अमेरिका और इजरायल बनाम ईरान की जंग अब एक नए और विवादित दौर में पहुंच गई है. इस युद्ध को अब इजरायल के अलावा अमेरिकी नेता भी धार्मिक लड़ाई के रूप में पेश कर रहे हैं. 200 से ज्यादा अमेरिकी सैनिकों ने शिकायत की है कि युद्ध में शामिल होने के लिए उन्हें बाइबिल में कही गई बातों का हवाला दिया गया है. सैनिकों से कहा जा रहा है कि ईरान के खिलाफ युद्ध 'ईश्वर की दिव्य योजना का हिस्सा है.' इसे बाइबिल में बताए गए 'आर्मगेडन' या कहें कि दुनिया के 'आखिरी युद्ध' से जोड़ा जा रहा है.
मुस्लिम सिविल राइट्स संगठन काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (सीएआईआर) और अमेरिकी निगरानी समूह मिलिट्री रिलिजियस फ्रीडम फाउंडेशन (एमआरएफएफ) ने ऐसी भाषा को खतरनाक और भड़काऊ बताया है. शिकायत करने वालों में एक नॉन-कमीशंड ऑफिसर (NCO) भी शामिल है, जो एक ऐसी यूनिट में काम करता है जिसे ईरान के खिलाफ ऑपरेशन में शामिल होने के लिए किसी भी समय तैनात किया जा सकता है.
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पश्चिम एशिया में टकराव की शुरुआत शनिवार को हुई, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर एहतियाती हवाई हमले किए. इसके बाद ईरान भी इजरायल समेत खाड़ी मुल्कों पर मिसाइलें दाग रहा है, जहां अमेरिका का एयरबेस है. ईरान ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, इराक और साइप्रस समेत कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों ठिकानों को निशाना बनाया है. इलाके में तनाव लगातार बढ़ रहा है और बातचीत से समाधान की उम्मीद फिलहाल कम दिख रही है.
'ईसाई राष्ट्रवादियों का US मिलिट्री पर कब्जा'
अमेरिकी मिलिट्री फ्रीडम फाउंडेशन को मिली शिकायत में कहा गया है कि कुछ सैन्य अधिकारी सैनिकों से कह रहे हैं कि ईरान के साथ यह युद्ध "ईश्वर की योजना" का हिस्सा है. उनका दावा है कि यह बाइबिल में बताए गए "आर्मगेडन" यानी दुनिया के अंतिम युद्ध की ओर एक कदम है. एक गैर-कमीशंड अधिकारी ने ईमेल में शिकायत की कि उनके कमांडर ने 'बुक ऑफ रिवेलेशन' का जिक्र करते हुए कहा कि यह युद्ध यीशु मसीह की वापसी से जुड़ा है.
बाइबिल की आखिरी किताब ‘बुक ऑफ रिवेलेशन’ में आर्मगेडन उस जगह को कहा गया है जहां दुनिया की आखिरी और सबसे बड़ी लड़ाई होगी. यह नाम हिब्रू शब्द 'हार मेगिद्दो' से आया है, जिसका मतलब है "मेगिद्दो पहाड़."
शिकायत में यह भी कहा गया कि कमांडर ने सैनिकों से कहा, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यीशु ने चुना है ताकि वे ईरान में आग जलाकर आर्मगेडन की शुरुआत करें." यह शिकायत 15 सैनिकों की तरफ से की गई थी, जिनमें 11 ईसाई, एक मुस्लिम और एक यहूदी शामिल थे. एमआरएफएफ का कहना है कि इस तरह की धार्मिक भाषा सेना के अंदर धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांत के खिलाफ है.
द गार्डियन के मुताबिक, MRFF के अध्यक्ष और एयर फोर्स के पुराने सैनिक माइकी वेनस्टीन ने सैनिकों की शिकायत पर कहा, "जब भी इजराइल या US मिडिल ईस्ट में शामिल होता है, तो हमें ईसाई राष्ट्रवादियों के बारे में ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं जिन्होंने हमारी सरकार और खासकर हमारी US मिलिट्री पर कब्जा कर लिया है." वहीं सीएआईआर ने अमेरिकी नेताओं के बयानों को शिया मान्यताओं पर हमला बताया और कहा कि इससे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत बढ़ सकती है.
अमेरिका से लेकर इजरायली नेता तक जंग को दे रहे धार्मिक रंग
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी इन दिनों धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल करते सुने गए हैं. मार्को रुबियो ने अपने एक बयान में कहा, "ईरान धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा चलाया जा रहा है" और उसे परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा कि "भविष्यवाणी वाले इस्लामी विचारों में डूबे शासन को परमाणु हथियार नहीं रखने दिए जा सकते." उन्होंने यह भी कहा, "ऐसा कोई कारण नहीं है कि टेंपल माउंट पर टेंपल को फिर से बनाने का चमत्कार मुमकिन न हो." इस बीच यरूशलेम की सबसे पवित्र मस्जिद अल-अक्सा में इजरायली सेना को टेंपल माउंट-पैच्ड वर्दी और हेलमेट पहने भी देखा गया है.
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अमेरिकी नेताओं की तरफ से धार्मिक शब्दों के साथ बयानबाजी नई नहीं है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी कई मौकों पर धार्मिक उदाहरण दिए हैं. उन्होंने तोराह का हवाला देते हुए ईरान की तुलना "अमालेक" से की, जिसे यहूदी परंपरा में बुराई का प्रतीक माना जाता है. उन्होंने कहा, "हम याद रखते हैं कि अमालेक ने हमारे साथ क्या किया था, और हम कार्रवाई करते हैं." सीएआईआर का आरोप है कि इस तरह की तुलना सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने के लिए की जा रही है.
जनता का समर्थन जुटाने की कोशिश
अगर एक्सपर्ट्स की मानें तो युद्ध को "ईश्वर की दिव्य योजना" बताकर आम लोगों का समर्थन जुटाने की कोशिश हो सकती है. मसलन, अमेरिका में नवंबर महीने में मिड टर्म चुनाव होने हैं. इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमले से देश की जनता में नाराजगी है. कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं जिसमें माना गया है कि अमेरिकी युद्ध नहीं चाहते. खासकर तब जब ट्रंप खुद अपने चुनावी भाषणों में देश को युद्धों से बाहर निकालने की बात कर चुके थे.
अमेरिकियों का मानना है कि देश को इस वक्त आर्थिक हालात में सुधार की जरूरत है, जहां महंगाई और अन्य आर्थिक मुद्दे अहम हैं. इनके अलावा इजरायल की अगर बात करें तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जंग का सहारा लेकर अपने खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों से निजात पाना चाहते हैं.
इजरायल के सुप्रीम कोर्ट में नेतन्याहू के खिलाफ मामला चल रहा है और कोर्ट उन्हें किसी तरह की छूट देने के मूड में नहीं है. यहां तक कि इसके लिए ट्रंप भी इजरायली राष्ट्रपति को 'शर्म आना चाहिए' जैसे बयान दे चुके हैं और नेतन्याहू को माफी देने की वकालत कर चुके हैं. मसलन, धार्मिक भाषा से लोगों को लगता है कि युद्ध जरूरी और सही है.
धार्मिक लड़ाई या समर्थन जुटाने का प्रोपेगेंडा?
इनके अलावा जंगों को "हम बनाम वे" की लड़ाई के रूप में पेश किया जाता है, जिससे यह सिर्फ राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि आस्था की टकराहट बन जाता है. एक रिपोर्ट की मानें तो सोशल मीडिया पर एक वीडियो में ईसाई पादरी ईरान पर अमेरिकी हमले का समर्थन करते नजर आए. उन्होंने कहा कि रूस, तुर्किये और "जो ईरान बचेगा" इजरायल पर हमला करेंगे और ईश्वर इजरायल की रक्षा करेगा. ऐसे बयान माहौल को और ज्यादा धार्मिक रूप दे सकते हैं.
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धार्मिक लड़ाई के रूप में जंगों को पेश करना कोई नए दौर की बात नहीं है. 2001 में अमेरिका में हमले के बाद तब के राष्ट्रपति राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को "क्रूसेड" कहा था. बाद में इस शब्द पर विवाद हुआ और सफाई देनी पड़ी. आज भी आशंका है कि धार्मिक शब्दों का ज्यादा इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत संदेश दे सकता है.
विश्लेषकों का कहना है कि जब किसी युद्ध को धार्मिक रंग दे दिया जाता है, तो समझौते की संभावना कम हो जाती है. युद्ध के समर्थक खुद को सही और ईश्वर के साथ मानने लगते हैं. इससे संघर्ष लंबा खिंच सकता है और दुनिया भर में सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है.
कुल मिलाकर, ईरान के खिलाफ चल रही यह कार्रवाई अब सिर्फ सैन्य या राजनीतिक मुद्दा नहीं रही. धार्मिक भाषा ने इसे आस्था और पहचान से जुड़ा मामला बना दिया है. आलोचकों का मानना है कि अगर बयानबाजी पर नियंत्रण नहीं रखा गया, तो शांति की राह और मुश्किल हो सकती है. आने वाले समय में यह देखना होगा कि नेता अपने शब्दों में संयम बरतते हैं या नहीं.
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