दक्षिणी लेबनान का नाबातिह शहर इस वक्त बारूद की गंध और मलबे के ढेर में दबा हुआ है. पिछले 12 घंटों के दौरान इजरायली वायुसेना (IDF) ने यहां एक के बाद एक 6 भीषण हवाई हमले किए हैं. आजतक की टीम जब इस युद्ध क्षेत्र के जमीनी हालात का जायजा लेने पहुंची, तो मंजर बेहद खौफनाक था. महज 15 दिनों के भीतर इस शहर की शक्ल और सीरत पूरी तरह बदल चुकी है.
इजरायल अब सिर्फ हिजबुल्लाह के लड़ाकों को ही नहीं ढूंढ रहा, बल्कि उसकी पूरी कोशिश है कि उनकी रसद और रफ्तार को ही रोक दिया जाए. नाबातिह के बीच बाजार में बना 'अल-अमाना' गैस स्टेशन इसका सबसे बड़ा सबूत है. रिहायशी इमारतों के बीच होने के बावजूद इजरायली विमानों ने इसे चुनकर निशाना बनाया. हमला इतना भीषण था कि तेल और गैस के टैंकों में धमाका हो गया और देखते ही देखते पूरा पेट्रोल पंप मलबे का ढेर बन गया.
इजरायल की नो फ्यूल स्ट्रैटेजी?
ग्राउंड से मिली जानकारी के मुताबिक, इजरायल एक सोची-समझी रणनीति के तहत काम कर रहा है. नाबातिह ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिणी लेबनान में अब तक करीब 15 गैस और ऑयल स्टेशंस को बम बरसाकर नेस्तनाबूद कर दिया गया है. इजरायल की कोशिश एकदम साफ है. वह चाहता है कि हिजबुल्लाह के लड़ाकों की हर तरह की आवाजाही पूरी तरह रुक जाए. तेल और गैस की सप्लाई काटकर वह उनके लॉजिस्टिक सिस्टम की कमर तोड़ना चाहता है.
तबाही का आलम यह है कि जहां कभी गाड़ियों की कतारें लगती थीं, वहां अब सिर्फ लोहे के जले हुए टुकड़े और गहरा गड्ढा नजर आता है. हर दिन यहां 2 से 3 हवाई हमले हो रहे हैं, जिससे आम लोगों का जीना मुहाल हो गया है. इजरायली सेना की कोशिश है कि दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के पास सिर छिपाने या आगे बढ़ने का कोई भी जरिया न बचे.
अशरफ वानी