कोलकाता: काम पर लौटेंगे जूनियर डॉक्टर, लेकिन जारी रहेगा विरोध प्रदर्शन

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की मांग है कि राज्य सरकार अस्पतालों में सुरक्षा बढ़ाने की आवश्यकता सहित विभिन्न मुद्दों पर ध्यान दे. मंगलवार सुबह से अनिश्चितकालीन और पूर्ण रूप से काम बंद करने के अपने फैसले की घोषणा करने से पहले डॉक्टरों ने लगभग पूरी रात गवर्निंग बॉडी की बैठक की.

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कोलकाता में जूनियर डॉक्टरों के प्रदर्शन की तस्वीर (PTI) कोलकाता में जूनियर डॉक्टरों के प्रदर्शन की तस्वीर (PTI)

अनिर्बन सिन्हा रॉय

  • कोलकाता,
  • 04 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 9:26 PM IST

पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है लेकिन उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं तब तक वे धर्मतला इलाके में धरने पर बैठे रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह टिप्पणी किए जाने के एक दिन बाद कि डॉक्टरों को इन-पेशेंट और आउट-पेशेंट दोनों विभागों में ड्यूटी सहित आवश्यक कार्य करना चाहिए, पश्चिम बंगाल में आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों ने मंगलवार को पूर्ण रूप से काम बंद कर दिया था. 

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काम पर लौटेंगे डॉक्टर लेकिन जारी रहेगा प्रदर्शन

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की मांग है कि राज्य सरकार अस्पतालों में सुरक्षा बढ़ाने की आवश्यकता सहित विभिन्न मुद्दों पर ध्यान दे. मंगलवार सुबह से अनिश्चितकालीन और पूर्ण रूप से काम बंद करने के अपने फैसले की घोषणा करने से पहले डॉक्टरों ने लगभग पूरी रात गवर्निंग बॉडी की बैठक की.

अब डॉक्टरों ने घोषणा की है कि वे काम में शामिल होंगे लेकिन धर्मतला में अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे. दुर्गा पूजा उत्सव के बीच जूनियर डॉक्टर धर्मतला मेट्रो चैनल पर धरने पर बैठेंगे. जूनियर डॉक्टर मेट्रो चैनल के सामने धरने पर बैठे हैं और आने वाले दिनों में भी बैठे रहेंगे.

21 सितंबर को ड्यूटी पर लौटे थे डॉक्टर

दरअसल 42 दिनों के विरोध के बाद डॉक्टरों ने 21 सितंबर को आंशिक रूप से सरकारी अस्पतालों में अपनी ड्यूटी पर वापस आ गए थे. वे 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक ऑन-ड्यूटी महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के खिलाफ काम बंद करो आंदोलन पर थे. मंगलवार को आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों ने बंगाल सरकार पर उनकी मांगों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए बुधवार 2 अक्टूबर को बड़े स्तर पर रैली निकालने की घोषणा की थी.

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'धीमी गति की कार्रवाई से हम दुखी'

डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, 'आरजी कर मामले की जांच की धीमी गति से कार्रवाई से हम दुखी हैं. पिछले 50 दिनों में सरकारी अस्पतालों में केवल कुछ प्रतिशत सीसीटीवी कैमरे ही लगाए गए हैं. सागर दत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टरों पर हमला चिकित्सकों की अपर्याप्त सुरक्षा को दर्शाता है. डॉक्टरों पर इस तरह के हमले की पुनरावृत्ति कुछ अन्य सरकारी अस्पतालों में भी हुई. हम इस भयानक भय की स्थिति में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.'

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