ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच इजरायल ने एक बड़ा और विवादित फैसला लिया है. इजरायली प्रशासन ने कब्जे वाले पूर्वी येरुशलम में स्थित अल-अक्सा मस्जिद में जुमे की नमाज पर रोक लगा दी है. यह फैसला रमजान के पवित्र महीने के दौरान लिया गया है, जिससे मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ गई है.
इजरायल की सिविल एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा कि यह फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया है. उनका कहना है कि ईरान की ओर से इजरायल और पूरे क्षेत्र पर किए जा रहे मिसाइल हमलों को देखते हुए एहतियाती कदम उठाना जरूरी था.
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इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, पुराने शहर के सभी धार्मिक स्थलों को अस्थायी रूप से बंद किया जा रहा है. इसमें वेस्टर्न वॉल, टेंपल माउंट और चर्च भी शामिल हैं. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अगले आदेश तक किसी भी धर्म के श्रद्धालुओं या पर्यटकों को इन स्थानों में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी.
इजरायल में 9, ईरान में 1200 की मौत
दरअसल पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है. अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की है, जिसके जवाब में ईरान लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है. इन हमलों में अब तक इजरायल में करीब 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि ईरान में इजरायल और अमेरिका के हमलों में 1200 से ज्यादा लोग मारे गए बताए जा रहे हैं.
अल-अक्सा मस्जिद बंद किए जाने पर क्या बोले इमाम?
इजरायल ने युद्ध शुरू होने के बाद से पुराने शहर में प्रवेश पर भी कड़ी पाबंदी लगा दी है. फिलहाल सिर्फ वहां रहने वाले लोग और दुकानदारों को ही अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है. इस फैसले की कड़ी आलोचना भी हो रही है. अल-अक्सा मस्जिद के वरिष्ठ इमाम इकरिमा सबरी ने कहा कि इजरायली प्रशासन हर मौके का इस्तेमाल मस्जिद को बंद करने के लिए करता है. उन्होंने कहा कि यह कदम पूरी तरह से अनुचित है और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है.
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एक साथ 5 लाख लोगों के नमाज पढ़ने की क्षमता
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अल-अक्सा मस्जिद को लेकर तनाव नया नहीं है. पिछले महीने भी इजरायली प्रशासन ने रमजान की पहली नमाज के लिए पश्चिमी तट से आने वाले फिलिस्तीनियों की संख्या सिर्फ 10 हजार तक सीमित कर दी थी, जबकि आम तौर पर यहां लाखों लोग इकट्ठा होते हैं. अल-अक्सा परिसर में करीब पांच लाख लोगों के एक साथ नमाज पढ़ने की क्षमता है.
मस्जिद पुराना शहर ईस्ट येरूशेलम में स्थित है, जिसे इजरायल ने 1967 के युद्ध के बाद अपने कब्जे में ले लिया था. अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक यह कब्जा अवैध माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद यहां सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश नियंत्रण इजरायली बलों के हाथ में ही है.
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