अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ फोन बातचीत की है, जिसमें उन्होंने ईरान की स्थिति पर चर्चा की. ये बातचीत ऐसे वक्त में हुई है जब ट्रंप प्रशासन बीजिंग समेत अन्य देशों पर ईरान को अलग-थलग करने के लिए दबाव डाल रहा है.
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा कि उन्होंने और राष्ट्रपति शी ने अमेरिका-चीन संबंधों के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें व्यापार और ताइवान शामिल है. साथ ही अप्रैल में उनकी बीजिंग यात्रा की योजना पर भी बात हुई.
ईरान पर घेराबंदी
ट्रंप ने लिखा, 'चीन के साथ संबंध और राष्ट्रपति शी के साथ मेरी व्यक्तिगत दोस्ती बहुत अच्छी है. हम दोनों समझते हैं कि इसे इसी तरह बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है.'
चीनी सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने आगामी वर्षों में दोनों देशों द्वारा आयोजित होने वाले प्रमुख शिखर सम्मेलनों और नेताओं की मुलाकात के अवसरों पर चर्चा की. हालांकि, चीनी बयान में ट्रंप की अप्रैल में प्रस्तावित बीजिंग यात्रा का कोई जिक्र नहीं किया गया.
'ताइवान है हमारा हिस्सा'
चीन ने ये भी स्पष्ट कर दिया कि ताइवान के साथ पुनर्मिलन की अपनी दीर्घकालिक योजनाओं से पीछे हटने का उसका कोई इरादा नहीं है. ताइवान एक स्वशासित, लोकतांत्रिक द्वीप है जो मुख्य भूमि चीन से स्वतंत्र रूप से काम करता है. हालांकि, बीजिंग इसे अपना क्षेत्र होने का दावा करता है.
चीनी सरकार के बयान में कहा गया है, 'ताइवान को कभी-भी चीन से अलग होने की अनुमति नहीं दी जाएगी.'
ट्रंप और शी के बीच ईरान पर चर्चा ऐसे वक्त में हुई है, जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव चरम पर है. पिछले महीने देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर मध्य पूर्व के देश द्वारा की गई कार्रवाई के बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव बना हुआ है.
ट्रंप प्रशासन अब ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम पर रियायतें देने के लिए दबाव डाल रहा है. ट्रंप प्रशासन का दावा है कि जून में इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़े 12 दिनों के युद्ध के दौरान तीन ईरानी परमाणु स्थलों पर अमेरिकी बमबारी से ईरान का परमाणु कार्यक्रम पहले ही प्रभावित हो चुका है.
इस हफ्ते होगी ईरान से वार्ता
वहीं, व्हाइट हाउस का कहना है कि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ इस हफ्ते के अंत में ईरानी अधिकारियों के साथ वार्ता में भाग लेने वाले हैं. जबकि ट्रंप ने पिछले महीने घोषणा की थी कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करते हैं, उनसे अमेरिका में आयात पर 25 प्रतिशत कर लगाया जाएगा.
विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, सालों से लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने 2024 में लगभग 125 अरब डॉलर का अंतरराष्ट्रीय व्यापार किया, जिसमें चीन के साथ 32 अरब डॉलर, संयुक्त अरब अमीरात के साथ 28 अरब डॉलर और तुर्किए के साथ 17 अरब डॉलर का व्यापार शामिल है.
परमाणु हथियार पर समझौता
इसके अलावा शी जिनपिंग ने बुधवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बात की. ये कूटनीतिक हलचल तब हो रही है जब रूस और अमेरिका के बीच अंतिम परमाणु हथियार समझौता 'न्यू स्टार्ट' (New START) गुरुवार को समाप्त होने वाला है. ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे परमाणु हथियारों पर सीमा जारी रखना चाहते हैं, लेकिन इसमें चीन को भी शामिल करना चाहते हैं.
ट्रंप का मानना है कि किसी भी नए समझौते या विस्तार में चीन की भागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए. उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया था, 'मुझे लगता है कि अगर हम ऐसा करने जा रहे हैं तो चीन को भी इस समझौते का हिस्सा होना चाहिए.'
उधर, शी जिनपिंग ने हाल ही में पश्चिमी नेताओं के साथ कई बैठकें की हैं, जिन्होंने ट्रंप की टैरिफ नीतियों और अमेरिका द्वारा डेनमार्क के क्षेत्र ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की मांगों के बारे में बढ़ती चिंताओं के बीच चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की है.
ट्रम्प के शासनकाल में वैश्विक व्यापार में आई बाधाओं ने कई अमेरिकी आर्थिक साझेदारों के लिए व्यापार और निवेश का विस्तार करना और भी जरूरी बना दिया है. यूरोपीय संघ और भारत द्वारा मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा के दो दिन बाद, पिछले महीने वियतनाम और यूरोपीय संघ ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक मजबूत किया है.
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