पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में एक प्राइवेट हॉस्पिटल की दो नर्सों में निपाह वायरस के संदिग्ध लक्षण पाए गए हैं. एजेंसी के मुताबिक, सोमवार को आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एम्स कल्याणी की वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी में इन मामलों की पुष्टि हुई है. प्रभावित नर्सों में एक पुरुष और एक महिला शामिल हैं, जिनकी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है.
संक्रमण की जानकारी मिलते ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने राज्य सरकार के साथ समन्वय कर वायरस को रोकने के लिए नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पांस टीम को तैनात कर दिया है.
स्वास्थ्य सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से चर्चा कर हालात का जायजा लिया है. यह टीम पुणे, चेन्नई, कोलकाता और कल्याणी के प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों को मिलाकर बनाई गई है, जिससे बीमारी के प्रसार को समय रहते कंट्रोल किया जा सके.
गंभीर हालत में दोनों स्वास्थ्यकर्मी
राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, दोनों नर्स एक ही अस्पताल में कार्यरत थे. उनके सैंपल जांच के लिए एम्स कल्याणी भेजे गए थे, जहां प्रारंभिक रिपोर्ट में निपाह संक्रमण की संभावना जताई गई है. मौजूदा वक्त में दोनों का इलाज चल रहा है, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी शारीरिक स्थिति को चिंताजनक बताया है.
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केंद्र ने लिया एक्शन...
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि 11 जनवरी को संदिग्ध मामले मिलने के तुरंत बाद समन्वित कार्रवाई शुरू कर दी गई थी. तैनात की गई रिस्पॉन्स टीम में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) पुणे, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी चेन्नई और वन्यजीव विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं. टीम वायरस के स्रोत का पता लगाने और इसे फैलने से रोकने में राज्य की मदद करेगी.
संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है. केंद्र सरकार ने पुणे और चेन्नई के विशेषज्ञों को विशेष रूप से वायरस की प्रकृति और इसके फैलने के तरीकों पर रिसर्च करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही, पर्यावरण और वन्यजीव विभाग को भी टीम में जोड़ा गया है, जिससे निपाह के प्राकृतिक स्रोतों की निगरानी की जा सके.
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