स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही ठप... अब तक 10 जहाजों पर हमला, रिपोर्ट में खुलासा

पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री रास्ता बन गया है. पिछले एक हफ्ते में यहां 10 कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया गया है, जिसमें 7 लोगों की जान जा चुकी है. ईरान की घेराबंदी और मिसाइल हमलों के डर से टैंकरों की आवाजाही 90 प्रतिशत तक गिर गई है.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 10 जहाजों पर हमला. (File photo: ITG) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 10 जहाजों पर हमला. (File photo: ITG)

aajtak.in

  • तेहरान/दुबई/पेरिस,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:31 AM IST

अमेरिका-इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकाबंदी कर दी है, जिससे पूरी दुनिया में क्रूड ऑयल की सप्लाई चेन चरमरा गई है और क्रूड ऑयल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है. इसी बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में अब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में या उसके आसपास कम से कम 10 जहाजों पर हमले हुए हैं. इन हमलों ने इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर जहाजों की आवाजाही को लगभग पूरी तरह रोक दिया है, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस गुजरता है.

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को अपनी रिपोर्ट में एक हफ्ते के अंदर नौ हमलों की पुष्टि की, जिनमें सात लोगों की मौत हो गई. 2 मार्च को 'स्काईलाइट', 'एमकेडी व्योम' और 'स्टेना इमपेरेटिव' पर हुए हमलों में तीन लोग मारे गए, जबकि 6 मार्च को 'मुसाफह 2' पर हमले में चार लोगों की जान गई. इन हमलों और संदिग्ध गतिविधियों के कारण इस सामरिक जलमार्ग से होने वाला टैंकर ट्रैफिक 90 प्रतिशत तक गिर गया है. ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO और IMO लगातार इन हमलों पर नजर रख रहे हैं.

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बचाव दलों पर भी हमला

समुद्री सुरक्षा फर्म 'वैनगार्ड' के अनुसार, 'मुसाफह 2' नामक जहाज पर उस वक्त दो मिसाइलों से हमला किया गया, जब वह दो दिन पहले हमले का शिकार हुए 'सफीन प्रेस्टीज' की मदद करने की कोशिश कर रहा था.

पश्चिमी नौसैनिक गठबंधन द्वारा संचालित जॉइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर (JMIC) ने चेतावनी दी है कि जो जहाज संकट में फंसे जहाजों की सहायता या बचाव कार्य के लिए आगे आ रहे हैं, उन पर भी दोबारा हमले का खतरा बढ़ गया है. ये पैटर्न दिखाता है कि हमलावरों का उद्देश्य जहाजों को डुबोने के बजाय समुद्री मार्ग में अनिश्चितता पैदा करना और सामान्य वाणिज्यिक आवाजाही को रोकना है.

इंडोनेशियाई क्रू मेंबर लापता

वहीं, इंडोनेशिया ने रविवार 8 मार्च 2026 को जानकारी दी कि 'मुसाफह 2' से मिलते-जुलते विवरण वाला एक जहाज दो दिन पहले डूब गया था.

जकार्ता की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना में तीन इंडोनेशियाई क्रू मेंबर लापता हैं, जबकि एक घायल समेत कुल पांच लोगों को बचा लिया गया है.

मरीन ट्रैफिक डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि सोमवार से अब तक केवल नौ कमर्शियल जहाज ही इस जलडमरूमध्य को पार कर पाए हैं. स्थिति इतनी गंभीर है कि कई जहाज अपनी पहचान और लोकेशन छिपाकर (मास्किंग) यात्रा करने को मजबूर हैं.

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ईरान के विरोधाभारी बयान

दूसरी ओर ईरान की ओर से इस संकट को लेकर अलग-अलग संदेश मिल रहे हैं. 2 मार्च को रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के एक जनरल ने चेतावनी दी थी कि वो होर्मुज पार करने वाले "हर जहाज को जला देंगे", लेकिन विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को कहा कि ईरान का इरादा जलडमरूमध्य को बंद करने का नहीं है.

इस बीच अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा है कि जैसे ही स्थिति अनुकूल होगी, वो व्यापारी जहाजों को एस्कॉर्ट (सुरक्षा) प्रदान करेंगे.

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण इन समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने के लिए एक गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

वैश्विक तेल बाजार पर संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य से सामान्यतः दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) गुजरती है. विश्लेषण फर्म 'केप्लर' के अनुसार, एक हफ्ते में यहां से गुजरने वाले टैंकरों की संख्या में 90 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है. ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण जहाजों ने वैकल्पिक रास्तों की तलाश शुरू कर दी है. ईरान खुद अपना तेल इसी रास्ते से निर्यात करता है, लेकिन उसकी भविष्य की योजनाएं अभी स्पष्ट नहीं हैं, अगर ये नाकाबंदी और हमले जारी रहते हैं तो दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें आसमान छू सकती हैं.

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