अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका एक ऐसा देश है जो मजहब की बुनियाद पर बना और टिका है और मुझे इसका गर्व है. ट्रंप ने कई बार कहा कि अमेरिका एक 'क्रिश्चयन नेशन' की बुनियाद पर बना है. उन्होंने 2025 में कहा था कि हम देश से ईसाइयत के सिद्धांतों को हटाने की कोशिशों को सफल नहीं होने देंगे.
अब अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर से कहा है कि हमारा देश धर्म पर आधारित है और मुझे इस बात पर बहुत गर्व है. धर्म एक अच्छी चीज है. ईसाई धर्म... यह हमारे देश के लिए एक बहुत ही बेहतरीन चीज है.
अमेरिका ट्रंप की क्रिश्चयन पहचान पर लगातार जोर देते रहे हैं. ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि अमेरिका की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ें ईसाइयत में हैं. वे परंपरागत क्रिश्चयन मतदाताओं को यह संदेश देते हैं कि उनकी राजनीति अमेरिकन मूल्यों की रक्षा करेगी.
अमेरिका में गर्भपात, LGBT नीतियों, स्कूलों में प्रार्थना और सार्वजनिक जीवन में धर्म जैसे मुद्दों पर परंपरावादियों और लिबरल खेमों के बीच तीखी लड़ाई चल रही है. ट्रंप का यह बयान इसी 'सांस्कृतिक वॉर' का हिस्सा माना जा रहा है, जहां वे खुद को क्रिश्चयन कंजरवेटिव के सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिनिधि के रूप में पेश करते हैं.
'दुनिया को तबाह नहीं होने दूंगा'
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान वॉर पर एक बार फिर से बयान दिया है. ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के साथ चल रहे टकराव का बचाव करते हुए दावा किया कि विरोधियों की आलोचना के बावजूद अब तक की सैन्य कार्रवाई 'बहुत लोकप्रिय' रही है.
ईरान पर निर्धारित हवाई हमले को टालने के एक दिन बाद व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने ये टिप्पणियां कीं.
उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दे सकता और दावा किया कि ईरान का "बेहद कट्टरपंथी" नेतृत्व इसका इस्तेमाल करेगा.
ट्रंप ने कहा, "चाहे यह लोकप्रिय हो या न हो, मुझे यह करना ही होगा, क्योंकि मैं अपनी निगरानी में दुनिया को तबाह नहीं होने दूंगा. ऐसा हरगिज नहीं होगा."
जल्द ही एक और स्ट्राइक?
उन्होंने यह भी कहा कि US ईरान पर एक और स्ट्राइक कर सकता है. ट्रंप ने कहा कि वह स्ट्राइक टालने से पहले उस पर फैसला करने से बस एक घंटा दूर थे.
ट्रंप ने रिपोर्टर्स से कहा, "मैं बस आगे बढ़ने का फैसला करने से एक घंटा दूर था."
ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि उन्होंने मिलिट्री को ईरान पर हमला रोकने का निर्देश दिया था जो पहले मंगलवार को होना था. इसकी वजह बताते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके फैसला लेने से पहले तेहरान ने कथित तौर पर US को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा था.
ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं ने उनसे आग्रह किया था कि एक डील की उम्मीद है तो वे हमला न करें.
हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान के साथ कोई डील नहीं हो पाती है, तो अमेरिकी सेना को "पूरी तरह से बड़े पैमाने पर हमला करने के लिए तैयार रहना चाहिए."
उन्होंने आगे कहा कि ईरान का नेतृत्व बेसब्री से एक डील की तलाश में है और संकेत दिया कि अगर बातचीत नाकाम रहती है तो आने वाले दिनों में अमेरिका की ओर से एक नया हमला हो सकता है.
उन्होंने कहा, "देखिए, मेरा मतलब है, मैं दो या तीन दिनों की बात कर रहा हूं, शायद शुक्रवार, शनिवार, रविवार, या कुछ ऐसा ही; शायद अगले हफ़्ते की शुरुआत में. एक सीमित समय के लिए, क्योंकि हम उन्हें कोई नया परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते."
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर 28 फरवरी 2026 को हमला किया था. लंबी लड़ाई के बाद 8 अप्रैल 2026 को तीनों पक्षों के बीच सीजफायर पर सहमति बनी है.
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