शांति समझौते पर फिर पेच... ईरान ने कहा- ताजा शांति प्रस्ताव के लिए और चाहिए वक्त, सुप्रीम लीडर से हरी झंडी का इंतजार

वेस्ट एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते में देरी के कारण तनाव जारी है. तेहरान ने संशोधित प्रस्ताव के लिए अतिरिक्त समय मांगा है, जबकि कूटनीतिक बातचीत और सैन्य गतिविधियां दोनों जारी हैं.

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ईरान ने शांति प्रस्ताव के लिए और वक्त मांगा है ईरान ने शांति प्रस्ताव के लिए और वक्त मांगा है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:00 AM IST

वेस्ट एशिया में जंग भले ही रुकी नजर आ रही है, लेकिन तनाव अभी भी बरकरार है. ईरान-आमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते पर एक बार फिर पेच फंसता नजर आ रहा है. तेहरान ने साफ संकेत दिया है कि संशोधित शांति प्रस्ताव पेश करने से पहले उसे और समय चाहिए, क्योंकि अंतिम फैसला सुप्रीम लीडर से होना है. इस देरी ने कूटनीतिक हल की प्रक्रिया को धीमा जरूर किया है, लेकिन बातचीत अब भी जारी है.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान समेत अन्य मिडिएटर्स को उम्मीद थी कि ईरान जल्द ही नया प्रपोजल देगा, लेकिन अब तेहरान ने इंटरनल बातचीत और सुझावों का हवाला देते हुए कुछ और समय मांगा है. सूत्रों का कहना है कि सुप्रीम लीडर के साथ इसे लेकर विचार-विमर्श चल रहा है, जिसके बाद ही प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा.

अराघची कर रहे हैं लगातार बैठकें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रूस दौरे से तेहरान लौट चुके हैं और वे वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं. माना जा रहा है कि संशोधित प्रस्ताव तैयार करने और उसे स्वीकार्य बनाने में उनकी भूमिका बेहद अहम है. हालांकि, प्रक्रिया इसलिए भी जटिल हो गई है क्योंकि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से संपर्क करना आसान नहीं है और उनकी लोकेशन सार्वजनिक नहीं है.

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इससे पहले ईरान ने जो प्रस्ताव रखा था, उसमें पहले युद्ध खत्म करने और बाद में परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल मुद्दों पर बातचीत करने की बात कही गई थी, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. इसके बाद तेहरान को अपनी रणनीति पर दोबारा काम करना पड़ा और अब वह अधिक संतुलित प्रस्ताव तैयार करने की कोशिश में जुटा है.

कितना फ्लैक्सिबल होगा ईरान का नया प्रस्ताव?
सूत्रों के मुताबिक, अब पूरा मामला इस बात पर टिका है कि ईरान का नया प्रस्ताव कितना फ्लैक्सिबल होता है और क्या वह अमेरिका की शर्तों के करीब पहुंच पाता है या नहीं. फिलहाल बैकचैनल कूटनीति जारी है और मध्यस्थ देशों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कोई ठोस प्रगति हो सकती है.

इसी बीच, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर ईरान को लेकर कड़ा रुख दिखाया है. उन्होंने दावा किया कि ईरान खुद को 'गंभीर संकट की स्थिति' में बता रहा है और वह होर्मुज को जल्द खोलने की मांग कर रहा है. ट्रंप के मुताबिक, ईरान फिलहाल अपने नेतृत्व की स्थिति को संभालने में जुटा है.

हालांकि, जमीनी स्थिति इससे अलग नजर आ रही है. ईरान की सेना ने साफ किया है कि वह मौजूदा हालात को पूरी तरह शांत नहीं मानती. सेना के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका के साथ युद्धविराम के बावजूद भरोसे की कमी है और संघर्ष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने यह भी बताया कि सेना अपने संसाधनों को फिर से मजबूत कर रही है और संभावित लक्ष्यों की सूची अपडेट कर रही है.

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इस बीच, अमेरिकी रणनीति को लेकर भी नई जानकारी सामने आई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन फिलहाल सीधे सैन्य कार्रवाई से बचते हुए लंबी अवधि की नाकेबंदी पर जोर दे रहा है. खासतौर पर होरमुज के आसपास दबाव बनाने की योजना पर काम हो रहा है. इसे ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसे परमाणु समझौते पर झुकाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
क्षेत्रीय स्तर पर भी इसके असर दिखाई दे रहे हैं. 

एक तरफ कूटनीति, दूसरी तरफ शांति प्रस्ताव
UAE ने वैश्विक तेल उत्पादक संगठन OPEC छोड़ने का ऐलान किया है. यूएई के ऊर्जा मंत्री सोहैल मोहम्मद अल-मजरुई ने कहा कि यह फैसला देश की नई ऊर्जा रणनीति के तहत लिया गया है. करीब 60 साल बाद संगठन से अलग होना OPEC के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. वहीं, यूनाइटेड स्टेट्स मरीन Corps ने अरब सागर में एक संदिग्ध व्यापारी जहाज “Blue Star III” को रोका और तलाशी ली. बाद में यह स्पष्ट होने पर कि जहाज ईरानी बंदरगाह की ओर नहीं जा रहा, उसे जाने दिया गया. 

इज़राइल भी इस पूरे घटनाक्रम में सक्रिय नजर आ रहा है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह की एक बड़ी सुरंग को नष्ट कर दिया गया है. इसे क्षेत्रीय तनाव के और बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. कुल मिलाकर, एक तरफ शांति प्रस्ताव को लेकर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, तो दूसरी तरफ सैन्य और आर्थिक दबाव की रणनीतियां भी बराबर में ही चल रही हैं. 

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