चीन के हाइपरसोनिक मिसाइल दागने से टेंशन में अमेरिका, याद आ गया 'दुश्मन' रूस

अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि चीन ने जिस सीक्रेट तरीके से हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया है, वो बिल्कुल रूस के स्पुतनिक लॉन्च की याद दिलाता है. बता दें कि साल 1957 में रूस ने स्पुतनिक सैटेलाइट को लॉन्च किया था. इस लॉन्च के साथ ही अमेरिका और रूस में काफी तनाव देखने को मिला था.

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शी जिनपिंग और जो बाइडेन फोटो क्रेडिट: रॉयटर्स शी जिनपिंग और जो बाइडेन फोटो क्रेडिट: रॉयटर्स

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 28 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 2:00 PM IST
  • चीन की हाइपरसोनिक मिसाइल टेस्टिंग से चिंतित अमेरिका
  • रूस के शीत युद्ध दौर से कर डाली अमेरिका ने तुलना

ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की हाल ही में आई एक रिपोर्ट काफी चर्चा में थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन दो महीने पहले सीक्रेट तरीके से एक शक्तिशाली हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया है. इस रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया था कि चीन की हाइपरसोनिक मिसाइल की क्षमताओं के सामने आने के बाद अमेरिका की खुफिया एजेंसियां काफी हैरान हैं. अब अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस मसले पर एक बड़ा बयान दिया है. 

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'शीत युद्ध के दौरान आया था रूस का स्पुतनिक मोमेंट'

अमेरिकी सेना में जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के प्रमुख मार्क मिली ने ब्लूमबर्ग न्यूज के साथ बातचीत में कहा कि चीन ने जिस सीक्रेट तरीके से हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया है, वो बिल्कुल रूस के स्पुतनिक लॉन्च की याद दिलाता है. बता दें कि साल 1957 में रूस ने स्पुतनिक सैटेलाइट को लॉन्च किया था. इस लॉन्च के साथ ही अमेरिका और रूस में काफी तनाव देखने को मिला था और दोनों देशों के बीच हथियारों को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो गई थी. शीत युद्ध के दौरान साल 1957 में रूस ने स्पुतनिक सैटेलाइट लॉन्च के साथ ही अमेरिका के मन में ये चिंता पैदा कर दी थी कि रूस तकनीकी रूप से अधिक शक्तिशाली हो रहा है. इसके बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने ऐलान किया था कि अमेरिका चंद्रमा पर अपने अंतरिक्ष यात्री भेजेगा.

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मार्क ने कहा कि चीन के हाइपरसोनिक हथियारों के सिस्टम को लेकर जो हमने देखा, वो काफी चिंताजनक है. मैं ये दावे के साथ नहीं कह सकता हूं कि ये 'स्पुतनिक मोमेंट' है लेकिन मुझे लगता है कि ये टेस्ट उस लम्हे के काफी करीब कहा जा सकता है. ये एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना है और हम इस पर नजरें बनाए हुए हैं. बता दें कि ये पहली बार है जब अमेरिका ने चीन के हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण के बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ कहा है. इससे पहले अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस टेस्ट की पुष्टि करने से इनकार कर दिया था. 

हालांकि, पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने जनरल मार्क की टिप्पणी पर कुछ कहने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि ये कोई ऐसी तकनीक नहीं है जिसके बारे में हमें मालूम नहीं है. अमेरिका भी अपनी हाइपरसोनिक तकनीक पर काम कर रहा है. चीन की सैन्य क्षमताओं में कोई भी बड़ी प्रगति इस क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिशों को झटका पहुंचाएगी. बता दें कि चीन ने ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट को गलत करार दिया था. चीन में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि ये एक रुटीन टेस्ट था ताकि अलग-अलग तरह की स्पेस क्राफ्ट टेक्नोलॉजी को चेक किया जा सके. ये कोई हाइपरसोनिक मिसाइल नहीं थी बल्कि एक स्पेसक्राफ्ट था.

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बैलेस्टिक मिसाइल से ज्यादा खतरनाक हाइपरसोनिक मिसाइलें

हाइपरसोनिक मिसाइलें बैलेस्टिक मिसाइलों से कहीं ज्यादा खतरनाक है. ये मिसाइलें ध्वनि की गति से पांच गुना ज्यादा गति से हमला कर सकती हैं. इन्हें एयर डिफेंस सिस्टम से पहचान पाना भी मुश्किल होता है.अगर कोई देश हाइपरसोनिक मिसाइल लॉन्च करता है तो उसे एंटी डिफेंस मिसाइल सिस्टम की मदद से रोकना लगभग नामुमकिन होगा. हालांकि क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव को लेकर कुछ सुपरपावर देशों ने सिस्टम तैयार कर लिए हैं. फिलहाल अमेरिका, चीन, रूस और उत्तर कोरिया हाइपरसोनिक तकनीक पर काम कर रहे हैं.


 

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