प्रवासी से सत्ता तक... इन भारतीय मूल के नेताओं ने कनाडा की राजनीति में बनाई मजबूत पहचान

अपना वतन छोड़कर किसी देश में प्रवासी की तरह रहना और फिर उस देश में अपनी जड़ें इतनी मज़बूत कर लेना कि सत्ता की बागडोर आपके हाथ में आ जाए. ये सफर आसान नहीं होता. अनगिनत कुर्बानियां और कड़ी मेहनत के बाद कई भारतीय मूल के लोगों ने कनाडा में ये मुक़ाम हासिल किया है. जो असल में काबिल ए तारीफ है.

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 कनाडा में भारतीय मूल के नेता कनाडा में भारतीय मूल के नेता

हुमरा असद

  • टोरंटो,
  • 18 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:02 AM IST

भारत से कनाडा पहुंचे कई परिवारों की कहानी सिर्फ प्रवास तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई परिवारों की अगली पीढ़ी आज वहां की सत्ता और नीति-निर्माण का हिस्सा बन चुकी है. किसी ने बचपन में नए देश में कदम रखा, तो कोई वहीं पैदा हुआ लेकिन सभी ने मेहनत और संघर्ष के दम पर कनाडा की राजनीति में मजबूत पहचान बनाई है. आज ये नेता संसद से लेकर कैबिनेट तक अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं और देश की नीतियों को दिशा दे रहे हैं.

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भारतीय मूल के इन नेताओं की कहानियां अलग-अलग हैं. कुछ भारत में जन्मे और बचपन में कनाडा आ गए, तो कुछ वहीं जन्मे लेकिन उनकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं.

जगमीत सिंह का परिवार भारत के पंजाब से जुड़ा है. वे कनाडा में जन्मे और कानून की पढ़ाई के बाद मानवाधिकार व सामाजिक न्याय के मुद्दों पर सक्रिय हुए. आज वे NDP पार्टी के राष्ट्रीय नेता हैं और कनाडा की राजनीति में एक प्रमुख विपक्षी चेहरा माने जाते हैं.

अनिता आनंद का जन्म नोवा स्कोटिया में हुआ था. उनके माता-पिता भारत से कनाडा आए थे. वे एक कानूनी विशेषज्ञ और प्रोफेसर रह चुकी हैं और बाद में संघीय सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुकी हैं.

हरजीत सज्जन का जन्म भारत के पंजाब में हुआ था और वे बचपन में कनाडा आ गए थे. सैन्य सेवा से लेकर रक्षा मंत्री बनने तक उनका सफर बेहद प्रेरणादायक माना जाता है.

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बार्डिश चागर का जन्म कनाडा में हुआ, जबकि उनका परिवार पंजाब से है. वे लंबे समय तक सांसद और कैबिनेट मंत्री के रूप में सक्रिय रहीं.

कमल खेड़ा का जन्म नई दिल्ली में हुआ था और वे बचपन में कनाडा आ गई थीं. नर्सिंग और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र से राजनीति में आकर उन्होंने सार्वजनिक सेवा में अहम भूमिका निभाई.

टिम उप्पल एडमंटन से सांसद हैं और उनका परिवार भी पंजाब से कनाडा आया था. वे कंज़र्वेटिव पार्टी में प्रमुख भूमिका निभाते हैं.

रूबी सहोता और सोनिया सिद्धू जैसे नेता भी कनाडा की संसद में सक्रिय हैं और समुदाय, स्वास्थ्य व सामाजिक मुद्दों पर काम कर रहे हैं.

सुख धालीवाल लंबे समय से सांसद हैं और इमीग्रेशन व कम्युनिटी डेवलपमेंट जैसे मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है.

मनिंदर सिधू अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेश नीति से जुड़े मामलों पर काम करने वाले युवा नेताओं में शामिल हैं.

प्रवास केवल स्थान बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि अवसर, संघर्ष और सफलता की एक नई शुरुआत भी है. भारतीय मूल के ये नेता आज कनाडा की राजनीति में न केवल प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, बल्कि नीति निर्माण और नेतृत्व में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

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