रूस-चीन खामोश, मेक्सिको ने बढ़ाया हाथ... क्या तेल संकट से टूटने की कगार पर है क्यूबा?

क्यूबा गहरे ईंधन संकट से जूझ रहा है. अमेरिकी प्रतिबंधों और वेनेजुएला से तेल आपूर्ति रुकने के कारण बिजली, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं. हालात संभालने के लिए राशनिंग लागू है, जबकि मेक्सिको ने मानवीय मदद भेजी है. इस संकट की जड़ें अमेरिका-क्यूबा के पुराने तनाव और भू-राजनीतिक टकराव से भी जुड़ी हैं.

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क्यूबा में भीषण ईंधन संकट देखी जा रही है. (Photo- Reuters) क्यूबा में भीषण ईंधन संकट देखी जा रही है. (Photo- Reuters)

रवि शंकर तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 21 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:22 PM IST

क्यूबा इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े संकटों में से एक से जूझ रहा है. अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से देश को पर्याप्त तेल नहीं मिल पा रहा, जिसके कारण सड़कों पर वाहनों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. राजधानी हवाना की सड़कें सूनी पड़ी हैं. लाखों घर बिजली न मिलने की वजह से अंधेरे में डूबे हुए हैं. हालात इतने खराब हैं कि अस्पतालों को नियमित बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही और एंबुलेंस को भी ईंधन की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत हो रही है.

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यहां तक कि विमान भी ईंधन की कमी के कारण उड़ान नहीं भर पा रहे. एयर कनाडा सहित कई एयरलाइंस कंपनियों ने क्यूबा के लिए अपनी उड़ानें रोक दी हैं. बिगड़ते हालात को संभालने के लिए क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार ने तेल की राशनिंग शुरू की है, लेकिन इसका कोई खास असर नजर नहीं आ रहा. हवाना के एक स्थानीय टैक्सी चालक ने रॉयटर्स को बताया कि महज 20 लीटर तेल के लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ रहा है.

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आखिर अचानक क्यूबा में तेल संकट क्यों गहराया?

दरअसल, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से पहले वेनेजुएला क्यूबा को मुफ्त या बेहद कम कीमत पर तेल देता था. बदले में क्यूबा वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सुरक्षा सहयोग देता था. लेकिन वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद स्थिति बदल गई. अमेरिका ने वेनेजुएला से क्यूबा आने वाले तेल की आपूर्ति रोक दी. साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने क्यूबा को तेल बेचने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी, जिससे ईंधन संकट और गहरा गया.

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क्यूबा की मदद के लिए आगे आया मेक्सिको

जब क्यूबा को अपने मित्र देशों की जरूरत है, तब रूस और चीन की ओर से ठोस मदद सामने नहीं आई. रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा हुआ है, जबकि चीन अमेरिकी टैरिफ के डर से केवल प्रतिबंधों की आलोचना तक सीमित है. हालांकि मेक्सिको ने मानवीय सहायता भेजी है. हाल ही में मेक्सिको ने दो जहाजों के जरिए 814 टन खाद्य सामग्री क्यूबा भेजी.

मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने कहा है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद उनका देश क्यूबा को मानवीय सहायता देता रहेगा. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि क्यूबा की जनता पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए प्रतिबंधों को अनुचित माना जाए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मेक्सिको, क्यूबा को तेल आपूर्ति बहाल कराने के लिए अमेरिका के साथ कूटनीतिक प्रयास जारी रखेगा.

अमेरिका क्यूबा से क्या चाहता है?

अमेरिका चाहता है कि उसके पड़ोसी क्यूबा में चीन और रूस का प्रभाव सीमित रहे. लेकिन क्यूबा के संबंध रूस और चीन से लंबे समय से मजबूत रहे हैं, जो अमेरिका को असहज करते हैं. अमेरिका अपने पड़ोस में रूस और चीन की मौजूदगी को सुरक्षा के लिहाज से चुनौती मानता है और पश्चिमी गोलार्ध में उनके प्रभाव को कम करना चाहता है. पश्चिमी गोलार्ध में उत्तरी और दक्षिणी अमेरिकी महाद्वीप शामिल हैं, जिसे ऐतिहासिक रूप से “नई दुनिया” भी कहा जाता है.

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अमेरिका और क्यूबा की पुरानी दुश्मनी

अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव की शुरुआत 1959 में हुई, जब फिदेल कास्त्रो ने अमेरिकी समर्थित फुल्गेन्सियो बतिस्ता की सरकार को उखाड़ फेंका. बतिस्ता 1940 से 1944 और फिर 1952 से 1959 तक क्यूबा के राष्ट्रपति रहे. क्यूबाई क्रांति के बाद कास्त्रो सत्ता में आए और 2008 तक शासन किया. उनके सहयोगी चे ग्वेरा बाद में बोलिविया चले गए, जहां 1967 में उन्हें मार दिया गया.

क्यूबा मिसाइल संकट

1961 में अमेरिका ने कास्त्रो सरकार को हटाने के लिए ‘बे ऑफ पिग्स’ अभियान चलाया, जो असफल रहा. इसके बाद कास्त्रो ने सोवियत संघ को क्यूबा में परमाणु मिसाइलें तैनात करने की अनुमति दी. अक्टूबर 1962 में अमेरिकी विमानों ने इन मिसाइलों का पता लगाया, जिससे अमेरिका और सोवियत संघ के बीच गंभीर तनाव पैदा हुआ. दो सप्ताह तक हालात परमाणु युद्ध की कगार पर रहे. अंततः सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने क्यूबा से मिसाइलें हटाने पर सहमति जताई. बदले में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने क्यूबा पर हमला न करने और तुर्की से अमेरिकी मिसाइलें हटाने का वादा किया.

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