ईरान और यूएस-इजरायल की जारी जंग के बीच अमेरिका एक और नए देश पर जंगी मोर्चा खोलने के मूड में है. इसका नाम है क्यूबा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप के पुराने ट्वीट और मीडिया बयानों को खंगालें तो पता चलता है कि क्यूबा पर उनकी नजर पहले ही टेढ़ी हो रखी थी. बल्कि नए साल की शुरुआत के साथ जब अमेरिका ने वेनेजुएला की सत्ता पलटी तब ही क्यूबा का जिक्र वह कर चुके थे.
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा था, 'क्यूबा कई वर्षों तक वेनेज़ुएला से मिलने वाले भारी मात्रा में तेल और धन पर निर्भर रहा. बदले में, क्यूबा ने वेनेज़ुएला के पिछले दो तानाशाहों को 'सुरक्षा' दी, लेकिन अब और नहीं.' ट्रंप ने यह भी लिखा... 'वेनेज़ुएला को अब उन गुंडों और जबरन वसूली करने वालों से सुरक्षा की जरूरत नहीं है. क्यूबा को अब और तेल या पैसा नहीं भेजा जाएगा- जीरो. मेरा सुझाव है कि बहुत देर होने से पहले वे (क्यूबा) समझौता कर लें.'
ट्रंप ने ऐसा लिखकर क्यूबा के साथ अमेरिका की उसी पुरानी दुश्मनी में फूंक मारी थी जिसकी आग बीते लगभग सात दशकों से जल रही थी. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय इस आग पर पानी डालने की कोशिश जरूर हुई, लेकिन ये आग ठंडी होती कि इससे पहले ही ट्रंप ने इसे फिर से भड़काना शुरू कर दिया है.
सवाल है कि आखिर अमेरिका और क्यूबा में दुश्मनी क्यों है? ये कबसे शुरू हुई.
बीबीसी की एक रिपोर्ट की मानें तो 'क्यूबा के संबंध रूस और चीन से अच्छे हैं, यही बात अमेरिका को पसंद नहीं. ट्रंप का रूस से जुड़ाव नहीं और चीन से खतरा महसूस होते हैं, लिहाजा वह चीनी असर को धरती के इस पश्चिमी गोलार्ध से मिटाना चाहते हैं.'
क्यूबा का इतिहास और अमेरिका से तनातनी
अब अमेरिका की क्यूबा से नाराजगी को समझने के लिए इस देश के 125 वर्षों के इतिहास को पलट लेते हैं. कहानी 1902 से शुरू होती है. क्यूबा पर पहले स्पेन का दावा और अधिकार था. 1898 में अमेरिका से हारने के बाद स्पेन ने क्यूबा अमेरिका को ही सौंप दिया. साल 1902 में क्यूबा स्वतंत्र हुआ और टॉमस इस्ट्राडा पाल्मा इसके पहले राष्ट्रपति बने. कुछ वर्षों बाद इस्ट्राडा ने इस्तीफा दे दिया और होजे मिगुएल गोमेज की लीडरशिप में हुए विद्रोह के बाद अमेरिका ने क्यूबा पर कब्ज़ा कर लिया.
अमेरिका की निगरानी में साल 1909 में चुनाव हुए, होजे मिगुएल गोमेज राष्ट्रपति बने, लेकिन उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे. 1912 में नस्लीय भेदभाव के खिलाफ ब्लैक लोगों के विरोध प्रदर्शन को दबाने में मदद के लिए अमेरिकी सेना फिर से क्यूबा लौटी. साल 1933 में क्यूबा की सेना के अफ़सर फुलगेन्सियो बतिस्ता के नेतृत्व में तख़्तापलट हुआ और जेरार्डो मचाडो को सत्ता से हटा दिया गया. 1953 में फिदेल कास्त्रो ने बतिस्ता शासन के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया, जो असफल हुआ.
फिदेल कास्त्रो ने किया तख्ता पलट
यहीं से अमेरिका और क्यूबा के बीच दुश्मन की नींव गहरी होनी शुरू हुई. क्योंकि छह साल बाद यानी 1959 में आखिरकार फिदेल कास्त्रो ने अमेरिका के समर्थन वाली सरकार को क्यूबा से हटा दिया था. शुरू में तो अमेरिका ने नई सरकार को मान लिया, लेकिन जब क्यूबा की पींगे सोवियत संघ से बढ़ने लगीं, तो अमेरिका नाराज हो गया. फिर क्यूबा ने सोवियत संघ से बिजनेस भी शुरू किया. क्यूबा ने अमेरिकी कंपनियों की संपत्ति अपने कब्जे में ली और अमेरिकी सामान पर टैक्स बढ़ाना शुरू किया.
इधर, अमेरिका को पता चला कि सोवियत संघ के बाद अब क्यूबा चीन की तरफ भी हाथ बढ़ा रहा है, ये अमेरिका को गवारा नहीं था. लिहाजा, अमेरिका ने क्यूबा के खिलाफ सख्त रवैया अपनाना शुरू किया.
अमेरिका ने आर्थिक तौर पर क्यूबा पर दबाव बनाना शुरू कर दिया. क्यूबा से चीनी की खरीदारी कम करने के बाद अमेरिका ने लगभग सभी सामान क्यूबा को भेजना बंद कर दिया. तब राष्ट्रपति थे जॉन एफ कैनेडी, उन्होंने इसे क्यूबा पर 'पूर्ण आर्थिक प्रतिबंध' लगाए और टूरिज्म-ट्रांसपोर्ट भी बैन कर दिया.
जब क्यूबा में फेल हुआ अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन
दो साल बाद अमेरिका ने क्यूबा की सरकार गिराने के लिए मिलिट्री ऑपरेशन भी चलाया लेकिन जनता ने इस ऑपरेशन में सहयोग नहीं किया और तीन दिन के भीतर अंदरूनी विद्रोह को भी असफल कर दिया, क्योंकि अमेरिका से हवाई सहायता नहीं पहुंच पाई थी.
इसके बाद क्यूबा ने सोवियत संघ को अपने यहां गुप्त रूप से परमाणु मिसाइल लगाने की इजाज़त दी. अक्तूबर 1962 में अमेरिकी विमानों ने ये मिसाइलें देख लीं. इसके बाद 13 दिनों तक अमेरिका और सोवियत संघ के बीच बड़ा तनाव रहा.
इस तनाव के बीच सोवियत संघ और अमेरिका के बीच बातचीत हुई. सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव मिसाइलें हटाने पर राजी हुए और कैनेडी ने क्यूबा पर अटैक न करने का वादा किया. तुर्की से अमेरिकी मिसाइलें भी हटाई गईं.
...लेकिन ये समझौता सिर्फ किसी कार्रवाई को न करने को लेकर था. मन से कड़वाहट हटाने का नहीं. लिहाजा अमेरिका-क्यूबा में तनाव बना रहा. अगले कई दशकों तक अमेरिका ने क्यूबा को आर्थिक और राजनयिक रूप से अलग रखा. 1982 में अमेरिकी राष्ट्रपति रहे रोनाल्ड रीगन ने क्यूबा को 'आतंकवाद समर्थक' देश बता दिया. बाद में जॉर्ज बुश और बिल क्लिंटन ने हेल्म्स-बर्टन एक्ट बनाए.
इसके मुताबिक़, जब तक क्यूबा में लोकतंत्र नहीं आएगा और कास्त्रो परिवार सत्ता से बाहर नहीं होगा, तब तक प्रतिबंध नहीं हटेंगे.
हालांकि क्यूबा और अमेरिका के संबंधों में नर्मी का भी एक दौर आया. 2008 में बराक ओबामा ने सत्ता में आने के बाद क्यूबा जाने और वहां पैसे भेजने के नियमों में ढील दी गई. 2014 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और क्यूबा के मुखिया राउल कास्त्रो ने अचानक ही राजनयिक संबंधों को लेकर बात की और इसे गहरा बनाने का ऐलान किया. दूतावास फिर से खोले गए. क्यूबा को 'आतंकवाद समर्थक' देशों की सूची से हटाया गया. 2016 में ओबामा खुद क्यूबा गए, यह साल 1928 के बाद पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की क्यूबा यात्रा थी.
ट्रंप और बाइ़डन प्रशासन का क्या रुख रहा?
इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप शासन में आए और यह उनका पहला कार्यकाल था. इस दौरान उन्होंने ओबामा प्रशासन के अधिकतर फैसले पलट दिए. ट्रंप ने क्यूबा की सेना से जुड़ी कंपनियों से व्यापार बंद किया, अकेले यात्रा करने पर रोक लगाई, समुद्री और हवाई यात्राओं पर भी रोक लगाई. 2019 में क्यूबा को फिर से आतंकवाद समर्थक देश करार दिया गया.
फिर जो बाइडन सत्ता में आए और उन्होंने भी ओबामा सरकार की तरह नियमों की कसावट कुछ कम की.क्यूबा के लिए ज्यादा उड़ानें शुरू हुईं. इसके बाद 2021 में क्यूबा में खाना-दवा, बिजली की किल्लत से परेशान लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किए. सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर एक्शन लिया और इंटरनेट बैन कर दिया.
बाइडन प्रशासन ने क्यूबा पर नए प्रतिबंध लागू कर दिए. क्यूबा के हालात दिन-ब-दिन बदतर होने लगे थे. लोग बड़ी संख्या में अमेरिका की ओर भागने लगे. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार 2021 से अप्रैल 2024 तक लगभग 5 लाख क्यूबाई अमेरिकी बॉर्डर पर आए हैं. बाइडन सरकार ने मानवीय आधार पर कुछ को आने की अनुमति भी दी थी.
ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान 2018 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने क्यूबा, निकारागुआ और वेनेज़ुएला को 'तानाशाही की तिकड़ी' कहा. साथ ही यहां की सरकारों को अस्थिरता और इंसानी शोक का जिम्मेदार ठहराया.
ट्रंप सरकार ने वेनेजुएला से क्यूबा को तेल जाने से रोकने के लिए शिपिंग कंपनियों और क्यूबा की सरकारी तेल कंपनी पर प्रतिबंध लगाए. ट्रंप का रुख वेनेजुएला और क्यूबा पर एक सा ही लग रहा है और ये रुख ही दोनों देशों की 67 साल पुरानी दुश्मनी को चर्चा में ला रहा है.
विकास पोरवाल