‘न्यूक्लियर नीति नहीं बदलेगी...’, ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट के लिए नए नियमों की वकालत की

ईरान ने कहा है कि उसकी न्यूक्लियर नीति में बदलाव की संभावना नहीं है और जंग के बाद होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया नियम जरूरी होगा. साथ ही अमेरिका पर हमलों की जिम्मेदारी भी डाली गई है. खाड़ी मुल्कों में शहरी इलाकों में किए गए हमले पर ईरान ने कहा कि वहां अमेरिका के सैनिक छुप गए थे, इसलिए वहां हमले किए गए.

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ईरान ने तेल रास्ते और न्यूक्लियर नीति पर दिखाया सख्त रुख (Photo: AP) ईरान ने तेल रास्ते और न्यूक्लियर नीति पर दिखाया सख्त रुख (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:28 AM IST

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध, न्यूक्लियर नीति, होर्मुज स्ट्रेट और खाड़ी मुल्कों पर हमला को लेकर खुलकर बात की है. अराघची ने कहा कि ईरान की न्यूक्लियर हथियार न बनाने की नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा. पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई - जो इस जंग में मारे जा चुके हैं ने 2000 के दशक में एक धार्मिक आदेश यानी फतवा जारी किया था जिसमें परमाणु हथियार बनाना इस्लाम के खिलाफ बताया गया था.

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लेकिन अराघची ने यह भी कहा कि फतवा उस धार्मिक नेता पर निर्भर करता है जो उसे जारी करे. नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अभी तक इस पर कोई राय पब्लिक नहीं की है, इसलिए वे अभी कुछ पक्का नहीं कह सकते.

अमेरिका और इजरायल हमेशा से आरोप लगाते रहे हैं कि ईरान न्यूक्लियर हथियार बनाना चाहता है. ईरान हमेशा कहता आया है कि उसका न्यूक्लियर कार्यक्रम सिर्फ बिजली और शांतिपूर्ण कामों के लिए है.

होर्मुज स्ट्रेट पर नए नियम क्यों?

अराघची ने कहा कि जंग खत्म होने के बाद खाड़ी के सभी देशों को मिलकर होर्मुज के लिए नए नियम बनाने चाहिए. यह नियम ईरान और इस पूरे इलाके के हितों को ध्यान में रखकर बनने चाहिए.

याद रहे कि होर्मुज वह संकरा रास्ता है जिससे दुनिया का पांचवां हिस्सा यानी 20 फीसदी तेल और गैस गुजरती है. ईरान ने इसे बंद कर दिया है और कहा है कि अमेरिका, इजरायल और उनके साथियों को एक बूंद तेल भी नहीं जाने देंगे.

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यह भी पढ़ें: US-Israel War on Iran LIVE: तेल-गैस ठिकानों पर खतरा... कतर पर हमले के बाद ईरान ने खाड़ी के देशों को दी चेतावनी

ईरान की संसद के स्पीकर ने भी साफ कह दिया है कि जंग के बाद होर्मुज पहले जैसा नहीं रहेगा.

अमेरिका चाहता था कि NATO देश मिलकर इस रास्ते की सुरक्षा करें, लेकिन ज्यादातर NATO देशों ने मना कर दिया. फ्रांस ने कहा कि वह सिर्फ सीजफायर के बाद और ईरान से बातचीत के बाद ही किसी गठबंधन में शामिल होगा.

जंग कब खत्म होगी?

अराघची ने कहा कि जंग तभी खत्म होगी जब. पूरे इलाके में हमेशा के लिए शांति हो. ईरान को हुए नुकसान का मुआवजा मिले.

खाड़ी देशों में आम लोगों पर हमलों का जवाब

जब पूछा गया कि ईरान के हमलों से खाड़ी देशों में रिहायशी और कॉमर्शियल इलाके क्यों प्रभावित हुए, तो अराघची ने कहा कि अमेरिकी सेना शहरी इलाकों के पास जाकर छुप गई थी. इसलिए जहां भी अमेरिकी ठिकाने थे, वहां हमला किया गया.

उन्होंने माना कि खाड़ी देशों के लोगों को तकलीफ हुई और वे नाराज हैं. लेकिन सारी जिम्मेदारी अमेरिका पर डाली जो 28 फरवरी को यह जंग शुरू करके आया.

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