'मां के दूध को चुनौती और व्यापारियों का अपमान…' योगी सरकार के दो मंत्रियों की जुबानी जंग खुलकर आई सामने

यूपी की राजनीति में योगी सरकार के दो कैबिनेट मंत्रियों अनिल राजभर और ओमप्रकाश राजभर के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. मां के दूध, चोर और व्यापारी अपमान जैसे बयानों ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है. वाराणसी से उठे इस विवाद ने गठबंधन की मर्यादा, बयानबाज़ी और सामाजिक सम्मान पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

Advertisement
ओपी राजभर और अनिल राजभर के बीच जुबानी जंग तेज हो गई (Photo: ITG) ओपी राजभर और अनिल राजभर के बीच जुबानी जंग तेज हो गई (Photo: ITG)

रोशन जायसवाल

  • वाराणसी ,
  • 03 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:26 AM IST

यूपी की राजनीति में इन दिनों शब्दों की तल्खी बढ़ गई है. योगी सरकार के दो कैबिनेट मंत्रियों के बीच सार्वजनिक मंच से चली जुबानी जंग की सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर और भाजपा विधायक व कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर के बीच बयानबाज़ी अब आरोप-प्रत्यारोप और मां के दूध जैसे शब्दों तक आ पहुंची है.

Advertisement

अनिल राजभर के भाषण को लेकर ओमप्रकाश राजभर ने तीखी प्रतिक्रिया दी और बयान में 'मां के दूध' जैसी टिप्पणी को शामिल कर दिया. वाराणसी में मीडिया से विशेष बातचीत के दौरान कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने पूरे प्रकरण पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राजनीति और सियासत में मां को नहीं लाना चाहिए. चाहे वह उनकी मां हो या ओमप्रकाश राजभर की मां. अनिल राजभर ने कहा, हम सब अपनी मां का दूध पीकर ही बड़े हुए हैं. इस तरह की भाषा न तो राजनीति को शोभा देती है और न ही समाज को. दरअसल, ओमप्रकाश राजभर ने मीडिया से बातचीत के दौरान अनिल राजभर पर निशाना साधते हुए कहा था कि अगर अनिल राजभर ने अपनी मां का दूध पिया है तो वह यह बताएं कि देश में किस दुकान पर वोट बेचा जाता है. इसी बयान को लेकर अनिल राजभर ने नाराजगी जताई और इसे अनावश्यक व मर्यादा के खिलाफ बताया.

Advertisement

मंच से चोर शब्द और उस पर सफाई

इस विवाद की जड़ सुहेलदेव जयंती के मंच से दिया गया वह बयान है, जिसमें अनिल राजभर ने समाज को बेचने और चोर जैसे शब्दों का प्रयोग किया था. इस पर सफाई देते हुए अनिल राजभर ने कहा कि उन्होंने न तो किसी नेता का नाम लिया और न ही किसी पार्टी का. अगर मैंने किसी का नाम नहीं लिया, किसी पार्टी का उल्लेख नहीं किया, तो लोग अपने ऊपर क्यों ले लेते हैं ? अनिल राजभर ने यह भी कहा कि पिछले तीन वर्षों से वह लगातार बड़े कार्यक्रम आयोजित करते आ रहे हैं. लेकिन जब भी वह मंच पर बोलने के लिए खड़े होते हैं, कुछ लोग जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं. उनका आरोप है कि 10-15 लोगों को शराब पिलाकर कार्यक्रम में भेजा जाता है, ताकि हंगामा हो और उनका संबोधन बाधित किया जा सके.

व्यापारी समाज के सम्मान का मुद्दा

विवाद के दौरान लोहा चोर जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर अनिल राजभर ने इसे व्यापारी समाज का अपमान बताया. उन्होंने कहा कि उनके पिता दो बार विधायक रहे हैं और भारतीय नौसेना में सेवाएं दे चुके हैं. अनिल राजभर ने भावुक लहजे में बताया कि उनके पिता ने देश के लिए चीन और पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़ी थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें मेडल से सम्मानित किया गया था. उन्होंने कहा, सेना से रिटायर होकर जब आदमी घर लौटता है तो रोजी-रोजगार करता है. देश का हर व्यापारी सम्मान के योग्य है. व्यापार करना कोई अपराध नहीं है. किसी भी व्यापारी को अपमानित नहीं किया जाना चाहिए. अनिल राजभर ने यह भी जोड़ा कि समाज के आग्रह पर उनके पिता ने व्यापार छोड़कर राजनीति में कदम रखा और दो बार विधायक बने. ऐसे में व्यापार को नीची दृष्टि से देखना गलत है.

Advertisement

गठबंधन की मर्यादा और सियासी संकेत

अपने बयान में अनिल राजभर ने गठबंधन की मर्यादा का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि राजनीति में रहते हुए शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए. गठबंधन में हैं, नहीं तो आप भी मुझे अच्छे तरीके से जानते हैं, कहकर उन्होंने यह संकेत दिया कि राजनीतिक रिश्तों में संयम जरूरी है.

अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे पर तीखी टिप्पणी

बरेली से निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री द्वारा पद से इस्तीफा देने, SC/ST एक्ट को काला कानून बताने और 7 फरवरी को दिल्ली कूच के ऐलान पर भी अनिल राजभर ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने दो टूक कहा, दिल्ली जाएं या फिर दौलताबाद जाएं, कुछ लोगों को नेता बनने का नशा सवार है. सस्ती बातें कहकर नेता बन जाने का सपना देख रहे हैं. अनिल राजभर ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ही नहीं, बल्कि इससे पहले की सरकारों ने भी SC/ST समाज के कल्याण और सुरक्षा के लिए काम किया है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस तरह की बयानबाजी से समाज को बांटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. राजनीति या समाज सेवा के कई रास्ते हैं, लेकिन भड़काऊ बयानों से रास्ता नहीं निकलता.

शंकराचार्य के अल्टीमेटम पर जवाब

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिनों का अल्टीमेटम देने, गोहत्या रोकने और गाय को राज्य माता घोषित करने की मांग पर भी अनिल राजभर ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद लखनऊ आएं, उनका स्वागत है, लेकिन बात दायरे में रहकर करनी चाहिए. अनिल राजभर ने कहा, पहले खुलेआम बूचड़खाने चलते थे, लेकिन क्या अब कहीं दिखाई देते हैं? उन्होंने यह भी जोड़ा कि शंकराचार्य की प्रतिष्ठा के अनुरूप ही सरकार सम्मान करने को तैयार है, लेकिन सार्वजनिक मंचों से इस तरह की चेतावनियां देना उचित नहीं है.

Advertisement

असली और नकली हिंदू का सवाल

कौन असली हिंदू है और कौन नकली इस सवाल पर अनिल राजभर ने स्पष्ट रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि इसका फैसला कोई व्यक्ति या संस्था नहीं, बल्कि देश का संविधान करता है, जिसे बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने बनाया है. इस तरह की बातें राजनीति में कोई स्थान नहीं रखतीं. जनता समय आने पर जवाब दे देती है. 

यूजीसी रेगुलेशन और सवर्ण समाज

यूजीसी रेगुलेशन को लेकर सवर्ण समाज की नाराजगी पर अनिल राजभर ने संतुलित बयान दिया. उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में अगर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आ जाता है, तो उस पर टिप्पणी से बचना चाहिए. आगे सरकार कमेटी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही कदम उठाएगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement