ईरान में अमेरिकी और इजरायली हमले के बाद पाकिस्तान जल रहा है. इजरायली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में अमेरिका और इजरायल विरोधी हिंसा हो रही है. राजधानी इस्लामाबाद, आर्थिक राजधानी कराची, लाहौर, मुल्तान में हजारों लोग सड़क पर हैं. कराची में भीड़ अमेरिकी कांसुलेट में आगजनी करने पर आमदा थी. यहां पर एक भीड़ कांसुलेट में घुस गई थी. उपद्रवियों को काबू में करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी. इस फायरिंग में कम से कम 10 लोग मारे गए और कई घायल हो गए.
पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति के बाद आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अब दो मोर्चों पर फंसे हैं. एक तरफ सड़कों पर उतरी पाकिस्तानी जनता (खासकर शिया समुदाय) जो अमेरिका-इजरायल के खिलाफ गुस्से में है, और पाकिस्तान में अमेरिकी प्रतिष्ठानों पर हमला करने को आमदा है.
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दबाव है. पाकिस्तान की सरकार विएना कन्वेंशन के तहत अमेरिकी दूतावास और अमेरिकी प्रतिष्ठानों को सुरक्षा करने को प्रतिबद्ध है. अगर अमेरिकी स्टाफ, दूतावास या कांसुलेट को किसी तरह का नुकसान होता है तो पाकिस्तान के लिए अमेरिका के सामने जवाब देना मुश्किल हो जाएगा.
ध्यान रहे ट्रंप कई मौकों पर आसिम मुनीर को अपना फेवरिट जनरल कह चुके हैं.
नकली सहानुभूति नहीं चाहती है जनता
खामेनेई की मौत की खबर 28 फरवरी को आई. पाकिस्तान सरकार ने इस उन्होंने इसे मुस्लिम उम्माह और पाकिस्तान-ईरान दोनों के लिए शोक का दिन बताया, लेकिन साथ ही शांतिपूर्ण विरोध की अपील की और कानून हाथ में न लेने की चेतावनी दी. लेकिन जनता इसे नकली सहानुभूति मान रही है.
कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर बड़े प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने "डेथ टू अमेरिका, डेथ टू इजरायल" के नारे लगाए. पुलिस और सुरक्षाबलों के बीच झड़प में 10 लोग मारे गए और दर्जनों जख्मी हो गए हैं.
इस्लामाबाद में तहरीक-ए-जाफरिया पाकिस्तान ने विरोध प्रदर्शन और US एम्बेसी को घेरने की घोषणा की. इसके बाद अधिकारियों ने रेड जोन को सील करके और वहां जाने वाली सभी सड़कों पर अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात किया है.
इस्लामाबाद में सड़क पर उतरे गृह मंत्री
राजधानी इस्लामाबाद में भयंकर बवाल हो रहा है. पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े हैं. प्रदर्शनकारियों को मनाने के लिए
गृह मंत्री मोहसिन नकवी खुद सड़क पर उतरे, लेकिन बवाल थम नहीं रहा है.
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इसके बाद मोहसिन नकवी ने उलेमाओं के साथ मीटिंग की और उपद्रवियों को संबोधित करने को कहा है.
सिंध के होम मिनिस्टर ज़ियाउल हसन लंजर ने प्रदर्शनकारियों पर सख्ती दिखाई है और कहा है कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाज़त नहीं दी जाएगी. उन्होंने आदेश दिया कि सेंसिटिव जगहों की सिक्योरिटी को और असरदार बनाया जाए.
उन्होंने चेतावनी दी है कि लॉ एंड ऑर्डर बिगाड़ने वाले लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.
'मुनीर और शहबाज अमेरिका के गुलाम'
पाकिस्तान में प्रदर्शनकारी कह रहे हैं कि मुनीर और शहबाज अमेरिका के गुलाम हैं, पाकिस्तान ईरान के साथ क्यों नहीं खड़ा हो रहा है. पाकिस्तान में
शियाओं की अच्छी खासी आबादी है. और शिया समुदाय खामेनेई को अमेरिका के खिलाफ "इस्लामी प्रतिरोध" का प्रतीक मानता है. इतने बड़े नेता का अमेरिका और इजरायल के हाथों मारा जाना शियाओं के सम्मान को बड़ा झटका है.
मुनीर पर ट्रंप का प्रेशर
पाकिस्तान का टॉप लीडरशिप इस वक्त अमेरिकी नेतृत्व के आगे बिछा हुआ है. 2025 में मुनीर और शहबाज ने कई बार ट्रंप से मुलाकात की. पाकिस्तान गाजा के लिए बने बोर्ड ऑफ पीस का सदस्य है. पाकिस्तान पर गाजा में भी सेना भेजने के दबाव है. दरअसल पाकिस्तान ट्रंप के आगे-पीछे मंडराकर दुनिया के मंचों पर अपनी अहमियत साबित करता है.
इसके बदले ट्रंप पाकिस्तान को कर्ज, मदद के रूप में थोड़ी बहुत रियायतें देते रहते हैं. लेकिन ईरान में अमेरिकी एक्शन और पाकिस्तान में उससे पैदा हुई स प्रतिक्रिया के बाद आसिम मुनीर के लिए 'डबल ट्रबल' की स्थिति पैदा हो गई है.
मुनीर की मुश्किल ये है कि अगर वे इस परिस्थिति में ट्रंप और अमेरिका के साथ चिपके रहे और पाकिस्तान ने अमेरिकी एक्शन की पूरजोर निंदा नहीं की तो मुनीर घरेलू स्तर पर 'इस्लाम के दुश्मन' कहलाएंगे.
इमरान खान समर्थक और कट्टर इस्लामी पार्टियों ने मुनीर और शहबाज पर ऐसा आरोप लगाना शुरू कर दिया है.
वहीं अगर पाकिस्तान अगर इजरायल अमेरिका के खिलाफ ज्यादा मुखर हुआ तो अमेरिकी प्रशासन और ट्रंप इससे नाराज हो सकते हैं. ट्रंप की नाराजगी पाकिस्तान के लिए आर्थिक मदद, IMF डील या अफगानिस्तान बॉर्डर पर दबाव बढ़ा सकता है.
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