गाजियाबाद में ओमकार अपहरण कांड का मामला उलझता जा रहा है. तीन बाद बीत चुके हैं लेकिन पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं. आखिर गनौली गांव का युवक ओमकार उर्फ ओमन कहां है? वह जिंदा है या नहीं? यदि जिंदा है तो किस हालत में है? और अगर उसके साथ कोई अनहोनी हुई है तो उसका जिम्मेदार कौन है?
दरअसल, 30 मई की सुबह लोनी के खरखड़ी रेलवे अंडरपास के नीचे जो कुछ हुआ, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. सुबह करीब साढ़े आठ बजे लोगों ने गोलियों की तड़तड़ाहट सुनी. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बदमाशों ने ओमकार को घेरकर उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की. मौके से सात से अधिक खोखे मिलने की बात सामने आई. खून से सना घटनास्थल इस बात की गवाही दे रहा था कि युवक को गोली लगी थी. लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने इस घटना को और भी खौफनाक बना दिया.
आरोप है कि हमलावर घायल ओमकार को उसी हालत में गाड़ी में डालकर अपने साथ ले गए. दिनदहाड़े, सरेआम और लोगों के सामने. इसके बाद से ओमकार का कोई सुराग नहीं है.
घटना के चार दिन बाद भी हालात यह हैं कि पुलिस नहरों, नदी-नालों और संभावित ठिकानों पर बॉडी की तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रही है. एसडीआरएफ तक को मैदान में उतारना पड़ा है. स्वाट, क्राइम ब्रांच, सर्विलांस और स्थानीय पुलिस समेत 10 टीमें लगातार तलाश में जुटी हैं. लेकिन जिस युवक को बदमाश सरेआम उठाकर ले गए, उसका अब तक कोई अता-पता नहीं है.
इसी सवाल ने अब ग्रामीणों के गुस्से को विस्फोटक रूप दे दिया है. आज बंथला-चिरौड़ी मार्ग पर सैकड़ों ग्रामीण और महिलाएं सड़क पर उतर आए. लोगों ने जाम लगाकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. ग्रामीणों का कहना है कि अगर पहले मिली शिकायतों पर कार्रवाई होती तो शायद आज यह दिन नहीं देखना पड़ता.
परिजनों का आरोप है कि ओमकार का गांव के कुछ लोगों से विवाद चल रहा था. धमकियां मिल रही थीं. पीछा किए जाने और जान से मारने की कोशिश तक के आरोप लगाए गए थे. शिकायतें भी दी गईं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. अब जब युवक चार दिन से लापता है तो परिवार के सामने सबसे बड़ा डर यही है कि कहीं कोई अनहोनी न हो गई हो.
पीड़ित परिवार की आंखों में नींद नहीं है. घर के बाहर हर आने-जाने वाले पर निगाहें टिक जाती हैं. हर फोन कॉल पर उम्मीद जगती है और अगले ही पल टूट जाती है. मां-बाप, भाई-बहन और परिजन सिर्फ एक सवाल पूछ रहे हैं- "आखिर हमारा ओमकार कहां है?"
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर भी धरनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने कहा कि अपराधी चाहे कितने भी शातिर क्यों न हों, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने दावा किया कि आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं, लेकिन पुलिस उन्हें जल्द गिरफ्तार करेगी.
वहीं, पुलिस उपायुक्त ग्रामीण सुरेंद्रनाथ तिवारी का कहना है कि सूचना मिलते ही मुकदमा दर्ज किया गया था और लगातार कार्रवाई की जा रही है. पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जिन पर आरोपियों को शरण देने और साजिश में शामिल होने का आरोप है. मुख्य आरोपियों की तलाश जारी है.
लेकिन इन तमाम दावों और कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सच यही है कि 80 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है और ओमकार अब भी लापता है. खून से सना अंडरपास, गोलियों के खोखे, सड़क पर उतर आए ग्रामीण, नहरों में चल रही तलाश और एक परिवार की टूटती उम्मीदें- लोनी का यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल बन गया है.
मयंक गौड़