वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल का खेल शुरू कर दिया है. अमेरिकी ट्रेजरी ने अभी एक जनरल लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत सिर्फ़ अमेरिकी कंपनियां ही वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA से तेल और तेल प्रोडक्ट खरीद सकती हैं. अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट द्वारा गुरुवार को जारी किया गया यह लाइसेंस कई तरह की गतिविधियों को कवर करता है जो वेनेजुएला के कच्चे तेल की खरीद बिक्री को तेज कर सकती हैं. इसमें इस तेल का एक्सपोर्ट, बिक्री, स्टोरेज और रिफाइनिंग शामिल है, बशर्ते ये काम कोई अमेरिकी कंपनी करे.
अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे समय से कहते रहे हैं कि अमेरिका को वेनेजुएला का तेल चाहिए. उनकी ये पॉलिसी उन्हीं बयानों के अनुरूप है. इस लाइसेंस के जारी होने के साथ ही ट्रंप का मकसद पूरा हो गया है. अब अमेरिका वेनेजुएला के तेल को पूरी तरह से कंट्रोल करेगा और इस तेल पर उन्हीं अमेरिकी कंपनियों को बिजनेस करने का हक होगा जो ट्रंप की पॉलिसी के तहत काम करते हैं.
यह सामान्य लाइसेंस वेनेजुएला के तेल से संबंधित लेनदेन को अनुमति देता है, जिसमें शामिल हैं:
तेल का उठाना ,
निर्यात, पुन: निर्यात,
बिक्री, पुन: बिक्री ,
आपूर्ति, भंडारण ,
मार्केटिंग, खरीद ,
डिलीवरी या परिवहन,
और ऐसे तेल की रिफाइनिंग,
ये सभी गतिविधियां केवल स्थापित अमेरिकी संस्थाओं द्वारा की जा सकती हैं, यानी वे कंपनियां जो 29 जनवरी 2025 से पहले अमेरिकी कानूनों के तहत संगठित हैं. ये लाइसेंस वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA (Petróleos de Venezuela, S.A.) और वेनेजुएला सरकार से जुड़े प्रतिबंधित लेनदेन को कवर करता है.
रूस, चीन और भारत पर असर
अमेरिकी ट्रेजरी के जनरल लाइसेंस नंबर- 46 का असर यह होगा कि इसके बाद रूस और चीन द्वारा वेनेजुएला के तेल की खरीद बिक्री पूरी तरह से बंद हो जाएगी. क्योंकि यह लाइसेंस केवल स्थापित अमेरिकी संस्थाओं को वेनेजुएला के तेल की खरीद, बिक्री, निर्यात, परिवहन और रिफाइनिंग की अनुमति देता है. भारत वैसे ही ना के बराबर वेनेजुएला का तेल खरीदता था.
अब इस लाइसेंस की वजह से रूस, चीन और भारत जैसे देशों पर इसका असर नकारात्मक रहेगा.
यह लाइसेंस स्पष्ट रूप से रूस, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया और क्यूबा से जुड़ी किसी भी व्यक्ति या संस्था के साथ लेनदेन को अधिकृत नहीं करता. चीन से नियंत्रित या संयुक्त उद्यम वाली वेनेजुएला/अमेरिकी कंपनियों के साथ भी सौदे प्रतिबंधित हैं।. इससे रूस और चीन की PDVSA में संयुक्त परियोजनाओं (जो कुल उत्पादन का लगभग 22% हैं) से तेल निर्यात मुश्किल हो जाएगा. इन देशों को अब वेनेजुएला से सस्ते तेल की आपूर्ति असंभव हो जाएगी.
कैरेबियन में खाली हो जाएंगे रूस-चीन के तेल टैंकर
ट्रंप के इस कदम के बाद कैरेबियन सागर से तेल लेकर जा रहे रूस और चीन के टैंकरों के लिए एक बूंद भी तेल ले जाना असंभव हो जाएगा. क्योंकि इस लाइसेंस को जारी करने के साथ ही अमेरिका ने कड़ी निगरानी शुरू कर दी है. अमेरिका पहले ही इस क्षेत्र से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर नजर रख रहा है और उन्हें सीज कर रहा है.
भारत पर कोई सीधा प्रतिबंध नहीं है, लेकिन लाइसेंस केवल अमेरिकी संस्थाओं को लाभ पहुंचाता है. गैर-अमेरिकी निर्यात के लिए विस्तृत रिपोर्टिंग अनिवार्य है, जैसे निर्यात किसे किया जा रहा है, कीमत क्या है, मात्रा क्या है, डेस्टिनेशन क्या है. इससे अमेरिकी निगरानी बढ़ेगी. इससे भारतीय कंपनियों के लिए किसी भी तरह से इस तेल को खरीदना मुश्किल हो जाएगा. अगर भारतीय कंपनियों को ये तेल खरीदना है तो इसके लिए भारतीय कंपनियों को अमेरिका के पास ही जाना पड़ेगा.
वेनेजुएला के तेल पर लंबे समय से ट्रंप की नजर
डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल के बारे में बार-बार कहा है कि वेनेजुएला ने अमेरिकी तेल चुराया है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कंपनियों ने वेनेजुएला का तेल उद्योग बनाया, लेकिन सोशलिस्ट शासन ने इसे चुरा लिया और अमेरिकी संपत्ति छीन ली.
जनवरी 2026 में मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला का तेल 'अनिश्चित काल तक' नियंत्रित करेगा, बेचेगा और राजस्व अमेरिकी ट्रेजरी में रखेगा ताकि यह वेनेजुएला और अमेरिकी लोगों के लाभ के लिए इस्तेमाल हो. ट्रंप ने $100 बिलियन अमेरिकी निवेश की मांग की ताकि उत्पादन बढ़े, तेल की कीमतें कम हों और अमेरिका को लाभ मिले.
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