भारत-US ट्रेड डील में अब आगे क्या? ट्रंप के सहयोगी ने बताई समझौते की बड़ी बातें

US ट्रेड प्रतिनिधि ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की भारत के साथ हुई ट्रेड डील में अमेरिका औद्योगिक सामानों पर भारत के टैक्स को धीरे-धीरे हटाने पर सहमत है, लेकिन भारत अपने कृषि क्षेत्र के कुछ संरक्षण (प्रोटेक्शन) को बनाए रखना चाहता है. इससे कृषि आयात के मामलों में सीमाएं बनी रहेंगी.

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पीएम मोदी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को कूटनीतिक सफलता बताया है. (Photo: ITG) पीएम मोदी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को कूटनीतिक सफलता बताया है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:38 PM IST

भारत और अमेरिका के बीच सोमवार को घोषित की गई अहम ट्रेड डील को अब औपचारिक रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है. अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी जेमिसन ग्रीर ने इस समझौते की प्रमुख शर्तों को सार्वजनिक करते हुए बताया कि यह डील दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में बड़ा बदलाव ला सकती है.

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ग्रीर के मुताबिक, इस समझौते के तहत भारत अमेरिका से आयात होने वाले औद्योगिक सामानों पर लगने वाले टैरिफ को मौजूदा 13.5 प्रतिशत से घटाकर शून्य करने पर सहमत हुआ है. इससे अमेरिकी औद्योगिक उत्पाद भारत में सस्ते होंगे और दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि, भारत ने अपने कृषि क्षेत्र को लेकर सतर्क रुख अपनाया है.

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एक इंटरव्यू में ग्रीर ने कहा कि भारत कृषि आयात के कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में संरक्षण बनाए रखना चाहता है. इसका मतलब यह है कि कृषि से जुड़े सभी उत्पादों पर पूरी तरह से ड्यूटी खत्म नहीं की जाएगी. उन्होंने बताया कि ड्राई फ्रूट्स, वाइन, स्पिरिट्स, फल और सब्जियों जैसे कई उत्पादों पर टैरिफ शून्य किया जाएगा. रॉयटर्स के मुताबिक, चावल, बीफ, सोयाबीन, चीनी और डेयरी जैसे उत्पादों को अभी इस दायरे में नहीं लाया गया है, जो कि हाल के भारत-ईयू ट्रेड डील से अलग है.

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अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत

डील के दूसरे अहम हिस्से में अमेरिका ने भारतीय उत्पादों को राहत देने का फैसला किया है. अमेरिकी पक्ष के अनुसार, भारत से आने वाले अधिकांश औद्योगिक सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा. इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन को कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

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ग्रीर ने यह भी बताया कि इस ट्रेड डील में तकनीकी बाधाओं को दूर करने पर सहमति बनी है. खासतौर पर उन क्षेत्रों में, जहां भारत अब तक अमेरिकी मानकों को स्वीकार नहीं करता था. उन्होंने कहा कि अमेरिकी उत्पाद सुरक्षित हैं और उन्हें भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच दिलाने के लिए मानकों की मान्यता की एक प्रक्रिया तय की जा रही है, हालांकि इसके लिए भारत को अपनी राजनीतिक और नियामक प्रक्रियाओं से गुजरना होगा.

समझौते को दिया जा रहा कागजी रूप

ऊर्जा क्षेत्र को लेकर ग्रीर ने कहा कि भारत रूस से क्रूड ऑयल की खरीद धीरे-धीरे कम कर रहा है और अमेरिका और वेनेज़ुएला से ऊर्जा आयात के विकल्प तलाश रहा है. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस ट्रेड डील के तहत टैरिफ में कटौती कब से लागू होगी, लेकिन इतना जरूर कहा कि समझौते को कागजी रूप देने का काम अंतिम चरण में है.

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