भारत-US ट्रेड डील... 18% टैरिफ पर सहमति, लेकिन रूसी तेल समेत कई सवाल अब भी बरकरार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ एक व्यापार समझैता कर सभी को चौंका दिया. इस ट्रेड डील के तहत भारतीय सामानों पर आयात शुल्क 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है. ट्रंप का दावा है कि भारत अब रूसी तेल नहीं खरीदेगा और 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदेगा. हालांकि, भारत ने अभी केवल नए टैरिफ रेट की पुष्टि की है.

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पीएम मोदी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को कूटनीतिक सफलता बताया. (Photo: ITG) पीएम मोदी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को कूटनीतिक सफलता बताया. (Photo: ITG)

दीपू राय

  • नई दिल्ली,
  • 03 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:57 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत के साथ ट्रेड डील की घोषणा की, जिसमें भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है. जिसमें रूसी तेल खरीद से जुड़ी अतिरिक्त 25% पेनल्टी भी हटा दी गई है. ये फैसला भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन डील के कई महत्वपूर्ण विवरण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं, जिसको लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

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अमेरिका के ऐलान के बाद भारत की ओर से इसकी पुष्टि हुई है कि टैरिफ दर 18% हो गई है, लेकिन रूसी तेल खरीद रोकने, 500 अरब डॉलर की खरीदारी या भारतीय टैरिफ को शून्य करने जैसे अन्य दावों पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है.

'शेयर बाजार में उछाल'

इस समझौते की खबर मिलते ही भारतीय बाजारों में उत्साह दिखाई दिया. शेयर बाजार के साथ-साथ भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी मजबूत हुआ है. निवेशकों और निर्यातकों के बीच इस बात को लेकर राहत है कि अब वे चीन (20%) और वियतनाम (20%) जैसे देशों के मुकाबले अमेरिकी बाजार में बेहतर स्थिति में होंगे. इंडोनेशिया और फिलीपींस (19%) जैसे देशों से भी अब भारत का टैरिफ कम हो गया है जो वैश्विक कारखानों के ऑर्डर हासिल करने में मददगार साबित हो सकता है.

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दाव पर लगा है रूसी तेल?

भले ही टैरिफ कम हो गए हैं, लेकिन इस डील के पीछे की शर्तें काफी पेचीदा नजर आ रही हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि भारत अब रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर देगा और बदले में अमेरिका से बड़े पैमाने पर कृषि उत्पाद और अन्य सामान खरीदेगा.

उन्होंने भारत द्वारा 500 अरब डॉलर की खरीदारी का भी जिक्र किया है. हालांकि, भारत सरकार ने अब तक इन विशिष्ट दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. 

वहीं, रूस की ओर से भी क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा है कि उन्हें नई दिल्ली की तरफ से तेल खरीद बंद करने जैसा कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला है.

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक विवादों की जड़ हमेशा से कृषि और नियमों को लेकर रही है. अमेरिकी वार्ताकार लंबे समय से भारतीय डेयरी और कृषि उत्पादों के बाजार तक पहुंच की मांग कर रहे हैं, जबकि भारत राजनीतिक और आर्थिक कारणों से अपनी खेती को संरक्षित रखता है.

ट्रंप का दावा है कि भारत कुछ वस्तुओं पर टैरिफ शून्य (0%) कर देगा, लेकिन भारत में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों और डेयरी नियमों को लेकर घरेलू राजनीति काफी संवेदनशील है. ऐसे में इन शर्तों को जमीन पर उतारना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा.

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चीन के साथ बढ़ता व्यापार

एक तरफ भारत अमेरिका से टैरिफ राहत मांग रहा है, वहीं दूसरी तरफ डेटा कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है. हाल के महीनों में भारत का चीन को होने वाला निर्यात लगभग 70 प्रतिशत की दर से बढ़ा है. अमेरिका के साथ व्यापारिक विकास के आंकड़े अभी भी अस्थिर हैं. ये भारत के लिए एक बड़ी भू-राजनीतिक चुनौती है, जहां वह प्रतिद्वंद्वी चीन से अपने आर्थिक संबंधों को पूरी तरह खत्म किए बिना पश्चिम के साथ नए समीकरण बनाने की कोशिश कर रहा है.

ट्रंप का नया टैरिफ मैप

डोनाल्ड ट्रंप की नई व्यापार नीति अब देशों के हिसाब से बदल रही है. उन्होंने 193 देशों पर 10% का बेसलाइन टैरिफ लगाया है, लेकिन भारत जैसे देश अब उनके 'डील क्लब' का हिस्सा बन रहे हैं. इसका संदेश साफ है कि अमेरिकी बाजार तक पहुंच अब किसी वैश्विक नियम से नहीं, बल्कि देश-दर-देश होने वाली सौदेबाजी से तय होगी. भारत के लिए ये समझौता निश्चितता तो लाया है, लेकिन इसके बदले में रूसी तेल और कृषि नीति पर होने वाला कोई भी समझौता रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है.

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