मिडिल ईस्ट जंग के बीच एक हमले के दौरान फ्रांस के एक सैनिक की मौत का मामला सामने आया है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट में बताया, "उत्तरी इराक़ के कुर्दिश इलाके में स्थित इरबिल को निशाना बनाकर किए गए एक हमले में एक फ़्रांसीसी सैनिक की मौत हो गई."
मैक्रों ने उस सैनिक की पहचान वारसेस की 7वीं बटालियन ऑफ़ चेसर्स एल्पिन्स के चीफ़ वारंट ऑफ़िसर अर्नाड फ़्रियन के तौर पर की है. उन्होंने यह भी बताया कि इस हमले में कई सैनिक घायल भी हुए हैं. हालांकि, मैक्रों ने इस बात का जिक्र नहीं किया कि इस हमले के पीछे किसका हाथ था.
पिछले महीने ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों के बाद से, जब पश्चिम एशिया युद्ध की चपेट में आ गया था, तब से ईरान समर्थक गुटों से जुड़े कई हमलों ने उस क्षेत्र को निशाना बनाया है, जहां एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के हिस्से के रूप में विदेशी सेनाएं तैनात हैं.
'हमले को सही नहीं ठहराया जा सकता...'
सैनिक की मौत के बाद किए गए सोशल मीडिया पोस्ट में मैक्रॉन ने कहा, "उनके परिवार और उनके साथी सैनिकों के प्रति मैं पूरे देश की ओर से अपना स्नेह और एकजुटता व्यक्त करना चाहता हूं. फ़्रांस घायल सैनिकों और उनके प्रियजनों के साथ खड़ा है."
उन्होंने कहा, "2015 से दाएश के ख़िलाफ़ लड़ाई में जुटे हमारे बलों पर किया गया यह हमला अस्वीकार्य है. इराक़ में उनकी मौजूदगी आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के सख़्त दायरे का हिस्सा है. ईरान में चल रहा युद्ध ऐसे हमलों को सही नहीं ठहरा सकता."
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सेना ने जारी किया था बयान
फ्रांसीसी सेना ने पहले कहा था कि ड्रोन ने एक बेस पर हमला किया था, जहां सैनिक अपने इराकी साथियों के साथ आतंकवाद-रोधी ट्रेनिंग में हिस्सा ले रहे थे, एरबिल के गवर्नर ने कहा कि इस हमले में दो ड्रोन शामिल थे और उन्होंने क्षेत्रीय राजधानी से करीब 40 किलोमीटर (25 मील) दूर, माला कारा में स्थित एक बेस को निशाना बनाया.
फ्रांसीसी सेना ने गुरुवार (12 मार्च) को बताया था कि इस हमले में छह लोग घायल हुए हैं. यह स्पष्ट नहीं था कि जिस सैनिक की मौत हुई, वह भी इन घायलों में शामिल था या नहीं.
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