”
आम सहमति के बाद ही कार्रवाई कर पाती है कमेटी
ईरान ने कमिटी के ओपनिंग सेशन में बिना किसी फॉर्मल वोट के यह पोजीशन हासिल की. यह कमिटी जो UN लीगल कमिटी की सब्सिडियरी है, चार्टर प्रिंसिपल्स और उन्हें मज़बूत करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए हर साल मिलती है, हालांकि आम सहमति वाले नियम इसके प्रैक्टिकल असर को कम करते हैं और हाल के सालों में यह सदस्य देशों के बीच बड़े पॉलिटिकल झगड़ों की जगह बन गई है.
दरअसल यह चार्टर कमेटी U.N. लीगल कमेटी के तहत काम करती है और हर साल मिलती है. इसके काम में चार्टर से जुड़े मुद्दों की जांच करना और इसे लागू करने के तरीके सुझाना शामिल है, हालांकि इसके काम के लिए आम तौर पर सदस्य देशों के बीच आम सहमति की जरूरत होती है और शायद ही कभी कोई जरूरी कार्रवाई होती है.
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