मध्य पूर्व में हफ्तों से जारी भीषण युद्ध पर विराम लगने के बाद अब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. ईरान ने ऐलान किया है कि अगले दो हफ्तों के लिए होर्मुज स्ट्रेट के जरिए समुद्री आवाजाही शुरू की जाएगी. यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक सीजफायर का ऐलान कर दुनिया को चौंका दिया. इस बीच बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान अब भी स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलेगा?
यह वही ट्रंप हैं जिन्होंने कुछ घंटे पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने स्ट्रेट को नहीं खोला, तो "पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है" लेकिन डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले अचानक दोनों पक्षों के बीच बातचीत की राह खुली और दो हफ्तों का युद्धविराम तय हो गया.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर कहा कि "दो हफ्तों की अवधि के लिए, तकनीकी समन्वय के साथ होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही संभव होगी." हालांकि, उन्होंने अपने बयान में स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए टोल वसूले जाने को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. यह बयान इस बात का संकेत है कि ईरान फिलहाल तनाव कम करने के मूड में है, लेकिन पूरी तरह पीछे हटने को तैयार नहीं है.
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यह युद्ध अब अपने छठे हफ्ते में पहुंच चुका था और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ा. इस दौरान करीब 5000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या आम नागरिकों की है. सिर्फ ईरान में ही 1600 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं. जंग खत्म करने के लिए ईरान ने जो 10 सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है उसमें ईरान का कहना है कि स्ट्रेट पर टोल वसूला जाएगा और उससे जंग से हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी.
होर्मुज पर पाबंदी से बढ़ी थी तेल की कीमतें
होर्मुज स्ट्रेट इस पूरे संघर्ष का केंद्र बना हुआ है. दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से गुजरता है. इसके बंद होने से न सिर्फ तेल की कीमतों में उछाल आया, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी मंदी का खतरा मंडराने लगा. तेल-गैस की सप्लाई रुकने से दुनियाभर में कीमतें बढ़ने लगी थी. ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यह "डबल-साइडेड सीजफायर" है, यानी दोनों पक्षों को अपनी सैन्य गतिविधियां रोकनी होंगी. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और अब एक लॉन्ग टर्म शांति समझौते के बेहद करीब है.
इस सीजफायर के पीछे पाकिस्तान की अहम भूमिका सामने आई है. ट्रंप ने खुद कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर के साथ बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया. इसके बाद इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू होने वाली है.
जंग रुकने के बाद भी खतरा अभी टला नहीं!
हालांकि, इस राहत के बीच भी खतरे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. ट्रंप के ऐलान के कुछ ही मिनटों बाद इजरायल ने दावा किया कि ईरान ने उसकी ओर मिसाइलें दागी हैं. इजरायली सेना ने कहा कि उसके डिफेंस सिस्टम इन हमलों को रोकने में लगे हैं और लोगों को बंकर में जाने की सलाह दी गई है.
ईरान ने भी साफ किया है कि बातचीत का मतलब जंग का अंत नहीं है. उसकी शर्तें अभी भी सख्त हैं, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट पर उसका नियंत्रण, यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम जारी रखने की इजाजत और सभी प्रतिबंधों को हटाना शामिल है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सीजफायर एक "टाइम-बाइंग मूव" हो सकता है. यानी दोनों पक्षों को इससे समय मिलेगा ताकि या तो बेहतर शर्तों पर समझौता कर सकें या फिर अगली रणनीति तैयार कर सकें.
खाड़ी मुल्कों में मिसाइल हमले
इस बीच, खाड़ी देशों में भी तनाव बना हुआ है. हाल ही में कतर, सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात में हाई अलर्ट जारी किया गया था. इससे साफ है कि क्षेत्रीय स्तर पर खतरा अभी भी बना हुआ है.
ट्रंप के लिए यह फैसला राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है. अमेरिका में मिडटर्म चुनाव नजदीक हैं और इस युद्ध के चलते उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई है. बढ़ती तेल कीमतों और महंगाई से भी आम लोगों की नाराजगी बढ़ रही थी.
अब पूरी दुनिया की नजरें इन दो हफ्तों पर टिकी हैं. क्या इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत कोई स्थायी समाधान निकाल पाएगी, या फिर यह सीजफायर सिर्फ एक और अस्थायी विराम साबित होगा?
फिलहाल इतना तय है कि जंग भले ही धीमी पड़ी हो, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है. होर्मुज स्ट्रेट पर फिर से शुरू होने वाली आवाजाही राहत जरूर दे सकती है, लेकिन इस संघर्ष का अंत अभी दूर नजर आ रहा है.
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