पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर गुरुवार शाम 6 बजे पुनर्मतदान खत्म हो गया. इस बार वोटर्स में अच्छा उत्साह देखने को मिला. चुनाव आयोग के फाइनल आंकड़ों के मुताबिक, शाम 6 बजे तक यहां 88.13 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. सुबह 7 बजे से ही पोलिंग बूथों पर लंबी लाइनें दिखीं, जो शाम तक बनी रहीं. अब सभी उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो चुकी है. इस सीट के नतीजे 24 मई को घोषित किए जाएंगे.
पश्चिम बंगाल की कुल 294 विधानसभा सीटों में से 293 सीटों के नतीजे पहले ही घोषित किए जा चुके हैं. इन नतीजों में बीजेपी को सबसे ज्यादा 207 सीटें मिली हैं, जबकि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खाते में 80 सीटें गई हैं और बाकी सीटें अन्य के हिस्से आई हैं. अब पूरे बंगाल में सिर्फ एक आखिरी सीट बची है फलता. इसी फलता सीट पर दोबारा कराया गया मतदान गुरुवार शाम 6 बजे पूरी तरह खत्म हो गया. इस बार यहां के वोटर्स में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और शाम होने तक कुल 88.13 फीसदी बंपर वोटिंग दर्ज की गई.
दरअसल, इस सीट पर दोबारा चुनाव कराने की एक बड़ी वजह थी. पिछले महीने 29 अप्रैल को जब यहां मुख्य मतदान हुआ था, तब ईवीएम (EVM) में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ और गड़बड़ियां देखने को मिली थीं. हंगामा इतना बढ़ गया था कि चुनाव आयोग को वहां का मतदान रद्द करना पड़ा. इसके बाद ही आयोग ने गुरुवार को यहां दोबारा यानी री-पोलिंग कराने का फैसला लिया, ताकि जनता को अपना सही नेता चुनने का मौका मिल सके.
सुरक्षा के थे बेहद कड़े इंतजाम, बूथों पर जवान हुए दोगुने
पिछली गड़बड़ी से सबक लेते हुए इस बार चुनाव आयोग ने सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए थे. फलता विधानसभा के सभी 285 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा बलों की तैनाती पिछली बार के मुकाबले दोगुनी कर दी गई थी. जहां पिछले महीने हुए चुनाव में हर बूथ पर सिर्फ 4 जवान तैनात थे, वहीं इस बार केंद्रीय सुरक्षा बल (CAPF) के 8-8 जवानों को मोर्चे पर खड़ा किया गया था. शांतिपूर्ण तरीके से वोटिंग कराने के लिए केंद्रीय बलों की करीब 35 कंपनियां लगाई गई थीं और किसी भी गड़बड़ी से निपटने के लिए 30 क्विक रिस्पॉन्स टीमें लगातार गश्त कर रही थीं. इसी सख्ती की वजह से कहीं से भी किसी हंगामे की खबर नहीं आई और पूरी वोटिंग शांति से निपट गई.
सुरक्षा के अलावा इस सीट पर राजनीतिक हलचल भी कम नहीं रही. मंगलवार को यहां उस वक्त अचानक खलबली मच गई, जब TMC के उम्मीदवार जहांगीर खान ने निजी कारणों का हवाला देकर ऐन वक्त पर चुनाव न लड़ने का एलान कर दिया. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने तुरंत साफ किया कि यह उनका अपना निजी फैसला है और पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने जहांगीर खान के खिलाफ देवांग्शु पांडा को मैदान में उतारा है. अब देखना दिलचस्प होगा कि 24 मई को जब वोटों की गिनती होगी, तो फलता की जनता किसे अपना सरताज चुनती है.
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