मिडिल ईस्ट में जारी रहेगी जंग! सीजफायर पर चर्चा से ईरान और अमेरिका का साफ इनकार

अमेरिका और इजरायल के हमलों से शुरू हुए ईरान युद्ध को रोकने के लिए मध्य पूर्वी देशों की मध्यस्थता को डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ठुकरा दिया. ईरान ने भी साफ कहा कि जब तक हमले बंद नहीं होते, वह युद्धविराम नहीं मानेगा. खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल कीमतें बढ़ गई हैं. अब तक दो हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. ओमान और मिस्र की बातचीत कोशिशें नाकाम रहीं. तनाव बढ़ा.

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डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की पेशकश ठुकरा दी है. (Photo: Reuters) डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की पेशकश ठुकरा दी है. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:14 AM IST

डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए मध्य पूर्व के सहयोगी देशों की ओर से शुरू की गई कूटनीतिक बातचीत की कोशिशों को ठुकरा दिया है. न्यूज एजेंसी रायटर्स के अनुसार ये प्रयास उस युद्ध को रोकने के लिए किए जा रहे थे, जो दो सप्ताह पहले अमेरिका और इजरायल के बड़े हवाई हमलों के साथ शुरू हुआ था.

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ईरान भी युद्धविराम के लिए तैयार नहीं
दूसरी ओर ईरान ने भी साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले बंद नहीं होते, तब तक वह किसी भी युद्धविराम के लिए तैयार नहीं है. दो वरिष्ठ ईरानी सूत्रों ने बताया कि कई देश इस संघर्ष को खत्म कराने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं.

दोनों पक्ष लंबे संघर्ष की तैयारी में
वॉशिंगटन और तेहरान दोनों की ओर से बातचीत में दिलचस्पी न दिखने से संकेत मिल रहे हैं कि यह युद्ध लंबा खिंच सकता है. इस बीच संघर्ष में आम लोगों की मौतें बढ़ रही हैं और ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं.

खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमले से बढ़ा दबाव
शुक्रवार रात अमेरिका ने ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर हवाई हमले किए. इससे यह साफ संकेत मिला कि ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने के पक्ष में है.

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नए सर्वोच्च नेता की कड़ी चेतावनी
ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ने को बंद रखने की कसम खाई है और पड़ोसी देशों पर हमले तेज करने की धमकी भी दी है.

युद्ध में 2000 से ज्यादा लोगों की मौत
इस युद्ध में अब तक 2000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकांश ईरान के नागरिक बताए जा रहे हैं. इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया है. दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ रहा है.

ओमान और मिस्र ने शुरू की मध्यस्थता की कोशिश
युद्ध से पहले बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला ओमान कई बार दोनों देशों के बीच संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर चुका है. दो सूत्रों के अनुसार व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया कि फिलहाल वह बातचीत में रुचि नहीं रखता.

इस बीच Egypt ने भी दोनों पक्षों के बीच संवाद शुरू कराने की कोशिश की, लेकिन अब तक इसमें कोई खास प्रगति नहीं हुई है. हालांकि इन प्रयासों से पड़ोसी देशों पर हमलों में कुछ सैन्य संयम जरूर देखने को मिला है.

व्हाइट हाउस ने भी बातचीत से इनकार किया
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी पुष्टि की कि ट्रंप ने बातचीत शुरू करने की कोशिशों को ठुकरा दिया है और फिलहाल उनका ध्यान युद्ध जारी रखते हुए ईरान की सैन्य क्षमता को और कमजोर करने पर है. अधिकारी ने कहा कि अभी बातचीत में उनकी कोई रुचि नहीं है और मिशन बिना रुके जारी रहेगा.

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ट्रंप ने पहले कहा था- अब बात करने में देर हो चुकी
युद्ध के पहले सप्ताह में ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच Truth Social पर लिखा था कि अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान की नेतृत्व व्यवस्था और सेना काफी कमजोर हो गई है और वे बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है.

अभियान जारी रहने की बात
व्हाइट हाउस के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ट्रंप का मानना है कि ईरान में संभावित नया नेतृत्व बातचीत करना चाहता है और भविष्य में ऐसा हो भी सकता है. फिलहाल अमेरिका का सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” बिना किसी रुकावट के जारी है.

ईरान की शर्तें भी सख्त
ईरानी सूत्रों के अनुसार तेहरान ने कई देशों की मध्यस्थता के बावजूद युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि जब तक अमेरिका और इजरायल हमले बंद नहीं करते और स्थायी रूप से सैन्य कार्रवाई खत्म करने की गारंटी नहीं देते, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है. इसके अलावा ईरान ने हमलों के बदले मुआवजे की भी मांग की है.

अमेरिका के भीतर भी मतभेद
युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी असर पड़ा है, जिससे अमेरिका के लिए भी आर्थिक दबाव बढ़ गया है. कुछ अमेरिकी अधिकारी और ट्रंप के सलाहकार चाहते हैं कि युद्ध जल्द खत्म किया जाए, क्योंकि पेट्रोल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी आने वाले मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकती है.

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कुछ लोग युद्ध जारी रखने के पक्ष में
वहीं दूसरी ओर कुछ अधिकारी चाहते हैं कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने और उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई जारी रखी जाए.

ओमान के जरिए बातचीत की कोशिश नाकाम
कई सूत्रों के अनुसार युद्ध के शुरुआती दिनों में अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने तनाव कम करने के लिए ओमान के जरिए बातचीत की संभावना तलाशने की कोशिश की थी. एक सूत्र ने बताया कि ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी ओमान के माध्यम से युद्धविराम पर चर्चा की कोशिश की थी, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हो सकते थे. लेकिन यह बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी.

ईरान का रुख और सख्त हुआ
एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने कहा कि अब पहले की कूटनीतिक बातचीत का कोई महत्व नहीं रह गया है. उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का मानना है कि अगर ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण खो देता है तो वह युद्ध हार जाएगा. इसलिए गार्ड किसी भी युद्धविराम, बातचीत या कूटनीतिक प्रयास को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं और कई देशों की कोशिशों के बावजूद ईरान के राजनीतिक नेता भी ऐसे किसी संवाद में शामिल नहीं होंगे.

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