बांग्लादेश: छात्र नेता से सांसद बने हसनत, शपथ में पहनी जर्सी के हर तरफ चर्चे

बांग्लादेश में चुनाव के बाद नई सरकार का गठन हो गया है और बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है. जुलाई विद्रोह के प्रमुख नेता हसनत अब्दुल्ला ने कुमिला-4 सीट से जीतकर सांसद के रूप में शपथ ली.

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हसनत अब्दुल्ला ने संसद के सदस्य के रूप में शपथ ली. (Photo: Screengrab) हसनत अब्दुल्ला ने संसद के सदस्य के रूप में शपथ ली. (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:40 PM IST

बांग्लादेश में चुनाव के बाद नई सरकार का गठन हो गया है. बीएनपी चीफ तारिक रहमान ने मुल्क के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है. इसके साथ ही, जुलाई विद्रोह के एक जाने-माने लीडर हसनत अब्दुल्ला ने आज संसद सदस्य के तौर पर शपथ ली. इस दौरान हसनत उसी जर्सी में आए, जो उन्होंने जुलाई विद्रोह के दौरान पहनी थी.

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हसनत, अब नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के चीफ ऑर्गनाइज़र (साउथ) हैं. वे 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनाव में कुमिला-4 (देबिद्वार) सीट से चुने गए थे. उन्होंने इस सीट के सभी पोलिंग सेंटर जीती थी.

नए चुने गए सांसदों के लिए शपथ ग्रहण समारोह आज दोपहर जातीय संसद भवन में हुआ, जिसे चीफ इलेक्शन कमिश्नर AMM नासिर उद्दीन ने संभाला. हसनत ने NCP के पांच और चुने गए सांसदों के साथ शपथ ली. पार्टी के नेता कॉन्स्टिट्यूशनल रिफॉर्म काउंसिल के सदस्य भी बने.

कौन बना विपक्ष का नेता?

देश रूपंतोर की रिपोर्ट के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी के चीफ शफीकुर रहमान को 13वीं बांग्लादेश पार्लियामेंट में विपक्ष का नेता चुना गया है, जबकि नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP) की कन्वीनर नाहिद इस्लाम विपक्ष की चीफ व्हिप होंगी.

यह भी पढ़ें: दशकों बाद बांग्लादेश को मिलेगा पुरुष PM! तारिक रहमान की नई कैबिनेट कैसी होगी?

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बीएनपी गठबंधन को 212 सीटें...

प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाए जाने के बाद हुए पहले चुनाव में, तारिक रहमान के नेतृत्व वाले BNP गठबंधन ने 12 फरवरी को हुए 299 सीटों के चुनाव में से 212 सीटें जीतीं. बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के अलावा, तारिक रहमान को मुहम्मद यूनुस के अंतरिम प्रशासन द्वारा तैयार किए गए जुलाई चार्टर में बताए गए राजनीतिक सुधारों पर भी कड़ा फैसला लेना होगा.

जुलाई चार्टर, जिसे राष्ट्रीय चुनाव के साथ हुए एक रेफरेंडम में मंजूरी दी गई थी, आने वाली सरकार को बांग्लादेश के संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं में बदलाव लाने का अधिकार देता है.

क्या है जुलाई चार्टर?
आंदोलनकारियों और बांग्लादेश के कई राजनीतिक दलों ने मिलकर शासन व्यवस्था और कई नियम कानूनों में बदलाव सहित नए सिरे से संविधान के कई प्रावधानों को भी बदलने की मांग रखी. इसके लिए 28 पेज का एक मसौदा तैयार किया गया, जिसे 'जुलाई चार्टर' कहा गया. इस 'जुलाई चार्टर' पर अंतरिम सरकार और सभी राजनीतिक दलों ने हस्ताक्षर किया है. इसमें जो मूल बदलाव की मांग की गई है, उसके तरह ऐसे कानून बनाने के प्रस्ताव दिए गए हैं, जिससे भविष्य में तानाशाही को रोका जा सके. साथ ही एक सही मायने में रिपब्लिक स्टेट बनाया जा सके.

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