बांग्लादेश चुनाव 2026: AI से गढ़ी जा रही देश की सियासत, क्रिकेट बना बड़ा मुद्दा!

बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात के गठबंधन के बीच कड़ी टक्कर है. सोशल मीडिया पर भारत विरोधी भावनाओं का फायदा उठाते हुए पार्टियां एआई-निर्मित वीडियो का इस्तेमाल कर फर्जी खबरें फैला रही हैं. वहीं, क्रिकेट को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.

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बांग्लादेश में चुनावों के लिए AI कंटेंट का इस्तेमाल हो रहा है. (Photo:X/BNP) बांग्लादेश में चुनावों के लिए AI कंटेंट का इस्तेमाल हो रहा है. (Photo:X/BNP)

आकाश शर्मा / बिदिशा साहा

  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:02 AM IST

बांग्लादेश में गुरुवार को चुनाव होने जा रहे हैं. यहां बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है. जमीनी स्तर पर चुनाव प्रचार आज खत्म होगा, लेकिन असली लड़ाई महीनों से सोशल मीडिया पर चल रही है.

इंडिया टुडे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (ओएसआईएनटी) टीम ने बांग्लादेश  में होने जा रहे चुनाव को प्रभावित करने वाले प्रमुख विचारों का आकलन किया. इसके लिए टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों का विश्लेषण किया. इस सिलसिले में पार्टी घोषणापत्रों की जांच की गई और राजनीतिक नेताओं के भाषणों की समीक्षा की गई.

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सोशल मीडिया के विश्लेषण में पता चला कि राजनीतिक दल भारत विरोधी भावना का फायदा उठा रहे हैं. दल एआई-निर्मित वीडियो का इस्तेमाल करके दावे कर रहे हैं कि इस बार वर्ल्ड कप ढाका आएगा.

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पार्टियों ने क्रिकेट को बनाया ‘हथियार’ 

बांग्लादेश के चुनावी माहौल में क्रिकेट को लेकर सियासत की जा रही है. रैलियों और सोशल मीडिया पर, पार्टी समर्थक बांग्लादेश की टी20 वर्ल्ड कप की निराशा को राष्ट्रीय गरिमा और विदेशी हस्तक्षेप पर सवाल खड़े कर रहे हैं. 

वर्ल्ड कप की हार को बनाया मुद्दा

इंडिया टुडे की टीम ने कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के फेसबुक हैंडल खंगाले और पाया कि जमात-ए-इस्लामी के समर्थकों ने बांग्लादेश की वर्ल्ड कप में हार को अन्याय के रूप में पेश किया है. उन्होंने दावे किए हैं कि जमात के नेतृत्व वाली सरकार वर्ल्ड लेवल पर बांग्लादेश का गौरव वापस लाएगी और वर्ल्ड कप भी जिताएगी.

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भारतीय मैचों के बॉयकॉट की मांग

एनसीपी ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद में भारत के प्रभुत्व के विरोध में "बैंगला रैली" का आयोजन किया. बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस विरोध प्रदर्शन में पार्टी ने दिल्ली के छात्र नेता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के आरोपियों को पनाह देने का विरोध किया गया. रैली के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो लोगों ने भारतीय मैचों के बॉयकॉट की बात कही.

शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने वाले छात्र विरोध प्रदर्शनों से जन्मी नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) सबसे मुखर रही है. इसके घोषणापत्र में भारत का सीधा नाम लिया गया है, जिसमें सीमा पर हुई हत्याओं, असमान समझौतों, सीमा पार नदियों पर विवाद और बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में कथित हस्तक्षेप का जिक्र किया गया है.

अवामी लीग के नेताओं को कहा 'आतंकवादी'

पार्टी का कहना है कि अगर द्विपक्षीय वार्ता नाकाम रहती है, तो ढाका शेख हसीना को न्याय के कटघरे में लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय अदालतों और संगठनों के जरिए कानूनी रास्ते अपनाएगा. चुनाव प्रचार के दौरान, एनसीपी नेताओं ने दिल्ली में स्थित अवामी लीग के नेताओं का खुलेआम मजाक उड़ाया है. उन्हें आतंकवादी, उग्रवादी और चोर करार दिया है.

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वहीं, बीएनपी ने अपने घोषणापत्र और भाषणों में भारत का सीधा जिक्र करने से परहेज किया है. हालांकि, इसके अध्यक्ष तारिक रहमान की टिप्पणियां, जिनमें तथाकथित 'मौत का जाल' फरक्का बैराज के विकल्प के रूप में पद्मा बैराज के निर्माण का प्रस्ताव एक कठोर रुख का संकेत देती हैं.

दिल्ली में शेख हसीना को पनाह?

बांग्लादेश को आजादी दिलाने वाली पार्टी आवामी लीग ने कई सालों तक ढाका पर शासन किया है. लेकिन अब इस पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. सत्ता से बेदखल होने के बाद शेख हसीना फिलहाल दिल्ली में शरण लिए हुए हैं और बांग्लादेश में उन्हें मौत की सजा सुनाई जा चुकी है. साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल (एसएटीपी) की मानें तो हसीना दिल्ली से बांग्लादेश में पार्टी की बैठकें करती हैं 

अवामी लीग के कुछ गुटों ने #NoBoatNoVote जैसे डिजिटल अभियान चलाए हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत हो रहे चुनाव एक दिखावा हैं. इस अभियान के तहत 12 फरवरी के चुनावों का बहिष्कार करने की भी बात कही गई.

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बांग्लादेश चुनावों में एआई-जेनरेटेड कंटेंट

बांग्लादेश का सोशल मीडिया एआई-जेनरेटेड कंटेंट से भर गया है. इंडिया टुडे ने पाया कि पार्टी समर्थक और ऑनलाइन इन्फ्लुएंसर एआई के बनाए गए वीडियो के जरिए तेजी से फेक न्यूज फैला रहे हैं. इंडिया टुडे ने कम से कम सात सोशल मीडिया चैनलों की पहचान की है जो एआई कंटेंट से झूठी बातें फैला रहे हैं. 

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जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी एक-दूसरे को बदनाम करने के लिए एआई जेनरेटेड वीडियो का सहारा ले रही हैं. जमात इन वीडियो में अक्सर बीएनपी को जबरन वसूली करने वालों और धोखेबाजों के रूप में दिखा रहा है. 

जमात विरोधी अभियान पार्टी को राष्ट्रविरोधी तक बता रहा है. उदाहरण के लिए, एक पॉडकास्ट वीडियो में, एक एआई कैरेक्टर दावा करता है कि जमात बांग्लादेश के लिए नहीं, बल्कि पाकिस्तान के लिए वफादार है. दूसरे वीडियो में दावा किया गया है कि 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तान में बदलने में विफल रहने के बाद, जमात अब इसे अफगानिस्तान में बदलने की कोशिश कर रही है.

रियल से कम नहीं लग रहे कुछ एआई-जेनरेटेड कंटेंट 

इन वीडियो की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई बहुत रियल लगते हैं. एक षड्यंत्रकारी कहानी में, जमात समर्थक ने दावा किया कि बीएनपी नेताओं ने नई दिल्ली में भारत की अनुसंधान एवं विश्लेषण शाखा (R&A W) के अधिकारियों से मुलाकात की थी. गूगल के सिंथआईडी (डीपमाइंड का एक टूल जो एआई कंटेंट की पहचान करने के लिए बनाया गया है) से पता चला कि ये सब एआई से बना है.

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(विजयेश तिवारी के इनपुट के साथ)

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