RSS को सत्ता की चाह नहीं, हमारा लक्ष्य हिंदू समाज को एकजुट करना है: मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मेरठ के शताब्दी नगर स्थित माधव कुंज में देश-विदेश के लगभग 950 खिलाड़ियों को संबोधित किया. करीब 50 मिनट के संबोधन में भागवत ने संघ की लगभग 100 वर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए युवाओं से राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया.

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मोहन भागवत ने कहा कि संघ किसी सत्ता, स्पर्धा या विरोध की भावना से प्रेरित नहीं है (File Photo- PTI) मोहन भागवत ने कहा कि संघ किसी सत्ता, स्पर्धा या विरोध की भावना से प्रेरित नहीं है (File Photo- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:30 AM IST

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि संघ का उद्देश्य राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना नहीं है, बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करना और व्यक्तियों के चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण को मजबूत करना है. उन्होंने यह बात मेरठ के शताब्दी नगर स्थित माधव कुंज में देश-विदेश के लगभग 950 खिलाड़ियों से संवाद के दौरान कही.

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भागवत ने स्पष्ट कहा कि संघ का काम अपना नाम बड़ा करना नहीं, बल्कि देश का नाम ऊंचा करना है. उन्होंने दोहराया कि संघ किसी सत्ता, स्पर्धा या विरोध की भावना से प्रेरित नहीं है, बल्कि उसका मूल उद्देश्य समस्त हिंदू समाज का संगठन और व्यक्ति निर्माण है.

करीब 50 मिनट के संबोधन में भागवत ने संघ की लगभग 100 वर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए युवाओं से राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया. प्रतिभागियों के अनुसार उन्होंने स्पष्ट कहा कि संघ किसी समूह के विरोध या प्रतिस्पर्धा में कार्य नहीं करता, बल्कि सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है.

भारत की अवधारणा पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि देश को केवल भौगोलिक सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता. भारत की आत्मा भगवान राम, भगवान कृष्ण, भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी की परंपराओं से प्रेरणा लेती है. 

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उन्होंने कहा कि ‘हिंदू’ शब्द विविधता में एकता का प्रतीक है, न कि जाति का द्योतक. पूजा-पद्धतियां और देवी-देवता भले अलग हों, लेकिन सांस्कृतिक आधार एकता और समरसता है. जब-जब सामाजिक एकता कमजोर हुई, तब-तब राष्ट्र को संकटों का सामना करना पड़ा.

संघ प्रमुख ने समाज के चार स्तंभ संस्कार, सनातन संस्कृति, धर्मभाव और सत्यनिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ का मिशन व्यक्ति निर्माण के माध्यम से पूरे हिंदू समाज का संगठन है. स्वयंसेवक विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हैं.

खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि राष्ट्रनिर्माण किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है. खेलों को उन्होंने लोगों को जोड़ने का सशक्त माध्यम बताया. उन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में मेरठ की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बाद में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को 1925 में संघ की स्थापना के लिए प्रेरित करने वाली बनी.

इस दौरान अर्जुन पुरस्कार विजेता पहलवान अलका तोमर सहित कई खिलाड़ियों ने कार्यक्रम की सराहना की. भागवत इन दिनों उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं और संघ के शताब्दी वर्ष के तहत विभिन्न वर्गों से संवाद कार्यक्रम कर रहे हैं. शनिवार को उनका बुद्धिजीवियों के साथ संवाद प्रस्तावित है.

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