क्या अमेरिका के H1B वीजा की तरह है चीन का K-वीजा? जानिए किसे मिलेगा, फीस कितनी, नया क्या

अमेरिका के H-1B वीजा की बढ़ती मुश्किलों के बीच चीन ने नया K-वीज़ा पेश किया है. 1 अक्टूबर 2025 से लागू होने वाला यह वीजा दुनियाभर के युवा और प्रतिभाशाली STEM प्रोफेशनल्स को आकर्षित करने के लिए बनाया गया है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (बाएं) के साथ एक बैठक के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हाथ मिलाते हुए. (File Photo- AP) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (बाएं) के साथ एक बैठक के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हाथ मिलाते हुए. (File Photo- AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 10:07 AM IST

अमेरिका में H-1B वीजा की प्रक्रिया और फीस को लेकर बढ़ती सख्ती के बीच चीन ने वैश्विक टैलेंट को आकर्षित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. बीजिंग ने रविवार को नया K-वीजा कैटेगरी शुरू करने का ऐलान किया है, जिसे विशेषज्ञ अमेरिका के H-1B का विकल्प बता रहे हैं. यह नया वीजा 1 अक्टूबर 2025 से लागू होगा.

किसे मिलेगा K-वीजा?

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चीन के न्याय मंत्रालय के मुताबिक, K-वीजा उन विदेशी युवा वैज्ञानिक और तकनीकी प्रतिभाओं को मिलेगा, जिन्होंने चीन या विदेश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी/ रिसर्च संस्थान से STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) में बैचलर डिग्री या उससे उच्च डिग्री हासिल की हो. 

यह वीजा शिक्षण और शोध कार्य से जुड़े युवा प्रोफेशनल्स के लिए भी खुला रहेगा. आवेदन करने वालों को जरूरी योग्यता और दस्तावेज जमा करने होंगे, जिनका विवरण चीनी दूतावास और वाणिज्य दूतावास जारी करेंगे.

K-वीजा की क्या खासियत?

चीन में मौजूदा 12 वीजा कैटेगरी के मुकाबले यह ज्यादा लचीला होगा. इसमें मल्टीपल एंट्री, ज्यादा वैधता और लंबे समय तक रहने की सुविधा मिलेगी. सबसे बड़ी बात इसमें आवेदन के लिए किसी चीनी नियोक्ता या संस्था से इनविटेशन लेटर की जरूरत नहीं होगी. वीजा होल्डर शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान-तकनीक, बिजनेस और स्टार्टअप से जुड़े कामों में भी हिस्सा ले सकेंगे.

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क्यों लाया गया K-वीजा?

यह कदम चीन की बड़ी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है. बीते कुछ सालों में चीन ने विदेशी नागरिकों के लिए वीजा नियमों में ढील दी है. 55 देशों के नागरिकों को अब 240 घंटे तक वीजा-फ्री ट्रांजिट की सुविधा है. 75 देशों के साथ चीन वीजा छूट समझौते कर चुका है. 2025 की पहली छमाही में 3.8 करोड़ विदेशी नागरिक चीन गए, जिनमें से 1.36 करोड़ वीजा-फ्री एंट्री थीं.

दक्षिण एशिया पर क्या असर...

अमेरिका ने हाल ही में H-1B एप्लीकेशन पर 1 लाख डॉलर सालाना फीस लगाने का ऐलान किया है, जिससे भारतीय टेक वर्कर्स और आईटी कंपनियों में चिंता बढ़ गई है. इस बीच चीन का K-वीजा दक्षिण एशियाई प्रोफेशनल्स, खासकर भारत से जाने वालों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन सकता है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन का यह कदम ग्लोबल STEM टैलेंट को अपनी ओर खींचने की कोशिश है. हालांकि, यह देखना बाकी है कि K-वीजा अमेरिका और यूरोप की तरह ही करियर ग्रोथ और प्रतिष्ठा दिला पाएगा या नहीं. लेकिन इतना साफ है कि बीजिंग अब सीधे तौर पर दुनिया की युवा प्रतिभाओं को अपने यहां बुलाने की कोशिश कर रहा है.

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