13 साल में दो PA, एक बॉडीगार्ड... पहले भी करीबियों को खो चुके हैं शुभेंदु अधिकारी

चंद्रनाथ रथ की हत्या ने बंगाल की सियासत में पुराने सवाल फिर खड़े कर दिए हैं. पिछले 13 साल में शुभेंदु अधिकारी अपने तीन करीबियों को खो चुके हैं. चुनाव के बाद भी जारी हिंसा सियासी रंजिश की गहराई दिखाती है.

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चुनाव नतीजों के बाद बंगाल में फिर शुरू हुआ खून-खराबा (File Photo) चुनाव नतीजों के बाद बंगाल में फिर शुरू हुआ खून-खराबा (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:23 PM IST

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर हिंसा और सवालों के घेरे में है. इस बार मामला जुड़ा है बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या से. 6 मई की रात मध्यमग्राम में बाइक सवार हमलावरों ने उनकी गाड़ी रोककर नजदीक से गोली मारी और फरार हो गए. चंद्रनाथ, जो कभी भारतीय वायुसेना का हिस्सा रहे थे, शुभेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे.

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लेकिन यह पहली बार नहीं है जब शुभेंदु के किसी करीबी की जान गई हो. बीते करीब 13 सालों में उनके दो PA और एक बॉडीगार्ड की असामान्य परिस्थितियों में मौत हो चुकी है. हर बार मौत की कहानी अलग रही, लेकिन अपनों को खोने का दर्द एक जैसा था.

शुभेंदु अधिकारी आज बंगाल में बीजेपी का वो चेहरा हैं, जो मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं. ये वही शुभेंदु हैं जिन्होंने ममता बनर्जी को चुनाव हराकर पूरे देश की सियासत में अपनी धाक जमाई है. चाहे नंदीग्राम का वो ऐतिहासिक चुनाव हो या भवानीपुर की जंग, शुभेंदु ने साबित किया है कि वो ममता के सबसे बड़े सियासी दुश्मन हैं.

उस हर जीत की पटकथा लिखने वालों में चंद्रनाथ रथ जैसे सिपहसालार ही थे, जिन्होंने दिन-रात एक कर दिया था. पर बड़ा सवाल यह है कि आखिर शुभेंदु के करीबियों के साथ ही ऐसी अनहोनी बार-बार क्यों होती है? क्या यह सिर्फ चुनावी रंजिश है या फिर ममता बनर्जी को पटखनी देने वाले इस नेता को कमजोर करने की गहरी और सुनियोजित साजिश?

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पुराने मामलों की परतें भी कम उलझी नहीं रहीं

यह सिलसिला 2013 में शुरू हुआ, जब शुभेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस के सांसद थे. उसी दौरान उनके भरोसेमंद सहयोगी और पूर्व पीए प्रदीप झा को 3 अगस्त की सुबह कोलकाता की स्ट्रैंड रोड पर बेहोशी की हालत में पाया गया. अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. पोस्टमार्टम में मौत की वजह ज्यादा शराब और दम घुटना बताई गई, लेकिन मौके की हालत शक पैदा करती थी. उनके दोनों मोबाइल फोन गायब थे, बटुए में पैसे नहीं थे और कपड़े भी अस्त-व्यस्त थे. उस समय इसे हत्या बताया गया, मगर जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी.

इसके बाद 2018 में उनके बॉडीगार्ड सुभब्रत चक्रवर्ती की मौत हुई. उन्हें कांथी में उनके ही बैरक में सिर में गोली लगी हालत में पाया गया. शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन बाद में परिवार ने हत्या का आरोप लगाया और केस दोबारा दर्ज हुआ. जांच एजेंसियों ने पड़ताल की, लेकिन अब तक इस मामले में भी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है.

अब 2026 में, जब बंगाल चुनाव के नतीजे आ चुके हैं और बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला है, उसी बीच चंद्रनाथ रथ की हत्या ने माहौल गर्म कर दिया है. 4 मई को नतीजे आने के बाद से राज्य के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा, आगजनी और हमलों की खबरें सामने आ रही हैं. टीएमसी और बीजेपी एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि शुभेंदु अधिकारी ने फिर अपना एक भरोसेमंद साथी खो दिया है. यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि उसी सिलसिले की अगली कड़ी है, जिसमें उनके करीबी लगातार निशाने पर आते रहे हैं.
 

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