'सीक्रेट डॉक्यूमेंट लीक ना हो...', कर्मचारियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की तैयारी में ट्रंप प्रशासन

अमेरिकी गृह मंत्रालय ने कर्मचारियों को चेताते हुए कहा है कि सरकारी गोपनीय दस्तावेजों को लीक होने से बचाने के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट की मदद ली जाएगी.

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ट्रंप प्रशासन लेगा लाई डिटेक्टर टेस्ट का सहारा (फोटो: AI) ट्रंप प्रशासन लेगा लाई डिटेक्टर टेस्ट का सहारा (फोटो: AI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:57 AM IST

अमेरिका की ट्रंप सरकार शुरुआत से ही हाइपर एक्टिव मोड में है. अवैध प्रवासियों से लेकर ड्रग तस्करी और टैरिफ के मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन काफी सख्त है. इस बीच खबर है कि गोपनीय फाइलों को लीक होने से बचाने के लिए सरकार पॉलीग्राफ टेस्ट का सहारा लेने जा रही है.

अमेरिकी गृह मंत्रालय ने कर्मचारियों को चेताते हुए कहा है कि सरकारी गोपनीय दस्तावेजों को लीक होने से बचाने के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट की मदद ली जाएगी.

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गृहमंत्री क्रिस्टी नोएम ने कहा कि कर्मचारियों को हर कीमत पर इस टेस्ट से गुजरना पड़ेगा. गृह मंत्रालय की असिस्टेंट सेक्रेटरी ट्रिसिया मैकलॉफलिन ने इसकी पुष्टि की है.

उन्होंने कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एजेंसी है. हम सभी कर्मचारियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कर सकते हैं, करना चाहिए और करेंगे.

क्या होता है पॉलीग्राफ टेस्ट?

पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान यह देखा जाता है कि सवालों के जवाब देते समय क्या इंसान झूठ बोल रहा है या सच. इंसान जब भी झूठ बोलता है, तब उसका हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, बदलता है. पसीना आता है. कई बार पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान हाथ-पैर के मूवमेंट पर भी ध्यान दिया जाता है. हालांकि पॉलीग्राफ मशीन पर टेस्ट के दौरान आमतौर पर चार चीजें देखी जाती हैं.

सांस लेने की दर (Breathing Rate).

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नाड़ी की गति (Pulse Rate).

ब्लड प्रेशर (Blood Pressure).

पसीना कितना निकल रहा (Perspiration).

कैसे काम करता है पॉलीग्राफ टेस्ट?

पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान मशीन के चार या छह प्वाइंट्स को इंसान के सीने, उंगलियों से जोड़ दिया जाता है. फिर उससे पहले कुछ सामान्य सवाल पूछे जाते हैं. इसके बाद उससे अपराध से संबंधित सवाल पूछे जाते हैं. इस दौरान मशीन के स्क्रीन पर इंसान की हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, नाड़ी आदि पर नजर रखी जाती है. टेस्ट से पहले भी इंसान का मेडिकल टेस्ट किया जाता है. तब उसके सामान्य हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, नाड़ी दर आदि को नोट कर लिया जाता है.

जब टेस्ट शुरू होता है, सवाल पूछे जाने लगते हैं. तब जवाब देने वाला अगर झूठ बोलता है, उस समय उसका हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, नाड़ी दर घटता या बढ़ता है. माथे पर या हथेलियों पर पसीना आने लगता है. इससे पता चलता है कि इंसान झूठ बोल रहा है. हर सवाल के समय इन सिग्नलों को रिकॉर्ड किया जाता है. अगर इंसान सच बोल रहा होता है, तब उसकी ये सभी शारीरिक गतिविधियां सामान्य रहती हैं. जो इंसान किसी सवाल का झूठा जवाब देता है, तब उसके दिमाग से एक P300 (P3) सिग्नल निकलता है. ऐसे में उसका हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. इन्हें सामान्य दरों से मिलाया जाता है. तुरंत पता चल जाता है कि ये जवाब सच है या झूठ.

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