अमेरिका-ईरान समझौते के बाद अब होर्मुज स्ट्रेट से नया अपडेट सामने आया है. ईरान की Mehr न्यूज एजेंसी के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट के पास केशम द्वीप के दक्षिण में तीन धमाकों की आवाज सुनी गई. एजेंसी ने आगे कहा कि शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि ये धमाके शायद होर्मुज स्ट्रेट में ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए किए गए थे.
होर्मुज समुद्री रास्ते से हर दिन दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और LNG शिपमेंट गुजरता है. सूजा और मासेन इलाकों के पास रहने वाले लोगों ने ये धमाके सुने.
ये धमाके उस सिलसिले का हिस्सा हैं, जो मई और जून 2026 की शुरुआत के बीच बन रहा था. स्थानीय लोगों की रिपोर्टों में होर्मोज़गन प्रांत और उसके आस-पास के इलाकों में जोरदार धमाकों की कई घटनाओं का ज़िक्र है.
होर्मुज क्रॉस करने के लिए लाइन में भारतीय जहाज
सोमवार को भारत जाने वाले एलएनजी वाहक दिशा द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रूप से पार करने के बाद चौंतीस भारतीय और विदेशी ध्वज वाले जहाज सुरक्षित मार्ग के लिए तैयार हैं. इस विकास से उम्मीद जगी है कि फारस की खाड़ी में फंसे जहाज अब भारतीय बंदरगाहों तक जा सकेंगे. यह कदम हाल ही में हुए सीजफायर के बाद शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने की योजना के बारे में अमेरिका और ईरान की घोषणाओं के बाद उठाया गया है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन जहाजों के चलने की उम्मीद है, उनमें 16 उर्वरक ले जाने वाले जहाज हैं, जो इस प्रमुख मिट्टी के पोषक तत्व की आपूर्ति बढ़ाने में मदद करेंगे.
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मिडिल-ईस्ट संघर्ष से पहले, भारत अपने कच्चे तेल का 88 फीसदी से ज्यादा आयात करता था, जिसमें से करीब आधा पश्चिम एशिया से आता था. इसका 60 फीसदी से ज्यादा आयातित एलएनजी और करीब 60 फीसदी एलपीजी भी होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है, करीब 90 प्रतिशत एलपीजी आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है. फंसे हुए गैर-उर्वरक जहाजों में से 15 कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी ले जाते हैं, जबकि तीन अन्य माल ले जाते हैं.
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