पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत और चीन से सुधरते रिश्तों पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार और खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखना चाहिए. वांग यी का कहना है कि चीन और भारत महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं और दोनों ग्लोबल साउथ के सदस्य होने के नाते गहरे सांस्कृतिक संबंध तथा व्यापक साझा हित रखते हैं. उन्होंने ये बयान बीजिंग में आयोजित 14वीं नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के सत्र के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया है.
शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, वांग यी ने घरेलू और विदेशी पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए चीन की विदेश नीति और बाहरी संबंधों पर विस्तार से बात की. इसी दौरान जब भारतीय पत्रकार के एक सवाल का जवाब में कहा, 'चीन और भारत महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं और दोनों ही वैश्विक दक्षिण के हिस्से हैं, जिनके बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध और व्यापक साझा हित हैं. चीन-भारत के बीच आपसी विश्वास और सहयोग साझा विकास के लिए बहुत फायदेमंद है, जबकि विभाजन और टकराव एशिया के पुनरुत्थान में सही नहीं हैं.'
उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के रिश्ते अब सामान्य पटरी पर लौट आए हैं. इसलिए दोनों देश आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
उच्चतम स्तर पर है द्विपक्षीय व्यापार
वांग यी ने याद दिलाया कि पिछले साल अगस्त में तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी. कज़ान के बाद हुई इस बैठक ने भारत-चीन संबंधों को और मधुर किया है. दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति को जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है. विभिन्न स्तरों पर संवाद बढ़ा है और द्विपक्षीय व्यापार अब तक के नए सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है.
चीनी विदेश मंत्री के अनुसार, लोगों के बीच आपसी संपर्क सक्रिय होने से दोनों देशों की जनता को फायदा हुआ है.
सीमा पर शांति को प्राथमिकता
वांग यी ने संबंधों को मजबूत करने के लिए चार मुख्य पॉइंट भी साझा किए. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार और खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखना चाहिए. वांग यी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ अच्छे पड़ोसी के धर्म को निभाने पर जोर दिया.
उन्होंने विकास को 'सबसे बड़ा साझा आधार' बताते हुए व्यावहारिक सहयोग के परिणाम दिखाने की बात कही. आपसी विश्वास ही एशिया के पुनरुद्धार की अहम चाबी है, जबकि विभाजन से एशिया का नुकसान होगा.
ग्लोबल साउथ की जिम्मेदारी
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन को इस साल और अगले साल ब्रिक्स की बारी-बारी से अध्यक्षता करने में एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए. भारत इस साल अध्यक्ष है और अगले साल ये जिम्मेदारी चीन के पास होगी.
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के माध्यम से ठोस सहयोग बढ़ाकर ग्लोबल साउथ के देशों को नई उम्मीद दी जा सकती है. दोनों देशों को एक-दूसरे की ओर कदम बढ़ाते हुए बाधाओं को दूर करना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर जिम्मेदारी का प्रदर्शन किया जा सके.
आपको बता दें कि अमेरिका बीते कुछ सालों से लगातार चीन को आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर घेरने की कोशिश कर रहा है. पहले अमेरिका ने चीन के सबसे ज्यादा निवेश वाले वेनेजुएला में हमला कर, उसे आर्थिक नुकसान पहुंचा तो अब ईरान पर हमला कर चीन को बैकफुट पर धकेल दिया है. ऐसे में चीन अपने पड़ोसी देश भारत और रूस को अपने खेमे में बनाए रखने की जद्दोजहद में जुटा हुआ है. जिससे की वह रणनीतिक रूप से अमेरिका के आगे कमजोर न पड़े. यहीं करण है कि अब वो भारत के साथ दोस्ती और भाईचारे की दलील दे रहा है.
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