यरुशलम में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि गाजा मामले में भारत अपनी भूमिका देख रहा है. उन्होंने कहा कि जमीन पर हालात किस तरह आगे बढ़ते हैं, इसे देखकर ही तय होगा कि भारत क्या और कैसे भूमिका निभाएगा. उन्होंने कहा कि गाजा जैसी परिस्थितियों में भारत के पास ऐसी क्षमताएं और संसाधन हैं जो काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं.
'170 मिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट्स लागू कर रहा भारत'
मिस्री ने बताया कि भारत पहले से ही फिलिस्तीनी समुदायों के लाभ के लिए करीब 170 मिलियन डॉलर के कई प्रोजेक्ट लागू कर रहा है, जबकि लगभग 40 मिलियन डॉलर की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण समेत अन्य क्षेत्र शामिल हैं. उन्होंने कहा कि गाजा पीस इनिशिएटिव आगे बढ़ने की स्थिति में भारत सही समय पर जमीन पर योगदान देने की क्षमता रखता है.
'गाजा पीस इनिशिएटिव से निकलेगा शांति का रास्ता'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल की दो दिवसीय यात्रा पर हैं. गुरुवार को पीएम मोदी ने गाजा मुद्दे पर भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि मानवता कभी भी संघर्ष की शिकार नहीं बननी चाहिए. इजरायल में अपने समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग में पीएम मोदी ने कहा कि गाजा पीस इनिशिएटिव के जरिए शांति का रास्ता तैयार किया जा सकता है.
उन्होंने कहा, 'भारत का रुख साफ है कि मानवता को कभी भी संघर्ष का शिकार नहीं बनना चाहिए. गाजा पीस प्लान के माध्यम से शांति की दिशा में एक रास्ता बनाया गया है और भारत ने इन प्रयासों का पूरा समर्थन किया है. भविष्य में भी हम सभी देशों के साथ संवाद और सहयोग जारी रखेंगे.'
'शांति का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता'
प्रधानमंत्री ने यह संदेश भी दोहराया कि भारत शांति के पक्ष में है और साथ ही 7 अक्टूबर को इजरायल में हमास की ओर से किए गए नरसंहार की निंदा करता है. बुधवार को इजरायल की संसद कनेस्सेट में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि शांति का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन भारत संवाद, शांति और स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर प्रयासों का समर्थन करता है.
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