बीजेपी के बागी विधायक बिष्णु प्रसाद शर्मा पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी में शामिल हो गए हैं. बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने पाला बदल लिया है.
कुर्सियांग से पहली बार के विधायक बिष्णु प्रसाद शर्मा कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी में शामिल हुए. उनके इस कदम को बंगाल में आगामी कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले की हलचल के तौर पर देखा जा रहा है.
टीएमसी में शामिल होने के बाद बिष्णु प्रसाद शर्मा ने कहा कि वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विकास मॉडल के लिए काम करेंगे. उन्होंने कहा कि मुझे मेरे गोरखा भाई-बहनों ने चुना था लेकिन मैं उनके लिए काम नहीं कर पाया. बीजेपी ने कई वादे किए, लेकिन कुछ नहीं किया. जमीनी स्तर पर कोई वास्तविक काम नहीं हुआ.
शर्मा ने अलग गोरखालैंड राज्य की मांग का कई बार समर्थन किया था और तर्क दिया था कि पहाड़ी क्षेत्रों को विशेष प्रशासनिक ध्यान और विकास की आवश्यकता है. उन्होंने अलग उत्तर बंगाल राज्य की मांग को भी समय-समय पर जोरदार ढंग से उठाते हुए हुए कि क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है.
अतीत में शर्मा ने भाजपा की सार्वजनिक रूप से कई बार आलोचना की थी और गोरखालैंड की मांग पर कार्रवाई न होने को लेकर विधानसभा के बाहर प्रदर्शन भी किया था. उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में दार्जिलिंग सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मिट्टी का बेटा बनकर चुनाव लड़ा था. हालांकि, उनकी यह कोशिश सफल नहीं रही और भाजपा के राजू बिस्ता ने सीट बरकरार रखी.
वहीं, उनके टीएमसी में शामिल होने को कमतर बताते हुए विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक शंकर घोष ने कहा कि शर्मा का अपने क्षेत्र में कोई मजबूत जनाधार नहीं है और वे लंबे समय से पार्टी के संपर्क में भी नहीं थे. सिलीगुड़ी के विधायक घोष ने दावा किया कि उनके टीएमसी में जाने से पहाड़ी क्षेत्रों में बीेजपी पर कोई असर नहीं पड़ेगा. बता दें कि 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुनाव आने वाले समय में होने की उम्मीद है.
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