मिडिल-ईस्ट संकट के बीच IEA, IMF और वर्ल्ड बैंक की मीटिंग, जंग के आर्थिक असर पर चर्चा

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के ग्लोबल एनर्जी और आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक समूह के प्रमुखों ने वॉशिंगटन में बैठक की है.

Advertisement
मिडिल-ईस्ट जंग को लेकर वैश्विक संगठन चिंतित (File Photo: Reuters) मिडिल-ईस्ट जंग को लेकर वैश्विक संगठन चिंतित (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:56 AM IST

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और वर्ल्ड बैंक समूह के प्रमुखों ने वॉशिंगटन डीसी में मुलाकात करके मिडिल ईस्ट युद्ध के आर्थिक और ऊर्जा प्रभावों पर चर्चा की है. यह मीटिंग अप्रैल की शुरुआत में गठित समन्वय समूह की रणनीति के तहत आयोजित की गई थी. इस युद्ध से कम इनकम वाले ऊर्जा आयातक देश सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. तेल, गैस और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों ने खाद्य सुरक्षा और नौकरियों के नुकसान की चिंता बढ़ा दी है. 

Advertisement

इसके अलावा, मिडिल ईस्ट के कुछ तेल और गैस उत्पादकों को भी निर्यात राजस्व में भारी नुकसान उठाना पड़ा है. 

होर्मुज स्ट्रेट के जरिए शिपिंग अभी सामान्य होना बाकी है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हो रही है. प्रमुख वस्तुओं की आपूर्ति को पहले वाली स्थिति में लौटने में लंबा वक्त लग सकता है.

होर्मुज स्ट्रेट और आपूर्ति की बाधाएं

नेताओं ने चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग फिर से शुरू होने के बाद भी बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण ईंधन और उर्वरक की कीमतें लंबे वक्त तक ऊंची रह सकती हैं. आपूर्ति में आई रुकावट की वजह से एनर्जी, फूड और अन्य उद्योगों के लिए अहम इनपुट की कमी होने की आशंका है. जंग ने लोगों को विस्थापित करने के साथ-साथ नौकरियों, यात्रा और पर्यटन क्षेत्र को भी बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसे ठीक होने में वक्त लगेगा.

Advertisement

यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट से लेकर यूके तक फैला ‘आशा’ ब्रांड, कैसे खड़ा किया करोड़ों का फूड एम्पायर?

मंगलवार, 14 अप्रैल को आईईए की मासिक तेल बाजार रिपोर्ट और आईएमएफ के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक जारी होने वाले हैं. इससे पहले हुई मीटिंग में संस्थानों ने अपने नवीनतम आकलन साझा किए हैं. आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक उन देशों को वित्तीय सहायता और नीतिगत सलाह देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं, जो इस झटके से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. वे सदस्य देशों की मदद के लिए अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ भी समन्वय कर रहे हैं.

तीनों संस्थानों ने एनर्जी मार्केट्स और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर जंग के प्रभाव की बारीकी से निगरानी जारी रखने का संकल्प लिया है. इनका टार्गेट एक लचीली रिकवरी की नींव रखना है, जो स्थिरता, विकास और नौकरियां प्रदान कर सके. इसके लिए देशों की विशेषज्ञता और संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे इस स्थिति में सदस्य देशों को संकट से बाहर निकाला जा सके.

---- समाप्त ----
(इनपुट- करिश्मा असूदानी)

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement