नोएडा बवाल से ठीक पहले बने कई व्हाट्सएप ग्रुप, फेसबुक से लेकर X तक पर मैसेज देने वालों की हुई पहचान

नोएडा में प्राइवेट कर्मचारियों के उग्र प्रदर्शन में एक बड़ा खुलासा हुआ है. बवाल से पहले कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर कर्मचारियों को जोड़ा गया. सोशल मीडिया पर फर्जी मैसेज और 50 से ज्यादा नए बॉट हैंडल सक्रिय पाए गए. अब फंडिंग और डिजिटल नेटवर्क की जांच एसटीएफ कर रही है, जबकि मंगलवार को भी कुछ जगहों पर पथराव हुआ है. 

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नोएडा में कर्मचारियों ने कई ऑफिस में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की है (Photo: ITG) नोएडा में कर्मचारियों ने कई ऑफिस में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की है (Photo: ITG)

संतोष शर्मा

  • नोएडा ,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:48 PM IST

नोएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ कर्मचारियों का आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा. कई इलाकों में पुलिस पर पथराव की घटनाएं सामने आईं है. हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्थिति को काबू में लेने का दावा किया है. पुलिस का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम  के पीछे सुनियोजित साजिश हुई है. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे तस्वीर और साफ होती जा रही है. पुलिस के मुताबिक, बवाल से ठीक पहले सोशल मीडिया पर एक्टिविटी अचानक बढ़ी और कई नए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए. इन ग्रुप्स के जरिए कर्मचारियों को जोड़ने और उन्हें एकजुट करने की कोशिश की गई.

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गौतम बुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के मुताबिक, पिछले दो दिनों में बड़ी संख्या में व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए, जिनमें क्यूआर कोड स्कैन कर कर्मचारियों को जोड़ा जा रहा था. यह तरीका आमतौर पर संगठित नेटवर्क इस्तेमाल करते हैं. जहां कम समय में बड़ी संख्या में लोगों को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाता है. पुलिस को शक है कि इस पूरी गतिविधि के पीछे एक संगठित और सुनियोजित सिंडिकेट सक्रिय हो सकता है.

300 से ज्यादा हिरासत में, 7 एफआईआर दर्ज

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, हिंसक प्रदर्शन के मामले में अब तक 300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है और सात एफआईआर दर्ज की गई हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह संख्या आगे और बढ़ सकती है. पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने बताया कि जिन लोगों ने भीड़ को भड़काने या हिंसा फैलाने में भूमिका निभाई, उनकी पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने यह भी साफ किया कि आगे और गिरफ्तारियां होंगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.

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फंडिंग एंगल भी जांच के दायरे में

इस मामले में फंडिंग की भी जांच हो रही है. पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या इस पूरे आंदोलन को कहीं से आर्थिक मदद मिल रही थी. लक्ष्मी सिंह के मुताबिक, अगर जांच में यह सामने आता है कि आरोपियों को राज्य के बाहर या देश के बाहर से फंडिंग मिली है, तो उस आधार पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी. 

सोशल मीडिया पर भी सख्ती

इस पूरे मामले में सोशल मीडिया की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है. पुलिस के मुताबिक, Facebook से लेकर X तक कई प्लेटफॉर्म पर भ्रामक और भड़काऊ संदेश फैलाए गए. अब तक दो X हैंडल्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. इसके अलावा 50 से ज्यादा ऐसे बॉट हैंडल चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें पिछले 24 घंटे के भीतर बनाया गया और जिनका मकसद अफवाह फैलाना था. पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित कोशिश थी, जिसके जरिए माहौल को भड़काने का प्रयास किया गया.

यूपी एसटीएफ को सौंपी गई जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए डिजिटल ट्रेल की जांच अब उत्तर प्रदेश एसटीएफ को सौंप दी गई है. यह एजेंसी इन सभी फर्जी हैंडल्स की गतिविधियों, लोकेशन और उनके पीछे मौजूद लोगों की पहचान करेगी. डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर यह भी पता लगाया जाएगा कि इन हैंडल्स को कौन चला रहा था और क्या इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है.

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लखनऊ से हो रही हाई लेवल मॉनिटरिंग

नोएडा की स्थिति पर सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि लखनऊ से भी लगातार नजर रखी जा रही है. पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण और एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश खुद कंट्रोल रूम से हर अपडेट ले रहे हैं. वरिष्ठ अधिकारियों को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे मौके पर मौजूद रहें और हालात पर कड़ी नजर बनाए रखें. शाम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी हाल में कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा.

पुलिस-प्रशासन का संवाद पर जोर

पुलिस और प्रशासन की रणनीति पहले संवाद, फिर कार्रवाई की है. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि श्रमिकों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार किया जाए और उनकी बात सुनी जाए. प्रशासन कंपनी प्रबंधन और श्रमिकों के बीच सेतु की भूमिका निभा रहा है, ताकि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके. हालांकि, साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी.

प्रशासन बोला- हम कर्मचारियों के साथ हैं
 

प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि सरकार श्रमिकों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील है. उनकी मांगों को सुना जा रहा है और समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि जो लोग हिंसा, आगजनी या अफवाह फैलाने में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. नुकसान हुई संपत्ति की भरपाई भी संबंधित लोगों से ही कराई जाएगी.

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सरकार ने बढ़ा दी है सैलरी 

बीते सोमवार को नोएडा में श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन और आगजनी के बाद  उत्तर प्रदेश सरकार ने देर रात न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी कर दी है.अंतरिम वेतन वृद्धि के नए आदेश 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे. अलग-अलग श्रेणियां में अधिकतम करीब 3000 तक इजाफा हुआ है. यह तात्कालिक फैसला है, आगे व्यापक समीक्षा के बाद वेज बोर्ड के माध्यम से स्थाई समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

साथ ही सरकार ने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का खंडन किया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि श्रमिकों का न्यूनतम वेतन ₹20,000 प्रति माह निर्धारित कर दिया गया है.सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सूचना पूरी तरह से 'मनगढ़ंत और झूठी' है.लोगों से केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर ही विश्वास करने की अपील की गई है.

शासन द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य सरकार ने वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और श्रमिकों की मांगों को देखते हुए न्यूनतम वेतन में तत्काल रूप से अंतरिम वृद्धि (Interim Hike) करने का निर्णय लिया है.अगले माह एक वेज बोर्ड (Wage Board) का गठन किया जाएगा, जिसकी अनुशंसाओं के आधार पर भविष्य में न्यूनतम वेतन का निर्धारण होगा.इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा नई श्रम संहिताओं के तहत पूरे देश में एक समान न्यूनतम आधार रेखा (फ्लोर वेज) तय करने की प्रक्रिया भी प्रगति पर है.

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