ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच बढ़ता टकराव अब कूटनीतिक मर्यादाओं से बाहर जाता दिख रहा है. इसी विवाद के बीच डेनमार्क के यूरोपीय सांसद एंडर्स विस्टीसेन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर ऐसा बयान दे दिया, जिसने यूरोपीय संसद से लेकर वैश्विक मंच तक हलचल मचा दी.
मंगलवार को संसद में बोलते हुए विस्टीसेन ने ट्रंप की ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने की योजना का कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा, "मैं इसे ऐसे शब्दों में कहूंगा, जो आप समझ सकें. Mr President… f*** off." उनके इस बयान पर संसद की अध्यक्षता कर रहे चेयर ने तुरंत हस्तक्षेप किया और कहा कि यह भाषा संसदीय नियमों के खिलाफ है.
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यह बयान ऐसे समय आया है, जब ग्रीनलैंड विवाद को शांत करने के लिए ट्रंप के एक सहयोगी ने ब्रिटेन के सांसदों से मुलाकात की बात कही थी. बताया गया कि वह लंदन जाकर 'मामले को शांत' करने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन इसके उलट ट्रंप की ओर से टैरिफ की धमकियों ने यूरोपीय देशों की नाराजगी और बढ़ा दी.
डेनमार्क समेत यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ
शनिवार को ट्रंप ने ऐलान किया था कि अगर ग्रीनलैंड को लेकर कोई समझौता नहीं होता, तो अमेरिका 1 फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड जैसे सहयोगी देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाएगा. साथ ही चेतावनी दी गई कि जरूरत पड़ी तो यह टैरिफ 25 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है.
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ट्रंप की इस धमकी को 'पुराने सहयोगियों के बीच एक बड़ी गलती' बताया. दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच जुलाई में व्यापार समझौता हुआ था और राजनीति में भी सौदे का मतलब होता है.
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ट्रंप किसी भी हाल में ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं
ट्रंप लगातार दावा करते रहे हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है. उन्होंने कहा है कि यह चीन और रूस से संभावित खतरे रोकने के लिए अहम है और 'गोल्डन डोम' मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए भी जरूरी है. लेकिन यूरोपीय देशों का कहना है कि यह विवाद सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि प्रभुत्व की राजनीति को दर्शाता है.
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