डिएगो गार्सिया सौदे पर ट्रंप का UK पर हमला, बोले- यह 'भारी मूर्खता’, चीन-रूस देख रहे हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डिएगो गार्सिया द्वीप को मॉरीशस को सौंपने की ब्रिटेन की योजना पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने इसे 'राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ भारी मूर्खता' बताया और चेतावनी दी कि चीन और रूस इस कदम पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं. ट्रंप ने इस मुद्दे को ग्रीनलैंड से भी जोड़ दिया है.

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यूके पीएम स्टार्मर ने डिएगा गार्सिया को मॉरिशस को लौटाने की बात की थी. (फाइल फोटो) यूके पीएम स्टार्मर ने डिएगा गार्सिया को मॉरिशस को लौटाने की बात की थी. (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:34 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन की डिएगो गार्सिया द्वीप को मॉरीशस को सौंपने की योजना को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. ट्रंप ने इसे ‘GREAT STUPIDITY’ यानी भारी मूर्खता करार देते हुए कहा कि यह कदम अमेरिका और उसके सहयोगियों की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में स्थित एक रणनीतिक द्वीप है, जहां अमेरिका का अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा मौजूद है.

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ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा कि यह हैरान करने वाली बात है कि एक नाटो सहयोगी देश इतने अहम सैन्य महत्व वाली जमीन को बिना किसी ठोस वजह के सौंपने जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि चीन और रूस जैसे वैश्विक शक्तिशाली देश इस फैसले को कमजोरी के संकेत के रूप में देख रहे हैं. ट्रंप के मुताबिक, ये देश केवल ताकत की भाषा समझते हैं.

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अपने बयान में ट्रंप ने इस मुद्दे को सीधे ग्रीनलैंड से जोड़ते हुए कहा कि डिएगो गार्सिया का मामला इस बात का एक और उदाहरण है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड का अधिग्रहण क्यों जरूरी है. उन्होंने इसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य कदम बताया. ट्रंप ने डेनमार्क और उसके यूरोपीय सहयोगियों से भी ‘सही फैसला लेने’ की अपील की.

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डिएगो गार्सिया पर ट्रंप ने की मध्यस्थता की पेशकश

यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप पहले डिएगो गार्सिया को लेकर ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुए समझौते का समर्थन करने के संकेत दे चुके थे. हालांकि, अब उनका रुख पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छिड़ गई है.

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किसी भी तरह की कमजोरी बर्दाश्त नहीं

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के बयान केवल ब्रिटेन पर दबाव बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे चीन और रूस को यह संदेश भी देना चाहते हैं कि अमेरिका रणनीतिक इलाकों में किसी भी तरह की कमजोरी बर्दाश्त नहीं करेगा.

ग्रीनलैंड और डिएगो गार्सिया जैसे मुद्दे अब ट्रांसअटलांटिक सुरक्षा बहस के बड़े फ्लैशपॉइंट बनते जा रहे हैं, जहां अमेरिका और यूरोप के हित टकराते दिख रहे हैं.

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